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इंडिया के खिलाफ़ ड्रीम डेब्यू, टीम के लिए नहीं ले गया पानी... कहानी क्रिकेट के बैड बॉय की!

फ्रैंकलिन रोज़, जिन पर लगा होटल बिल ना भरने का आरोप.

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फ्रैंकलिन रोज़ (फोटो - Getty Images)

क्रिकेट. इस धरती का दूसरा सबसे प्रसिद्ध खेल. जी हां, आप भले ना पसंद करें, लेकिन फुटबॉल आज भी दुनिया में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला खेल है. हां तो क्रिकेट में मुख्यतः दो स्किल्स वाले लोग खेलते हैं. पहले होते हैं बल्लेबाज और दूसरे गेंदबाज. गेंदबाज जो मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- धीमे फेंकने वाले और तेज फेंकने वाले.

तेज फेंकने वाले इस खेल के सबसे जलवेदार लोगों में शामिल माने जाते हैं. क्योंकि उनसे दुनिया डरती है. मतलब ऐसा माना जाता है कि पेस बोलिंग से लोगों को हल्का ही सही, लेकिन डर लगता है. और क्रिकेट में जब भी डरावने बोलर्स की बात होती है तो वेस्ट इंडीज़ का ज़िक्र जरूर आता है. आना भी चाहिए, इस देश ने दशकों तक क्रिकेट को एक से एक खौफ़नाक बोलर दिए हैं.

खौफ़नाक बोले तो, सवा छह फुट से ज्यादा की हाइट और 150KMPH तक मजे-मजे में फेंकने वाले बोलर. लेकिन ऐसे हर बोलर का करियर सफल नहीं हुआ. कुछ को चोटों ने मारा, तो कई अपने एटिट्यूड से खत्म हुए. और आज सिली पॉइंट में ऐसे ही एक पेस बोलर की बात करेंगे. जिसने अपना करियर मैन ऑफ द मैच बन शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे उसे मैदान से बाहर की एक्टिविटीज में ज्यादा इंट्रेस्ट आने लगा. और इसी इंट्रेस्ट ने उसका करियर समय से पहले खत्म कर दिया.

# Franklyn Rose Debut

मार्च 1997. भारत की टीम वेस्ट इंडीज़ दौरे पर थी. 6 मार्च को सीरीज़ का पहला टेस्ट शुरू हुआ. विंडीज़ ने टॉस जीता. पहले बैटिंग करते हुए 427 रन बनाए. भारत बैटिंग करने उतरा. वीवीएस लक्ष्मण और नयन मोंगिया ने पचासे जड़े. लेकिन टीम 346 रन ही बना पाई. और उनके इस हाल का जिम्मेदार रहा इस मैच से डेब्यू करने वाला छह फुट पांच इंच लंबा बोलर. नाम फ्रैंकलिन रोज़.

फ्रैंकलिन ने इस पारी में विंडीज़ के लिए सबसे ज्यादा, 33 ओवर फेंके. और इन ओवर्स में उन्होंने 100 रन देकर छह विकेट निकाले. इन छह में से पांच नाम कुछ इस प्रकार लिखे जाते हैं- वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़, सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और मोहम्मद अज़हरुद्दीन. यानी फ्रैंक ने अपने पहले टेस्ट की पहली ही पारी में दुनिया के बेस्ट बैट्समेंस को आउट किया.

दूसरी पारी में उन्हें एक और विकेट मिला. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारत ने अपनी दूसरी पारी दो विकेट खोकर 99 रन पर खत्म की. फ्रैंक ने इस पारी में भी लक्ष्मण का शिकार किया. बाद में उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया. फ्रैंक जैसे डेब्यू को ही शायद ड्रीम डेब्यू कहते होंगे. लेकिन ड्रीम्स की एक खासियत होती है- ये कभी ना कभी खत्म होते हैं. फ्रैंक का ड्रीम भी खत्म हुआ.

अगले 18 टेस्ट मैचेज में उन्हें सिर्फ एक फाइव विकेट हॉल मिला. और इसके जिम्मेदार शायद फ्रैंक खुद थे. फुल लेंथ डिलिवर पर उन्हें कमाल की आउटस्विंग मिलती थी. लेकिन फ्रैंक को तो शॉर्टपिच गेंदें पसंद थी. वो गेंद को पिच के बीच पटककर ही खुश रहते थे. कुल 19 टेस्ट में 53 विकेट लेने वाले फ्रैंक बहुत विवादित भी रहे. साल 1998 के साउथ अफ्रीका दौरे के बाद विंडीज़ बोर्ड ने उन्हें बैन कर दिया.

