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बेटी का एक हाथ नहीं था, मां-बाप ने दूसरे हाथ में इतनी ताकत दी गोल्ड मेडल की हैट्रिक लगा दी

पैदाइश से ही रिया सोलंकी के एक हाथ का निचला हिस्सा नहीं था. उन्होंने उसके बिना ही जीना सीखा. पिता का सपना था कि बेटी खेल की दुनिया में कुछ करे. गरीबी चुनौती बनकर खड़ी थी. फिर भी उन्होंने अपनी बेटी की जिंदगी को मकसद देने का फैसला किया.

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रिया सोलंकी 2018 से एथलेटिक्स ट्रेनिंग शुरू की. (Photo- Riya Solanki Instagram)

भुवनेश्वर में जारी पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रिया सोलंकी ने गोल्ड मेडल की हैट्रिक लगाई. लगातार तीसरे पैरा नेशनल गेम्स में रिया ने शॉटपुट की एफ-46 कैटेगरी का गोल्ड मेडल जीता. इस जीत में जितना रिया की मेहनत, लगन और इच्छा शक्ति का योगदान है, उतना ही योगदान उनके परिवार का है.

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बचपन से ही नहीं था रिया का हाथ

पैदाइश से ही रिया सोलंकी के एक हाथ का निचला हिस्सा नहीं था. उन्होंने उसके बिना ही जीना सीखा. पिता का सपना था कि बेटी खेल की दुनिया में कुछ करे. गरीबी चुनौती बनकर खड़ी थी. फिर भी उन्होंने अपनी बेटी की जिंदगी को मकसद देने का फैसला किया.

पिता अंशुमन, रिया को लेकर कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच गौरव त्यागी से मिले. नवंबर 2018 में रिया ने 100 और 200 मीटर दौड़ में ट्रेनिंग शुरू की. वह खेल में अच्छा कर रही थीं. कोविड के बाद उन्होंने शॉटपुट शुरू किया.  यह फैसला उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. तब से लेकर अब तक रिया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने साल 2024, 2025 और अब 2026 में लगातार तीसरी बार नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी बादशाहत कायम की है. लेकिन जैसे-जैसे उनका खेल का स्तर बढ़ा, परिवार के सामने काफी परेशानियां आने लगीं. रिया को एक अच्छी डाइट देनी थी जिसके लिए काफी पैसा लगता था. ऐसे में माता-पिता ने अपने खाने में कटौती करने का फैसला किया. 

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रिया की मां साक्षी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया,

हमने अपने खाने में कटौती की ताकि रिया को प्रोटीन भरा खाना मिल सके. रिया को यह देखकर बुरा लगता था. वह मेहनत करती रही और अपने गोल पर ही ध्यान दिया . आज हमारे सारे त्याग का फल हमें मिल गया.

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माता-पिता ने उठाई कई परेशानियां

अखबार से बातचीत में साक्षी ने बताया कि शुरुआत में वह अपनी दोनो बेटियों को घर में बंद करके काम करने जाते थे. रिया के पिता अंशुमन ने बहुत कोशिश की लेकिन कमाई का कोई पक्का जुगाड़ नहीं था. 

बाद में साक्षी को किसी दूसरे घर में काम मिल गया. इससे परिवार की मुश्किल थोड़ी कम हो गई. लेकिन किसी एक का घर पर रुकना जरूरी थी. साक्षी ज्यादा पैसा कमाती थीं, इसलिए अंशुमन घर पर बच्चों का ध्यान रखने लगे. यह बात गांव वालों को पसंद नहीं आई. अंशुमन ने बताया,

मैं घर में रहता था और साक्षी काम करने जाती थी. इस कारण मुझे बहुत ताने मारे गए. आज मेरी बेटी ने सभी को गलत साबित कर दिया. वह भविष्य में कुछ अच्छा करेगी.

रिया ने बताया कि उसका उद्देश्य पैरा एशियन गेम्स और पैरा ओलंपिक गेम्स में गोल्ड लाकर देश का नाम रोशन करना है. उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता के त्याग और कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम को दिया.  रिया की छोटी बहन दिया सोलंकी भी एक खिलाड़ी हैं और हैमर थ्रो में राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं. 

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