एमएस धोनी. एक समय था जब टेस्ट की गदा, क्रिकेट वर्ल्ड कप और चैम्पियंस ट्रॉफी इसी कप्तान के सर का ताज थीं. मगर एक समय ये भी था जब इसने लम्बे बाल रखे हुए थे और इस कोई भी नहीं जानता था. मैंने एक बार राष्ट्रीय सहारा अखबार में इस खिलाड़ी का इंटरव्यू पढ़ा था. तब ये इंडियन टीम में आया भी नहीं था. उसमें ये चश्मा पहने हुआ था और लम्बे बाल टोपी से बाहर झांक ही रहे थे. इंटरव्यू में लिखा था, "मेरी दावेदारी कोई छोटी दावेदारी नहीं है." और ये सही भी था. एकदम सही. 10 साल के अन्दर दुनिया को कप्तानी के कड़े से कड़े पाठ सिखा रहा था. धोनी ने क्रिकइन्फो से बात करते हुए एक बड़ा मज़ेदार किस्सा बताया. इंडिया और वेस्ट इंडीज़ की सीरीज़ चल रही थी. टेस्ट सीरीज़. वेस्ट इंडीज़ की ज़मीन पर. धोनी और कैफ़ बैटिंग कर रहे थे. इंडियन टीम की कप्तानी राहुल द्रविड़ के पास थी. साल 2006. इंडिया ऐंटीगुआ में दूसरी इनिंग्स खेल रही थी. धोनी 69 रन पर खेल रहे थे. डेव मोहम्मद को धोनी ने मिडविकेट पर हवा में मारा. मोहम्मद ने बाउंड्री पर बढ़िया कैच लिया लेकिन उनका पैर बाउंड्री से छू गया. अम्पायर असद राउफ ने थर्ड अम्पायर से गुफ्तगू की और मालूम चला कि छक्का लग चुका है. यहां वेस्ट इंडीज़ के कैप्टन ब्रायन लारा चढ़ बैठे. वो कहने लगे कि जब हमारा प्लेयर कह रहा है कि कैच ले लिया गया है तो कैच ले लिया गया है. धोनी को चले जाना चाहिए.

अम्पायर आकर बीच बचाव करने लगे लेकिन लारा धोनी को सुनाए ही जा रहे थे. धोनी उस वक़्त क्रिकेट की दुनिया में नवजात थे. लारा बड़ी चीज़ थे. धोनी जिस तरह से एकटक उन्हें देखते जा रहे थे और लारा उन्हें सुनाये जा रहे थे, ये बताता है कि वक़्त कितना बलवान होता है. ये वही आदमी था जो आगे चलकर कह कर छक्के मारने वाला बनने वाला था. ये वही आदमी था जो वानखेड़े स्टेडियम में एक छक्का मारकर अमर हो जाने वाला था. उस दिन उसे लारा की खरी खोटी सुननी पड़ रही थी. एमएस धोनी तुरंत ही वापस जाने लगे. पवेलियन की ओर. उनमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो और बैटिंग कर सकते. यहां राहुल द्रविड़ ने अपनी कप्तानी दिखाई. उन्होंने तुरंत ही इनिंग्स डिक्लेयर कर दी. एमएस धोनी नॉट आउट ही रहे. https://www.youtube.com/watch?v=vekBJRCuwt4&feature=youtu.be
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