भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अश्विन ने जो किया, वह खेल भावना के खिलाफ है. अश्विन ने ऐसा किया क्या? दरअसल आईपीएल के एक मैच में अश्विन ने बटलर को नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर रन आउट कर दिया. अश्विन ने जिस तरह से बटलर को रन आउट किया, उसे ‘मांकड़ आउट’ कहते हैं.
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इसके बाद से तमाम लोग अश्विन की आलोचना कर रहे हैं, तमाम लोग अश्विन को सही बता रहे हैं. इस मामले में बीसीसीआई के अधिकारियों की ओर से भी बयान आया है. उनका कहना है कि कैप्टन को डिकोरम मेंटेन करना चाहिए. बीसीसीआई के अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में मैच अधिकारियों ने भी अपनी भूमिका सही से नहीं निभाई. बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने IANS से कहा-
'किसी बैट्समैन को आउट करने के लिए क्रिकेटिंग स्किल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इससे मैच देखने वालों में सही संदेश जाएगा. मैच के अधिकारी भी इस मसले को ठीक तरह से हैंडल नहीं कर पाए. अश्विन को भी लॉ और गेम स्पिरिट दोनों का ध्यान रखना चाहिए था. एक खिलाड़ी को उसकी क्रिकेटिंग स्किल के लिए याद किया जाना चाहिए, न कि संदेहपूर्ण व्यवहार के लिए. अगर बैट्समैन किसी तरह का एडवांटेज ले रहा है तो इससे एक जेंटलमैन की तरह निपटा जाना चाहिए. प्रतियोगिता होनी चाहिए लेकिन डिकोरम को भी मेंटेन किया जाना चाहिए.'
एक और अधिकारी ने कहा
'इस तरह की घटना से खिलाड़ी की पॉपुलैरिटी प्रभावित होती है और उसकी आलोचना शुरू हो जाती है. बैट्समैन को आउट करने का यह तरीका बैक-स्टैबिंग (पीठ में छुरा घोंपने) के समान है. इसलिए इसकी हमेशा आलोचना होती है. इससे आपको रिजल्ट तो मिलता है, लेकिन आप निश्चित रूप से इस तरह से कोई बड़ा गेम नहीं जीत पाएंगे. मैदान में जो कुछ हुआ, उसे बटलर को वहीं छोड़ देना चाहिए था और अश्विन से हाथ मिलाना चाहिए था, लेकिन बटलर ने ऐसा नहीं किया. ये दोनों चीजें गलत हैं, इससे खेल भावना प्रभावित होती है.'
हालांकि ये बयान BCCI का आधिकारिक बयान नहीं माना जाना चाहिए. क्योंकि उसने अभी न तो आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी किया है, न ही समाचार एजेंसी IANS ने इन अधिकारियों के नाम दिए हैं. इस मामले में अश्विन का कहना है कि उनकी तरफ से यह स्वाभाविक था. इसको लेकर किसी तरह का कोई प्लान नहीं बनाया गया था. ऐसा खेल के नियमों में है. उन्हें नहीं मालूम कि इसमें खेल भावना की बात कहां से आ गई. अगर यह खेल के नियमों में है, तो है. शायद जब नियम बदले, तब जाकर यह ठीक हो.' कप्तान रहाणे का कहना है, वह उम्मीद कर रहे थे कि मैच रेफरी इस बात पर ध्यान देंगे कि मैदान पर क्या हुआ था लेकिन ऐसा नहीं हुआ.