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कुल आठ मैच खेलने वाले को BCCI की विदाई, 61 टेस्ट खेलने वाले का नाम भी नहीं लिया!

मुरली विजय के साथ भेदभाव क्यों?

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मुरली विजय, जोगिंदर शर्मा. फोटो: File Photo

2008 में नागपुर में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक टेस्ट मैच खेला गया था. गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) पर एक मैच का बैन लगाया गया था. तब गंभीर और सहवाग भारत के लिए पारी की शुरुआत करते थे. गंभीर पर बैन लगा, तो उनके विकेल्प के तौर पर डॉमेस्टिक में बड़ी पारियां खेलने के लिए माहिर बल्लेबाज़ का डेब्यू करवाया गया. उस बल्लेबाज़ का नाम था मुरली विजय.

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उन्हीं मुरली विजय ने साल 2023 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है. ये ख़बर, तीन दिन पुरानी हो गई है लेकिन हम फिर से इसे इसलिए बता रहे हैं. क्योंकि लगता है BCCI को अब तक इसका इल्म नहीं हुआ है. अगर ख़बर लगती तो BCCI कुछ तो कहता. लेकिन मुरली विजय के लिए BCCI ने अपने ट्विटर से दो शब्द भी नहीं खर्चे. यानी उनके क्रिकेट से संन्यास लेने पर BCCI की तरफ से ना तो कोई पोस्ट आया और ना ही कोई स्टेटमेंट.

जबकि किसी भी भारतीय क्रिकेटर के बर्थडे, संन्यास पर BCCI अक्सर कमेंट करता है. इत्तफाक देखिए, एक भी टेस्ट नहीं खेलने वाले जोगिंदर शर्मा के संन्यास की ख़बर के दो घंटे के अंदर ही BCCI ने उन्हें ट्वीट करके उज्जवल भविष्य की कामना दे दी.

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# विजय ने भारत के लिए क्या किया?

विजय की बात करें तो उन्होंने टीम इंडिया के लिए कुल 61 टेस्ट, 17 वनडे और नौ T20I मुकाबले खेले हैं. जिनमें उनका प्रदर्शन ठीकठाक रहा है. 61 टेस्ट में विजय के नाम 38.28 की औसत से 3982 रन हैं. वहीं वनडे क्रिकेट में उन्होंने 339 और T20I में 169 रन बनाए हैं.

टेस्ट क्रिकेट में मुरली विजय लगातार 2008 से 2018 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे. अपने शुरुआती साल 2008 और 09 में उन्होंने एक-एक टेस्ट खेला. लेकिन 2010 से वो भारत के लगातार खेलते रहे. उन्होंने सबसे ज्यादा, 10 टेस्ट 2014 और 2016 में खेले. 2018 में भारत के लिए आखिरी बार खेलते हुए भी विजय ने कम से कम आठ टेस्ट खेले थे. मुरली विजय उन चुनिंदा बल्लेबाज़ों में रहे जिन्होंने घर से ज़्यादा टेस्ट विदेश में खेले. विजय ने घर में 30 और विदेशी मैदानों पर 31 टेस्ट खेले हैं.

मुरली विजय ने एमएस धोनी की कप्तानी में 29 और विराट कोहली की कप्तानी में 30 टेस्ट मुकाबले खेले. जबकि अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भी वो दो टेस्ट खेलकर गए.

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हालांकि ऐसा भी नहीं है कि मुरली सिर्फ टेस्ट स्पेशलिस्ट ही रहे. उन्होंने IPL में धोनी की टीम CSK के लिए कई साल तक ढेरों रन्स बनाए. 2012-13 ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज़ में उन्होंने लगातार रन्स बनाए. जिसके बाद उन्हें 2013 की ICC चैम्पियंस ट्रॉफी की टीम में शामिल किया गया. लेकिन वार्म अप मुकाबलों में कुछ खास नहीं कर सके. जिसके चलते प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह नहीं बन पाई. हालांकि वो फिर भी ICC ट्रॉफी जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं.

अब विजय के मुकाबले जोगिंदर शर्मा की बात करें, तो उन्होंने भारत के लिए सिर्फ चार वनडे और चार T20 खेले हैं. हमारा संदर्भ यहां किसी खिलाड़ी की किसी से तुलना करना नहीं है. लेकिन अगर एक ICC ट्रॉफी विनर के लिए BCCI दो घंटे के अंदर ही ट्वीट कर सकता है. तो दूसरे के लिए कम से कम दो शब्द तो कह ही सकता था.

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