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कप्तान रोहित के ये ब्लंडर्स वर्ल्ड कप में भारी पड़ जाएंगे!

ऐसे क्यों करते हैं रोहित जी?

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रोहित की कप्तानी में टीम इंडिया वर्ल्ड कप जीत पाएगी? (पीटीआई फोटो)

रोहित शर्मा. टीम इंडिया के कप्तान. इनकी कप्तानी में हम T20 वर्ल्ड कप 2022 और एशिया कप में नाकाम हो चुके हैं. अब लोगों की उम्मीद इसी साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप पर टिकी है. लेकिन ये उम्मीद पूरी होगी? कहना मुश्किल है. टीम इंडिया अभी इस वर्ल्ड कप के लिए तैयार नहीं दिख रही है. इनकी आधी-अधूरी तैयारी की पोल एक कायदे की टीम आते ही खुल जानी है.

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और आज हम उन्हीं पॉइंट्स पर चर्चा करेंगे, जहां टीम इंडिया को सुधार करना ही होगा. नहीं तो ये वाला वर्ल्ड कप भी गया ही मानिए.

# बोलिंग

जसप्रीत बुमराह. आजकल चोट के चलते टीम से बाहर हैं. और इनके बाहर होने ने तमाम समस्याओं को अंदर कर दिया है. इंडियन बोलर्स का हाल बुरा है. न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ 18 जनवरी, बुधवार को हुए वनडे मैच में ये बुरा हाल खुलकर सामने आया.

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कीवी टीम 350 की चेज में पहले दस ओवर में एक विकेट खोकर सिर्फ 42 रन बना पाई. पंद्रह ओवर में 74 तक वो दो विकेट खो चुके थे. 31 ओवर्स में हुए दूसरे ड्रिंक्स ब्रेक टीम का स्कोर छह विकेट खोकर 141 रन था. यानी अब बचे थे टेलेंडर्स. और हमारे बोलर्स ने इन टेलेंडर्स को प्राइम विव रिचर्ड्स और रिकी पॉन्टिंग बना दिया.

मैदान के चारों ओर पीटे गए. माइकल ब्रेसवेल और मिचेल सैंटनर ने सातवें विकेट के लिए सिर्फ 90 गेंदों में 150 रन जोड़ डाले. और ये वनडे मैच का हाल है. T20 का नहीं. 31 ओवर में 141 बना पाया न्यूज़ीलैंड 46 ओवर में 300 पर पहुंच चुका था. इस दौरान हमारी महान बोलिंग यूनिट एक भी विकेट नहीं ले पाई. और अगर ये ऐसी बोलिंग करेंगे, तो वर्ल्ड कप को टाटा, बाय-बाय करना ही होगा.

# कप्तानी

पांच आईपीएल जीत चुके रोहित जी अपने एसेट्स का सही इस्तेमाल कब सीखेंगे? किस किताब में लिखा है कि हार्दिक पंड्या चाहे जितना पिटें, उनसे बोलिंग करानी ही है? या फिर स्पिनर्स का कोटा पूरा नहीं करना है? मोहम्मद शमी ने लगभग सात रन प्रति ओवर दिए. हार्दिक पंड्या ने 10 रन प्रति ओवर दिए. वॉशिंगटन सुंदर ने सात से ज्यादा रन प्रति ओवर दिए. शार्दुल की इकॉनमी भी सात के पार रही.

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और इस बोलिंग के बाद भी बेहतरीन फेंक रहे कुलदीप यादव का क़ोटा नहीं पूरा कराया गया. कुलदीप ने सिर्फ आठ ओवर फेंके. जबकि वह इस दिन के दूसरे बेस्ट इंडियन बोलर थे. कुलदीप ने अपने आठ ओवर्स में एक मेडेन के साथ सिर्फ 43 रन देकर दो विकेट लिए थे. जबकि सिराज ने 10 ओवर में दो मेडेन फेंकते हुए 46 रन देकर चार विकेट निकाले.

कप्तान साब को ये कौन बताए कि छठा बोलिंग ऑप्शन रखना ठीक है. जरूरत पड़ती रहती है. लेकिन जब छठे के साथ चौथा और पांचवां बोलिंग ऑप्शन भी पिट रहा हो, तो तीसरे बोलिंग ऑप्शन को ट्राई करना चाहिए. जब पेसर्स चारों तरफ कूटे जा रहे थे, उस दौरान कुलदीप का इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? किस लेवल की कप्तानी है ये?

आखिरी वनडे शतक सालों पहले मारने वाले रोहित से कप्तानी भी नहीं हो रही. और इनके चक्कर में हम दोहरा शतक मारने वाले ओपनर को पहले बेंच करते हैं, और फिर किसी तरह जगह बनाकर मिडल ऑर्डर में खिलाते हैं. ये कैसी माया है और कैसी तैयारी है, कौन ही जाने.

# टीम सेलेक्शन

चेतन जी पहले सैक हुए. फिर वापस आए. लेकिन इस तमाम चर्चा में उनकी कंसिस्टेंसी कमाल रही. वो पहले भी गदर टीम चुनते थे और अब भी चुन रहे हैं. और लक्ष्मण, द्रविड़ साब के कोचिंग मेथड्स तो खैर हैं ही कमाल. इन्हें आठवें नंबर तक बैटर चाहिए. भले इसके चक्कर में एक बोलर कम हो जाए. शार्दुल ठाकुर और वॉशिंगटन सुंदर.

टीम इंडिया के नंबर सात और आठ. इनके टीम में आने से बैटिंग और बोलिंग दोनों में गहराई मालूम चलती है. लेकिन असल में हम ना घर के रहते हैं और ना घाट के. अगर आपके टॉप छह रन नहीं बना पा रहे, तो सात पर आपको ब्रेसवेल जैसा बैटर चाहिए. जो साढ़े तीन सौ की चेज में भी धमाका करने का दम रखे. सिर्फ बल्ला चला पाने वाले प्लेयर्स यहां काम नहीं आएंगे.

और अगर आप इनके चलते किसी प्रॉपर बोलर को किनारे लगा रहे हैं, तो फिर सवारी सामान की खुद जिम्मेदार है. वनडे वर्ल्ड कप में कुछ ही महीने बचे हैं और अभी तक ना तो टीम का मिडल ऑर्डर सेट है और ना ही बोलिंग. ऐसे में इनसे क्या ही उम्मीद की जाए?

वीडियो: माइकल ब्रेसवेल, धुरंधर कीवी बल्लेबाज की विकेटकीपर से स्पिनर बनने की मजेदार कहानी

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