फ़रीद खां मुंबई में रहते हैं. वैसे पटना से हैं. कविता-कथा के साथ-साथ फिल्म और पटकथा-लेखन से भी जुड़े हैं. इरोम शर्मिला पर उन्होंने एक कविता लिखी है जो यह कहते हुए शुरू होती है कि यह कविता इरोम पर नहीं है...
इरोम का आज जन्मदिन है, ऐसे में यह कविता इरोम पर न होकर भी इरोम के उस अनथक संघर्ष को समझने में मददगार है, जिसका सिला में भारतीय लोकतंत्र में महज 90 वोटों की शक्ल में मिला था.
आज एक कविता रोज़ में पढ़िए इस कविता को ही :
एक कविता रोज़: 'यह कविता इरोम पर नहीं है'
आज इरोम शर्मिला का जन्मदिन है. पढ़िए उन पर लिखी फ़रीद खां की एक कविता.
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फोटो - thelallantop
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