The Lallantop

मद्रास का मशहूर क्रिकेटर जो इंडिया के खिलाफ़ खेला

आज नासिर हुसैन का जन्मदिन है.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop

सितंबर 1999.विज्डन ने वर्ल्ड चैम्पियनशिप रिलीज़ की. इंग्लैंड नौंवे नम्बर पर थी. कुल नौ टीमों में नौंवे नम्बर पर. इंग्लैंड यानी क्रिकेट का जनक. कप्तान था नासिर हुसैन. हालांकि इसका ठीकरा नासिर के सर पर नहीं फोड़ा जा सकता था. उसने जुलाई 1999 में ही एलेक स्टीवर्ट से कप्तानी ली थी. 3 महीने के अन्दर ही उसकी टीम की खामियां सभी के सामने थीं. जिस वक़्त नासिर हुसैन को कप्तान बनाया गया था, इंग्लैंड अपनी सबसे खराब टीम को लेकर चल रहा था. यहां से नासिर ने अपनी कप्तानी में इंग्लैंड को 4 टेस्ट सीरीज़ लगातार जितवाईं और जिस दिन आईसीसी ने टेस्ट रैंकिंग पहली बार इंट्रोड्यूस की तो इंग्लैंड तीसरे नम्बर पर मौजूद था.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

नासिर हुसैन. इंग्लैंड के सफ़लतम कप्तानों में से एक. एनर्जी का भण्डार. इसे मैं बचपन में इसके होंठों पर लगी सफ़ेद क्रीम से पहचानता था. बाद में मालूम चला कि होंठों को प्रोटेक्ट करने के लिए इस क्रीम का इस्तेमाल किया जाता है. कहा जाता था कि ये टेस्ट मैच में एक ओवर में चार-चार बार फ़ील्डिंग प्लेसमेंट बदलता था. फ़ील्ड में ये बेहद बेचैन रहता था. और इसी बेचैनी में उन्होंने अपने जीवन की शायद सबसे बड़ी गलती की. ऐशेज़, पहला टेस्ट, 2002.

nasser

Advertisement

नासिर हुसैन ने टॉस जीता और पहले बॉलिंग करने का फ़ैसला लिया. टॉस के वक़्त उन्होंने कहा, "हम सही अड्डे पर गेंद फेंकने की कोशिश करेंगे और कोशिश करेंगे कि सभी कैच लें." दिन ख़त्म होने पर आध दर्जन छूटे कैच, फ़ील्डिंग मिस्टेक्स और ऑस्ट्रेलिया के 2 विकेट पर 364 रन. इंग्लैंड वो मैच 384 रन से हारा. इंग्लैंड सीरीज़ 4-1 से हारा.

28 मार्च 1968. मद्रास में रज़ा जावेद हुसैन और पेट्रीशिया प्राइस के घर में नासिर हुसैन पैदा हुआ. क्रिकेट के आस पास बचपन बीटा. चेपक मैदान में अपने बड़े भाई मेहरियार और अब्बास की मारी गेंदों के पीछे भागते क्रिकेट से दोस्ती हुई. घरवालों ने मद्रास की आराम भरी ज़िन्दगी छोड़ बच्चों की इंग्लिश सिस्टम के हिसाब से पढ़ाई के लिए इंग्लैंड का टिकट लिया और चल पड़े. और सालों बाद नासिर हुसैन 2003 के विज्डन क्रिकेटर ऑफ़ द इयर बन चुके थे और ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर से नवाज़े जा चुके थे. 

अपनी कप्तानी से इंग्लैंड को भयानक ऊंचाई तक ले जाने के बाद 2003 वर्ल्ड कप में जल्दी निकलने के बाद वन-डे से कैप्टेन्सी से रिटायर हो गए. और इसी साल टेस्ट की कप्तानी भी छोड़ दी. इंग्लैंड के लिए खेलते रहे. बांग्लादेश, श्री लंका और वेस्ट इंडीज़ के टूर पर गए. 36 सालों में पहली बार इंग्लैंड वेस्ट इंडीज़ में टेस्ट सीरीज़ जीत रहा था. इसमें नासिर के बल्ले का बड़ा रोल था.

Advertisement

मई 2004. लॉर्ड्स का मैदान और सामने न्यूज़ीलैंड. नासिर हुसैन को खेलते देख इंग्लैंड का एक बहुत बड़ा तबका ऊब चुका था. लेकिन नासिर के बल्ले से एक आख़िरी चोट की जानी बाकी थी. नासिर के लिए इससे अच्छा मौका और इससे अच्छी जगह कुछ और नहीं हो सकती थी. पहली इनिंग्स में 34 और दूसरी इनिंग्स में नॉट आउट 103. 295 मिनट का क्लास और 15 चौके. तीन दिन बाद अखबार में खबर पढ़ी कि होंठों को सफ़ेद क्रीम के कवच से ढकने वाला प्लेयर अब क्रिकेट के मैदान में इंग्लैंड की जर्सी में दोबारा नहीं दिखेगा. उस दिन इंग्लैंड का एक बड़ा नाम विदा ले रहा था. 
 

यहां से नासिर की दूसरी इनिंग्स शुरू हुई. कमेंट्री बॉक्स में. इस जगह पर भी वही आग,  वही जोश. वही एनर्जी. नासिर कायदे से एनालिसिस कर रहे थे. ठीक वैसे जैसे इमेजिनरी पोज़ीशन के साथ वो अपनी कप्तानी के दौरान फ़ील्डिंग सेट करते थे. रवि शास्त्री के साथ उनकी कमेंट्री बॉक्स में हुई मुठभेड़ सभी के दिमाग में है. हुसैन ने कुछ इंडियन प्लेयर्स को जो फील्डिंग में स्लो थे, डंकी (गधा) कहा था. हालांकि ये सांकेतिक था लेकिन रवि शास्त्री इसपे चढ़ बैठे. मुद्दा बना दिया. कंट्रोवर्सी हुई. नासिर पीछे नहीं हटे. अपनी बात पूरी दृढ़ता के साथ रखी. शास्त्री भी कम नहीं थे. वो तो अच्छा हुआ कि टीम के साथ शास्त्री को भी वापसी का टिकट मिल गया वरना क्या होता इसके बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता.

https://www.youtube.com/watch?v=WDlFyVZwwpY

नासिर हुसैन को इंग्लैंड क्रिकेट से जुड़ा एक भी शख्स भूल नहीं सकता. उनकी कप्तानी, बैटिंग और सामने वाले खेमे पर शुरुआत से ही चढ़ बैठने की फ़ितरत उन्हें एक केस स्टडी बनाती है.  साथ में ख़ासा नॉस्टेल्जिया. वही होठों पर सफ़ेद क्रीम वाला प्लेयर.


लल्लनटॉप वीडियो भी देखें-

Advertisement