# Franklyn Rose Controversy

क्यों किया? क्योंकि बोर्ड का कहना था कि फ्रैंक ने साउथ अफ्रीका टूर पर अपने होटल बिल्स का पेमेंट नहीं किया. क्या थी ये पूरी कथा? चलिए समझते हैं. मई 1999 में वेस्ट इंडीज़ बोर्ड की डिसिप्लनरी कमिटी ने कहा- जब तक फ्रैंक साउथ अफ्रीकी होटल के बिल्स का पेमेंट नहीं करेंगे, उनके सेलेक्शन पर विचार नहीं किया जाएगा.

इस मसले पर फ्रैंक का कहना था कि बोर्ड पहले ही उनकी टूर फीस से पांच परसेंट की कटौती कर चुका है. और उन्हें लगता है कि उसी पैसे से बिल्स भरे जाने चाहिए. फ्रैंक अब इस मामले में किसी और तरह की पेमेंट नहीं करना चाहते थे. इस मसले पर उन्होंने जून 1999 को द जमैका ग्लीनर को एक इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में फ्रैंक ने कहा,

'बोर्ड द्वारा मुझे बताया गया था कि मैं साउथ अफ्रीका में होटल बिल्स का भुगतान किए बिना चला आया था. जिसके चलते मुझ पर टूर फी के पांच परसेंट का जुर्माना लगा. इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि बोर्ड ने मेरे होटल बिल का भुगतान इसलिए नहीं किया, क्योंकि मैं अपने कमरे में लड़की लाया था. और इसी के चलते मेरे पैसे गुम हुए. मैं यह बकवास पहली बार सुन रहा हूं, इसमें कोई सच्चाई नहीं है.'

चोट के चलते फ्रैंक इस टूर के सिर्फ एक मैच में खेले थे. डरबन में हुए इस मैच में उन्होंने 87 रन देकर सात विकेट निकाले. यह उनका करियर बेस्ट था. फ्रैंक ने इसी इंटरव्यू में यह भी बताया कि उन्हें एंटीगा में डिसिप्लनरी कमिटी के सामने क्यों पेश होना पड़ा. फ्रैंक ने बताया,

'उन्होंने एंटीगा में मुझे तीन आरोपों के जवाब देने के लिए बुलाया. पहला आरोप था कि मैं टूर पर अनफिट हालात में गया. दूसरा था कि मैंने कोच की बात नहीं मानी और तीसरा, कि मैंने अपने होटल बिल का पेमेंट नहीं किया.'

बता दें कि इस टूर पर टीम के कोच मैल्कम मार्शल थे. और फ्रैंक पर कोच का अनादर करने का आरोप लगा था. इस बारे में फ्रैंक ने कहा,

'मैं कोच की बहुत इज्जत करता हूं. कोच ने मुझे मैदान में पानी देने के लिए कहा था. जबकि मेरे कंधे में चोट लगी थी. पूरी दुनिया को पता था कि मेरा कंधा चोटिल है. मुझे पता था कि मैं इस मैच में नहीं खेलूंगा. इसलिए मैं किसी तैयारी के साथ नहीं गया था. जब उन्होंने मुझसे पानी ले जाने को कहा, तो मैंने उन्हें बताया कि डॉक्टर ने मुझे कंधे को आराम देने को कहा है. इसके जवाब में उन्होंने कहा- अगर तुम पानी नहीं ले गए, तो देखना क्या होता है. यह मेरे लिए धमकी थी.'

फ्रैंक ने यह भी कहा कि उनके पैसे गुम हो गए थे, जिसके चलते वह होटल के बिल का पेमेंट नहीं कर पाए. और इस बारे में उन्होंने टीम मैनेजर को बताया था. इस विवाद के बाद फ्रैंक ने फिर वापसी की. उन्होंने न्यूज़ीलैंड, ज़िम्बाब्वे, पाकिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ़ टेस्ट मैच खेले. लेकिन अब फ्रैंक में वो बात नहीं रही. इस विवाद के बाद उनका बेस्ट 19 रन देकर चार विकेट रहा. फ्रैंक ने यह प्रदर्शन ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ पोर्ट ऑफ स्पेन में किया.

डेब्यू के वक्त फ्रैंक को कर्टनी वॉल्श और कर्टली एम्ब्रोस का उत्तराधिकारी माना गया था. लेकिन भाग्य देखिए, वॉल्श और एम्ब्रोस के आगे फर्स्ट चेंज बोलर के तौर पर डेब्यू करने वाले फ्रैंक का इंटरनेशनल करियर वॉल्श-एम्ब्रोस के खेलते वक्त ही खत्म हो गया. लेकिन यही तो ड्रीम है, जो कहां शुरू और कहां खत्म हो जाए, कोई नहीं जानता.

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