चांद नहाने उतरेगा
आस नयन में पलने दो गीत-गज़ल में ढलने दो रौशन होगा ख्वाब नगर दर पर दीपक जलने दो हिय का पीर पिघलने दो आखर अरथ निकलने दो चांद नहाने उतरेगा फिक्र नदी में ढलने दोपांच हाइकू -
1. याद दिलाएं सुख-दुःख के मोड़ बिछुड़े मीत 2. अरुझि गुड्डी छूटती न टूटती मांझे सी आस 3. बंधती गांठ आहत भाव इक छूटते हाथ 4. पुकारे गांव निज सखा स्वजन चल रे मन 5. काल पड़ा है परदेश नियति मत रोको रीदो दोहे-
1. श्रम में उलझे हाथ हैं, बेड़ी में हैं पांव सपना बनकर रह गया, वह सपनों सा गांव 2. होरी बैठा मेढ़ पर, कोसे अपने भाग पानी बस है आंख में, सूखे ताल तड़ागअगर आप भी कविता/कहानी लिखते हैं, और चाहते हैं हम उसे छापें, तो अपनी कविता/कहानी टाइप करिए, और फटाफट भेज दीजिए lallantopmail@gmail.com पर. हमें पसंद आई, तो छापेंगे. और हां, और कविताएं पढ़ने के लिए नीचे बने ‘एक कविता रोज़’ टैग पर क्लिक करिए.
























