The Lallantop

'बना दो मुझे अपनी हर कविता का पूर्णविराम'

एक कविता रोज: आज पढ़िए युवा कवि गरिमा मिश्रा को.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
गरिमा मिश्रा बेतिया, बिहार की रहने वाली हैं. कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद कंपनी सेक्रेटरीशिप की पढ़ाई की. पर मन साहित्य में रमा रहा. आजकल दिल्ली में कंपनी सेक्रेटरी हैं, और कविताएं लिखती हैं. आज पढ़िए गरिमा की 3 छोटी कविताएं. garima mishra
 

1.

सुनो कवि, मत करो प्रकट मुझे अपनी किसी कविता की चंद पंक्तियों में, समेट लो इतना कि मै हो जाऊँ एक पतली उर्ध्वाधर रेखा, फिर बना दो मुझे अपनी हर एक कविता का पूर्णविराम.

2.

मुझे अपनी तस्वीरों में रंग चाहिए और अपनी बालकनी में चाहिए एक काली सफ़ेद शाम मुझे घुमक्कड़ी के लिए रेगिस्तान, पहाड़ और जंगल चाहिए और चाहिए कि मैं हर बार लौटूं, मुझे लौटने के लिए एक अदद घर चाहिए.

3.

तुम्हारे घर के पीछे बहती क्षीण हो चली चंद्रावत नदी में रोज़ डालो एक अंजुल पानी कि उसका पानी बचा रहे, तुम मुझसे प्रेम करो कि दुनिया में प्रेम बचा रहे.
  अगर आप भी कविता/कहानी लिखते हैं, और चाहते हैं हम उसे छापें, तो अपनी कविता/कहानी टाइप करिए, और फटाफट भेज दीजिए lallantopmail@gmail.com पर. हमें पसंद आई, तो छापेंगे. और हां, और कविताएं पढ़ने के लिए नीचे बने ‘एक कविता रोज़’ टैग पर क्लिक करिए.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement