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ओलंपिक होस्ट करने का है सपना, देश में एथलीट तीन महीने से ज्यादा नहीं कर पा रहे प्रैक्टिस!

दिल्ली में नवंबर से फरवरी तक के समय में खिलाड़ी स्मॉग से परेशान रहते हैं. साल 2024 में गर्मियों के समय ज्यादातर समय तापमान 40 से ऊपर रहा. ऐसे में खिलाड़ियों के लिए वह समय भी ट्रेनिंग के लिहाज से आसान नहीं होता है.

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पैरा एथलीट सिमरन शर्मा जेएलएन स्टेडियम में ट्रेनिंग करते हुए. (Photo-PTI)

इंडियन ओपन 2026 में भारत की काफी फजीहत हुई. खासतौर पर दिल्ली में इस टूर्नामोंट को कराने को लेकर. विदेशी खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी में दिल्ली की टॉक्सिक हवा को लेकर शिकायत दी. यह टूर्नामेंट अब खत्म हो चुका है, लेकिन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया. सवाल यह कि भारत मेजबानी के लिए कितना तैयार है? भारत में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कितने सहज हैं? सबसे अहम सवाल यह कि भारत में उसके खुद के खिलाड़ी कितने सहज हैं? क्या भारतीय खिलाड़ी भारत में ट्रेनिंग कर सकते हैं? अगर यह सवाल आप टॉप एथलीट्स और कोचेज से पूछेंगे तो जवाब होगा ‘न’. और अगर यह सवाल आप जूनियर खिलाड़ियों से पूछेंगे तो उनका जवाब होगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है.

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टॉप ट्रेनिंंग सेंटर में परेशान हैं खिलाड़ी

भारत के जो एलीट इंस्टियूट उत्तर भारत में दिल्ली के आस-पास ही हैं. इसमें सोनीपत, रोहतक, चंडीगढ़, लखनऊ और नई दिल्ली के सेंटर्स शामिल हैं. बीते दो ओलंपिक में 13 में से नौ मेडलिस्ट्स ने इन्हीं सेंटर्स में ट्रेनिंग की है. हालांकि, इन जगहों पर पूरा साल आउटडोर ट्रेनिंग करना लगभग मुश्किल है. अनुभवी कोचेज का कहना है कि इन जगहों पर साल में केवल दो या तीन ही महीने ट्रेनिंग की जा सकती है, वह भी एक साथ नहीं.

दिल्ली में नवंबर से फरवरी तक के समय में खिलाड़ी स्मॉग से परेशान रहते हैं. साल 2024 में गर्मियों के समय ज्यादातर समय तापमान 40 से ऊपर रहा. ऐसे में खिलाड़ियों के लिए वह समय भी ट्रेनिंग के लिहाज से आसान नहीं होता है.  

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कोचेज ने बताया ट्रेनिंग करना है कितना मुश्किल

भारत की पूर्व कप्तान और हॉकी कोच प्रीतम सिवाच ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

अब केवल दो-तीन महीने ही ऐसे होते हैं, जब खिलाड़ी बिना मौसम की चिंता किए ट्रेनिंग कर सकते हैं. वह भी लगातार नहीं होता… एक महीने में 15-20 दिन, फिर कुछ समय बाद 15-20 दिन और फिर कभी और. जब हम अपने सिर के ऊपर काले बादल देखते हैं, तो हम खुश होते हैं क्योंकि हमारे लिए इसका मतलब बारिश और ताजी हवा होती है.

स्मॉग के समय ट्रेनिंग कराके खुद सिवाच काफी परेशानियां महसूस करती हैं. उन्होंने कहा,

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जब मैं मैदान पर जाती हूं, तो मेरी आंखों और गले में इतनी तेज़ जलन होती है कि मुझे जल्दी से खेल खत्म करके वापस अंदर जाने का मन करता है. अगर मुझे यह तकलीफ हो रही है, तो सोचिए लगातार दौड़ने वाले खिलाड़ियों को क्या तकलीफ होती होगी? ऐसे हालात में कोच अच्छे खिलाड़ियों को कैसे तैयार कर सकते हैं?

भारतीय पैरा एथलीट सिमरन शर्मा के पति और कोच गजेंद्र सिंह का कहना है कि दिल्ली में ट्रेनिंग शेड्यूल एक्यूआई लेवल के अनुसार तय होता है. उन्होंने कहा,

जब हम ट्रेनिंग में बार-बार स्प्रिंट करते हैं, तो सिमरन को उल्टी हो जाती है और उसकी खांसी लंबे समय तक बनी रहती है. हमारा ट्रेनिंग कार्यक्रम AQI के स्तर पर आधारित है.

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नीरज चोपड़ा बता चुके हैं उपाय

नीरज इस समय विदेश में ट्रेनिंग कर रहे हैं. वहीं, हाई जंप नेशनल रिकॉर्ड होल्डर तेजस्विन शंकर भी स्मॉग का मौसम शुरू होते ही पहले साउथ अफ्रीका और फिर अमेरिका में ट्रेनिंग करने चले गए. भारत के डबल ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने खिलाड़ियों को ट्रेनिंग में आ रही परेशानी का हल बताया था. वह 2021 से लगातार यह अपील करते आ रहे हैं कि खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए यह जरूरी है कि देश में इंडोर ट्रैक हों. इससे उन्हें किसी भी मौसम में ट्रेनिंग करने में सहूलियत होगी. वहीं, पुलैला गोपीचंद ने भी हाल ही में एनआईएस पटियाला को लेकर  “restructuring and revitalising रिपोर्ट में भी यही डिमांड की है कि सेंटर में एक मल्टीस्पोर्ट इंडोर कॉम्पलेक्स हो. इसमें ऐसे ट्रेनिंग हॉल होंं, जिसमें मौसम कंट्रोल किया जा सके. 

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