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एक कविता रोज़: लाइन जन्मो मरो लाइनहिं, लाइन खाय नहावो

नोटबंदी पर मृत्युंजय के तीखे तंज.

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फोटो - thelallantop

मृत्युंजय युवा कवि-आलोचक-आचार्य और एक्टिविस्ट हैं. कविताएं गाते-गुनगुनाते और सुनाते रहते हैं. 'स्याह हाशिये' नाम से कविताओं की एक किताब आ चुकी है. छंदसिद्ध और राजनीतिक विवेक से संपन्न हैं. कविता में और कविता से बाहर हस्तक्षेप करते रहते हैं. आज एक कविता रोज़ में पढ़िए नोटबंदी पर मृत्युंजय के काव्यात्मक हस्तक्षेप को...  

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  किस किस से मूं लड़ाइये, भगती के काल में लाइन लगाये खीस काढ़े रहिये हाल में जो बोलोगे फरमाएंगे बकता है कैसा कुफ्र जाबा लगाए बैंक चलिये इंतकाल में भगतों की जिंदगी बहुत रंगीन है इस वक्त कुछ लाइनों में कट रही कुछ है बवाल में हम सुर्ख सब्ज़ हो के चले मैकदे की ओर मय तक नहीं मिली सखी आपातकाल में *** आकासे पाताले लाइन, जल थल अगनी लाइन नहीं लगोगे तो साहेब जी, ठोंकेंगे बड़ फाइन लाइन भगति, लाइनहिं सेवा, लाइन अर्चन-पूजा लाइन लगे पाप सब भागे, ऐसा पुण्य न दूजा लाइन जन्मो मरो लाइनहिं, लाइन खाय नहावो लाइन ब्रह्म आत्मा लाइन, लाइन बिरहा गावो देसभगति लाइन से पूरित, लाइनमय संसार लाइन लगि मिरतुंजे, नंगे हो गए बीच बजार *** मन में चोर आंखि में बार मुंह में भाषण हे सरकार कौने ठीहा गर्दन कटबा कइसन करबा अब ब्यौहार ज्ञानिन बध भये तोहरे राज खेतिहर मर गए बिना अनाज स्कूलन पे आगि बरसि गयि देस भगति के निक त्यौहार ई नगपुरिया माल सड़ा हौ पंडवा नीयर भगत अड़ा हौ नब्बे फीसद जनता छछनै बरम मुहूरते खड़ी कतार जा राजा तुहरो दिन आयी जनता तोंहके घंट देखाई मिरतुंजे जी बांचत हउवें ई है लिखा लिलार *** दो हजार का नोट गुलाबी मिरतुंजे ललचाये ज्यों बर्रों ने दौड़ाया हो भगे बैंक को आये सुना चिप्प होगी घुसखोरों को धर लावेगी यही करन्सी जड़ से भ्रष्टाचार मिटावेगी लाइन लगे कई दिन बीते खाये कितनी चोट ढाई सौ का घूस दिये तब पाये जुलमी नोट नोट देखि के लुल्ल हो गये कहीं मिला ना छुट्टा घर से भूँजी भांग नदारत छील रहे अब भुट्टा जुलमी नोट भंजेगा केहि बिधि सोच सोच घबराये साँप छछूंदर की गति ह्वै गयि रात को नीद न आये *** हमरी जेब कटी है डेटा कहता है सब अच्छा है साहेब की चिलमन से दीखे मुलुक चकाचक अच्छा है बित्त मंतरी अलबलाइटिस में खोया अलबत्ता है संसद भीतर दू हजार के नोट में मिलता भत्ता है तू मिरतुंजे लाइन लगि के देस दरोही हो गइला देस नवा हौ, केस नवा हौ, आवा धोईं हम मइला

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