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कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में अब हिजाब बैन नहीं, 2022 का आदेश वापस

कर्नाटक सरकार ने साल 2022 में स्कूलों और कॉलेजों में लगाए गए हिजाब बैन को खत्म कर दिया है. नया नियम इसी एकेडमिक सेशन (2026-27) से लागू हो जाएगा. सरकार ने साफ किया कि छात्र अपनी पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए अपनी पढ़ाई कर सकेंगे.

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कर्नाटक सरकार ने हिजाब बैन के फैसले को पलट दिया है. (फाइल फोटो, PTI)

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  • कर्नाटक सरकार ने 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को धार्मिक प्रतीक जैसे हिजाब, पगड़ी, जनीवारा पहनने की अनुमति देने वाला नया ड्रेस कोड लागू किया है।
  • यह बदलाव 2022 में उडुपी कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने पर रोक और उसके बाद हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद के कारण हुआ है।
  • नए नियम से छात्र अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कपड़े पहन सकेंगे, और यह निर्णय मौलिक अधिकारों की सुरक्षा तथा विवाद की समाप्ति के लिए लिया गया है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में लागू ड्रेस कोड पॉलिसी में बदलाव किया है. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने साल 2022 में लगाए गए हिजाब बैन वाले आदेश को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है. नए आदेश के मुताबिक, क्लास 1 से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट अपने यूनिफॉर्म के साथ धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीक पहन सकते हैं.

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हिजाब और स्कार्फ : मुस्लिम छात्राएं अब क्लास में हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनकर आ सकती हैं.

पगड़ी : सिख समुदाय के छात्रों के लिए पगड़ी पहनने की छूट अब भी रहेगी.

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धार्मिक धागा (जनीवारा/कलावा) रूद्राक्ष : हिंदू छात्रों के लिए जनीवारा (यज्ञोपवीत), कलावा और रूद्राक्ष पहनकर क्लास में आने पर अब कोई रोक नहीं होगी.

कब से लागू होगा ये नियम?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नया नियम इसी एकेडमिक सेशन (2026-27) से लागू हो जाएगा. सरकार ने साफ किया कि छात्र अपनी पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए अपनी पढ़ाई कर सकेंगे. सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि किसी भी छात्र को ऐसे पारंपरिक या धार्मिक प्रतीकों को पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. उसी तरह किसी को भी इन्हें पहनने से जबरदस्ती रोका नहीं जाएगा.

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क्या था हिजाब विवाद?

हिजाब विवाद की शुरुआत साल 2022 में उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी. यहां कुछ मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास में आने से रोका गया था. तब की बीजेपी सरकार ने 5 फरवरी 2022 को एक आदेश जारी किया था. इसमें कहा गया कि स्कूलों में केवल तय यूनिफॉर्म ही पहनी जाएगी, हिजाब पहनने की इजाजत नहीं मिलेगी.

मार्च 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस बैन को बरकरार रखा था. कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम का 'अनिवार्य हिस्सा' नहीं है. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. यहां दो जजों की बेंच ने अलग-अलग राय (Split Verdict) दी. जिसके चलते यह मामला बड़ी बेंच के पास पेंडिग हो गया.

कर्नाटक सरकार का क्या कहना है?

मौजूदा कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह फैसला छात्रों की गरिमा और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए लिया गया है. हाल में हुए कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे CET) के दौरान छात्रों के जनीवारा (पवित्र धागा) कटवाने और हिजाब हटवाने की घटनाओं की काफी निंदा हुई थी.

वीडियो: हिजाब वाली महिला से किसने ID मांग ली?

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