दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट और दिग्गज खिलाड़ी पीआर श्रीजेश को लगता है कि उनके कोचिंग करियर का अंत हो गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि हॉकी फेडरेशन को लगता है कि केवल विदेशी कोच ही भारतीय हॉकी को आगे ले जा सकते हैं. श्रीजेश अपने साथ हुए व्यवहार से बहुत दुखी और नाराज हैं.
श्रीजेश का बड़ा आरोप! विदेशी कोच लाने के लिए हॉकी इंडिया ने हटा दिया
पेरिस ओलंपिक के बाद श्रीजेश ने संन्यास ले लिया था. उनके संन्यास के कार्यक्रम के दौरान ही हॉकी इंडिया ने उन्हें जूनियर टीम संभालने का ऑफर दिया था. श्रीजेश हमेशा से कोच बनना चाहते थे और फौरन इसके लिए तैयार हो गए थे.


श्रीजेश ने एक्स पर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं. उन्होंने दावा किया उन्हें कोचिंग पद से हटाने की वजह उनका प्रदर्शन नहीं है. श्रीजेश ने लिखा,
ऐसा लगता है कि डेढ़ साल के बाद मेरे कोचिंग करियर का अंत आ गया है. मेरे कोच रहते हुए टीम ने पांच टूर्नामेंट खेले और पांचों बार पोडियम पर रहे. इसमें जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप का ब्रॉन्ज मेडल शामिल था. मैंने सुना था कि कोचेज को खराब प्रदर्शन के कारण बाहर किया जाता था. लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोच को इसलिए हटाया जा रहा है ताकि कोई विदेशी कोच आ सके.
श्रीजेश ने बताया कि पुरुष टीम के हेड कोच क्रेग फुल्टन जूनियर टीम के लिए भी विदेशी कोच चाहते हैं. श्रीजेश ने बताया,
भारत में विदेशी कोचेज को अहमियतहॉकी इंडिया के अध्यक्ष (दिलीप टिर्की) ने कहा कि सीनियर टीम के हेड कोच जूनियर टीम के लिए भी उनकी ही तरह विदेशी कोच चाहते हैं. उन्हें लगता है कि इससे जूनियर लेवल के जरिए सीनियर लेवल पर हॉकी को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस तरह विदेशी कोच को अब भी तरजीह मिलना जारी है.
इस समय सीनियर महिला और पुरुष टीम और जूनियर महिला टीम के कोच विदेशी हैं. श्रीजेश पूरे सेटअप में इकलौते भारतीय कोच थे. अब उन्हें भी हटाया जा रहा है. श्रीजेश ने विदेशी कोच को अहमियत दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने लिखा,
क्या भारतीय कोच भारतीय हॉकी को आगे नहीं बढ़ा सकते? 07-03-2026 को, खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ एक बैठक के दौरान, मुझसे कहा गया, "श्रीजेश, 2036 की तैयारियों के बीच, हमें आप जैसे कोचों की ज़रूरत है जो आगे बढ़कर हमारे देश का नेतृत्व करें'. लेकिन, हॉकी इंडिया अपनी चारों टीमों में भारतीय कोचों के बजाय विदेशी कोचों पर ही अपना भरोसा बनाए हुए है.
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पीआर श्रीजेश ने ओलंपिक में हॉकी पदक के लिए 41 साल के लंबे इंतजार को खत्म करने के लिए अहम रोल निभाया था. टोक्यो 2020 में उनकी शानदार गोलकीपिंग के कारण भारत कांस्य पदक जीतने में सफल रहा. उन्होंने पेरिस 2024 में भी टीम के पोडियम पर जगह बनाने में अपने शानदार खेल से अहम भूमिका निभाई. पेरिस ओलंपिक के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया था. उनके संन्यास के कार्यक्रम के दौरान ही हॉकी इंडिया ने उन्हें जूनियर टीम संभालने का ऑफर दिया था. श्रीजेश हमेशा से कोच बनना चाहते थे और फौरन इसके लिए तैयार हो गए थे.
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