सहवाग एक चमत्कार हैं. एमबीए स्कूलों में पढ़ाने लायक एक केस स्टडी. लोग जिसे हाई-प्रेशर, हाई-इमोशन क्रिकेट कहते है, उसमें कोई कैसे इतना मज़ेदार रह सकता है?
विरेंदर सहवाग सबसे लल्लनटॉप खिलाड़ी हैं: 39 सबूत
ऐसी वाणी बोलिए औरन को मज़े दे, आपहूं मज़े ले.

नजफगढ़ का ये पट्ठा सीधे-सीधे कहता था, 'मैं लोगों को मैच देखने का न्यौता नहीं देता, वो खुद मैच देखने आते हैं, मनोरंजन के लिए आते हैं तो क्या दबाव लेना!' क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद सहवाग और ज्यादा छा गए. जिस चैनल पर कमेंट्री करते हैं, उसको नंबर वन बना दिया है.
संन्यास के बाद एक साल में ट्विटर पर 'मज़ा ले-ले फॉलोअर्स' की संख्या लगभग डबल कर डाली. सहवाग अपने क्रिकेट के दिनों में भी ऐसे ही मज़े लेते थे. क्रिकेट में बाकी टीमें सिर्फ बैटिंग-बॉलिंग-फील्डिंग करती हैं, पर ऑस्ट्रेलिया वाले स्लेजिंग भी करते हैं. सहवाग ने उनका भी मज़ा काट लिया.
सहवाग बताते हैं, 'क्लार्क नया-नया आया था. वो सचिन को बार छेड़ रहा था कि तुम्हारी उम्र हो गई है. मैंने क्लार्क को बुलाया पूछा तूने 25 मैच खेले हैं और सचिन ने 40 शतक लगाए हैं. तू उससे बात कर रहा है. क्लार्क बोला – मुझे तुमसे बात नहीं करनी. मैंने भी कहा – मैं भी तुमसे बात नहीं करना चाहता. पर ये तो बता तुम्हारे टीम मेट तुम्हें ‘द पप’ बुलाते हैं. तुम किस ब्रीड के हो. हम भी अपने घर ले आएं.'
बैटिंग करते हुए कोई नहीं जानता था कि सहवाग क्या कर दें. दुनिया में तीन प्लेयर हैं जो टेस्ट मैच में 99 के स्कोर पर स्टंप आउट हुए. वीरू उनमें से एक हैं. ट्रिपल सेंचुरी भी छक्के से पूरी करते हैं. इसी तरह कमेंट्री करते हुए भी उनका यकीन नहीं कि कब क्या बोल दें.
पेश है सहवाग-साहित्य के लल्लनटॉप नगीने, उनकी कमेंट्री-ट्वीट और बयानों से साभार:
कमेंट्री में:
1
चाय में डूबा बिस्कुट, प्यार में पड़ा लड़का और प्रेशर में पड़ा बैट्समैन, किसी काम के नहीं होते.
2
पुजारा की बैटिंग दादी मां की कहानी की तरह है, कभी खत्म ही नहीं होती.
3
जो मज़ा सोने में है, वो किसी कोने में नहीं.
4
इंडिया में लोग एबीसीडी के पीछे रहते हैं. ए- एस्ट्रॉलोजी, बी-बॉलीवुड, सी – क्रिकेट, डी-डिवोशन.
5
कोहली एक रन मशीन हैं और आज ये मशीन सर्विस होकर आई है.
6
रहाणे को आते ही बैट का मिडल मिल गया और यहां लोगों को सेलॉटेप का एंड नहीं मिलता.
7
गंभीर की तरह सब प्लेयर अपने सरनेम को इतना सीरियसली लेते तो, पुजारा अगरबत्ती लेकर बैटिंग करते, विजय रथ पर सवार होकर आते, टेलर सिलाई मशीन लेकर आते, सैंटनर संतरे का जूस लेकर गेंदबाज़ी करते और शामी कबाब लेकर आते.
8
पुजारा पुजारी की तरह बैटिंग करते हैं, जिंदगी ना मिलेगी पुजारा (एक विवादित फैसले में पुजारा को आउट देने के बाद.
9
चिप्स का पैकेट और जड़ेजा का ओवर कब खत्म होता है मालूम ही नहीं पड़ता.
10
हमारे यहां टेलर को दर्जी कहते हैं और न्यूज़ीलैंड की बैटिंग का हाल फटा हुआ है और दर्ज़ी को इसे सिलना पड़ेगा.
ट्विटर पर:
1
आंखें बंद करने से नहीं, टेंशन फ्री होने से नहीं, थकने से भी नहीं, आज के ज़माने में तो वाई-फाई बंद करने से नींद आती है.2
अगर आप पर कोई पत्थर फेंके तो उस पर फूल फेंको, लेकिन गमले के साथ (अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाने का तरीका सहवाग तरीका)3
शोभा डे से सहवाग जी.
4
पीयर्स मॉर्गन घणा ना बोल
सहवाग क्रिकेट पर:
1
सवाल: आप जिस बॉलर को पीटना तय कर लेते हैं फिर अपनी भी नहीं सुनते हैं सहवाग: बॉल का काम है बाउंड्री तक जाना और हम बैट्समैनों का काम है उसे बाउंड्री तक पहुंचाना.
2
सवाल: खेलने के दिनों में आपकी शोएब अख्तर से दोस्ती थी? सहवाग: पाकिस्तान के क्रिकेटरों को इंडिया में बिज़नेस चाहिए होता है. रिटायरमेंट के बाद उनका कोई भी बयान सुन लीजिए. इंडिया की तारीफों के पुलिंदे बांध देते हैं.
3
ऑस्ट्रेलिया वालों की स्लेजिंग पर : बॉलर बैट्समैन को गाली दे तो उसे हैंडल करना पड़ता है. बैट्समैन के लिए ये नेगिटिव हो जाता है. तो कोई स्लेजिंग करे तो क्यों ना मैं ही उसको गाली दे दूं ?
4
शोएब: तू थर्ड मैन–पॉइंट पर ही चौका मार रहा है, सामने मार के दिखा. सहवाग: वो सामने बाप खड़ा है, उसे बाउंसर डाल के दिखा ? सचिन को बाउंसर और छक्का. सहवाग (शोएब से): बेटा बेटा होता है. बाप बाप होता है.
5
सवाल: लोग कहते हैं आपका फुटवर्क खराब है ? सहवाग: मेरा फुटवर्क है ही नहीं. मैं बेसिक्स ठीक कर रहा हूं, मैं ये कर रहा हूं, मैं वो कर रहा हूं, ये सब हमें मीडिया वालों के लिए बोलना पड़ता है.
तो ऐसे लेते हैं लाइफ सहवाग, ऑलवेज़ लल्लनटॉप !
ये स्टोरी लल्लनटॉप के लिए हेमंत ने की है
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