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TMC के 20 बागी सांसदों ने जिस पार्टी में विलय किया, वो किसकी है?

टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अपने गुट का विलय नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में कर एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है. संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचने के लिए यह कदम उठाया गया बताया जा रहा है.

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टीएमसी के बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय कर लिया. (फोटो- India today)

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  • ममता बनर्जी के 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों ने 19 जून को अपनी पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में विलय कर लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया।
  • तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के सामने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित होने और सदस्यता खोने का खतरा था, इसलिए उन्होंने अपने गुट का किसी पार्टी में विलय किया।
  • विलय के बाद बागी सांसदों ने लोकसभा में टीएमसी से अलग बैठने का अनुरोध किया और आगामी समय में राजनीतिक भूमिका के विस्तार के लिए एनडीए के साथ सहयोग जारी रखेंगे।

भारत के दलीय लोकतंत्र में हर समस्या का समाधान है. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के सामने नई पार्टी बनाने में कानूनी अड़चनें आ रही थीं. लिहाजा, 20 बागियों ने मिलकर अपने गुट का एक ऐसी पार्टी में विलय कर लिया, जिसका नाम भी आपने शायद ही सुना हो. ऐसा नहीं करते तो उनके सामने लोकसभा की सदस्यता जाने का खतरा था. ममता से बगावत करने वाले ये सभी टीएमसी सांसद 14 जून, रविवार को सबसे पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिले. इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की. इसके कुछ ही घंटों के बाद टीएमसी के विद्रोही गुट ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में खुद का विलय कर दिया. इसके बाद उन्होंने लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने का ऐलान भी किया है. 

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बागी गुट की लीडर काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनके साथ टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की. उन्हें लोकसभा में टीएमसी से अलग बैठने की व्यवस्था करने की अपील करते हुए एक चिट्ठी सौंपी. दस्तीदार ने कहा कि उनकी संख्या दो तिहाई के आंकड़े से ज्यादा है और वो एनसीपीआई में अपना विलय कर रहे हैं. उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करने की भी बात कही. 

बता दें कि इससे पहले माना जा रहा था कि बागी सांसद अपने गुट को असली टीएमसी होने का दावा करेंगे. बागी सांसदों में से एक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा भी था कि उनका गुट सोमवार, 15 जून को लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करते हुए ‘असली टीएमसी’ के रूप में मान्यता प्राप्त करने की मांग करेगा.

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टीएमसी के एक अन्य बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने इशारा किया है कि उनका गुट ‘टीएमसी’ नाम के लिए कानूनी रास्ता अपनाएगा. उन्होंने कहा कि जब आप पार्टी के दो-तिहाई हिस्से के साथ निकलते हैं, तो आप पहले ही दिन उस पार्टी का नाम नहीं मांग सकते. जुलाई में वो मांग करेंगे कि उन्हें असली तृणमूल दी जाए क्योंकि उनके पास तृणमूल कांग्रेस से दो-तिहाई बहुमत है.

पार्टी में विलय क्यों करना पड़ा?

सवाल ये है कि बागी गुट को एनडीए का समर्थन करने के लिए किसी पार्टी में विलय क्यों करना पड़ा? संविधान के जानकार बताते हैं कि अयोग्य करार दिए जाने और सांसदी बचाने के लिए टीएमसी के बागियों ने अपने गुट का विलय एनसीपीआई में किया है. द प्रिंट को लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने बताया कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत बागी सांसद अयोग्य करार दिए जा सकते थे. इस अनुसूची में दलबदल को रोकने की व्यवस्था है, जिसके तहत दलबदलुओं की लोकसभा या विधानसभा सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान है.

टीएमसी के बागियों के पास इससे बचने के लिए सिर्फ एक रास्ता था कि वो किसी पार्टी में अपने गुट का विलय कर दें. पीडीटी आचार्य कहते हैं कि अगर किसी पार्टी में फूट पड़ती है तो बागी गुट खुद को असली पार्टी बताते हुए भारतीय चुनाव आयोग के पास जा सकता है. लेकिन इसका मतलब विलय नहीं होता है. विलय के लिए उन्हें अपने आपको किसी पार्टी में मिलाना ही होगा. अयोग्यता से बचने का उनके पास यही तरीका है. 

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एनसीपीआई किसकी पार्टी है?

टीएमसी के बागियों ने जिस पार्टी में विलय किया है, उसका नाम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया है. फेसबुक पर इस पार्टी का एक पेज है, जिस पर बताया गया है कि इसकी मुख्य मौजूदगी पश्चिम बंगाल खासतौर पर हावड़ा इलाके और त्रिपुरा, असम जैसे कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में है. यह खासतौर पर सोशल वेलफेयर के कामों पर फोकस करती है और गरीबों की मदद को अपना मकसद बताती है.

इंडिया टुडे से जुड़े तन्मय चक्रवर्ती और इंद्रजीत की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया साल 2023 में बनी थी. साल 2023 के त्रिपुरा चुनाव में इस पार्टी से दो लोगों ने चुनाव लड़ा था. एक उनाकोटी जिले के कैलाशहर से जहांगीर अली और दूसरे धलाई जिले के चावमानु से बरजेदा. त्रिपुरा में शांतनु साहा और कोलकाता में तरुण कुमार रॉय पार्टी को संभाल रहे हैं. NCPI के नेशनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी शांतनु डे हैं. उन्होंने इंडिया टुडे से फोन पर बातचीत में दावा किया कि वो RSS कार्यकर्ता और समाज सेवक हैं. वह पार्टी के संस्थापक सदस्य भी हैं लेकिन बागी TMC सांसदों के NCPI में शामिल होने के फैसले से नाखुश हैं. डे ने कहा कि उनकी पार्टी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में TMC के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. NCPI का राजनीतिक रुख TMC विरोधी है.

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