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टोक्यों में क्यों 8वें नंबर पर रहे थे नीरज चोपड़ा? दोहा डायमंड लीग से पहले बताई पूरी बात

बीते साल सितंबर में नीरज चोपड़ा ने टोक्यो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 84.03 मीटर का थ्रो किया. इस थ्रो के साथ वह 8वें स्थान पर रहे थे. नीरज चोपड़ा ने माना कि कमर की चोट के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में उतरने का फैसला सही नहीं था.

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नीरज चोपड़ा लंबे समय बाद वापसी करने वाले हैं. (Photo-PTI)

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  • नीरज चोपड़ा ने बीते साल टोक्यो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 84.03 मीटर का थ्रो करते हुए 8वां स्थान प्राप्त किया और बाद में इस प्रदर्शन को अपनी चोट के कारण सही निर्णय न मानने को स्वीकार किया।
  • नीरज चोपड़ा को टोक्यो वर्ल्ड चैम्पियनशिप से पहले कमर की चोट लगी थी, जिसके कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और उन्होंने फिजियो और टीम के साथ मिलकर पुनर्वास पर काम किया।
  • नीरज चोपड़ा ने इस साल जनवरी में अपने कोच जेलेज्नी से अलग होकर जयवीर को नए कोच के रूप में शामिल किया है और जून से इस सीजन की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं।

 नीरज चोपड़ा भारत के सबसे कामयाब एथलीट्स में शामिल हैं. टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने अपना वर्चस्व कायम किया. हर इवेंट में वह टॉप थ्री में रहते थे. कभी पोडियम से बाहर नहीं गए. लेकिन, बीते साल कुछ अलग हुआ. एथलेटिक्स वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह 8वें स्थान पर रहे. इस चैपियनशिप के बाद फैंस का दिल टूट गया था. नीरज ने एक साल बाद जाकर इस चैंपियनशिप पर बात की.  

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नीरज को फैसला पड़ा भारी

बीते साल सितंबर में नीरज चोपड़ा ने टोक्यो वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 84.03 मीटर का थ्रो किया. इस थ्रो के साथ वह 8वें स्थान पर रहे. नीरज चोपड़ा ने माना कि कमर की चोट के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में उतरने का उनका फैसला सही नहीं था.

दोहा डायमंड लीग से पहले उन्होंने कहा कि टोक्यो वर्ल्ड चैंपिययनशिप से पहले उन्हें चोट लगी थी. उन्होंने काफी मेहनत की थी. उन्हें नहीं लगता कि यह सही फैसला था, क्योंकि उन्हें पता था कि कुछ दिक्कत है. लेकिन, वह 2025 की आखिरी प्रतियोगिती थी तो उन्होंने खेलने का फैसला किया.

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दोहा में फिर रंग में दिखेंगे नीरज

इसी चोट के कारण वह आगे काफी समय तक परेशान रहे. उनकी कमर के निचले हिस्से में चोट लग गई थी. उन्हें इससे उबरने में समय लगा. इसी वजह से वो इस सीजन की शुरुआत अब जून में करेंगे. पहले नीरज के टखने में, फिर कंधे में दिक्कत होने लगी. उन्होंने अपनी टीम और फिजियो के साथ मिलकर हर चोट पर काम किया. वह अब फिट महसूस कर रहे हैं.

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दोहा नीरज के लिए बेहद खास मैदान है. बीते साल उन्होंने इसी मैदान पर पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार किया था. लेकिन, नीरज उस थ्रो को भी टेक्निकल तौर पर अपना बेस्ट थ्रो नहीं मानते. 

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नीरज को लगता है कि वह जैवलिन दो-तीन मीटर और दूर फेंक सकते थे. वर्ल्ड चैंपियनशिप या ओलंपिक में क्वालीफिकेशन दौर के थ्रो अच्छे रहते हैं, लेकिन फाइनल में ज्यादा आक्रामक होने के चक्कर में वह तकनीक भूल जाते हैं. बीते साल दोहा में जेलेज्नी नीरज के कोच थे. लेकिन अब दोनों अलग हो चुके हैं. इस साल जनवरी में जेलेज्नी से अलग हुए चोपड़ा ने कहा कि वह अब अपने हिसाब से खेलना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अपने पुराने कोच जयवीर को टीम में शामिल किया है. 

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