उद्धव ठाकरे की शिवसेना में फिर से बगावत होने की आशंका है. उनके 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की अटकलें हैं. जो सांसद पाला बदलने वाले हैं, उनमें से एक ने पहली बार इस खबर पर मुहर लगाई है. उद्धव के बागी सांसदों में से एक नागेश आष्टीकर ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया है कि वो शिंदे गुट वाली शिवसेना में जा रहे हैं. नागेश का यह बयान शनिवार, 20 जून को आया. उन्होंने क्लियर किया कि उनके इस फैसले के पीछे उद्धव ठाकरे से कोई नाराजगी नहीं है. वह ‘सेना’ से ‘सेना’ में ही जा रहे हैं.
'उद्धव से नाराज नहीं, पर...', शिंदे गुट में जा रहे शिवसेना सांसद ने पार्टी छोड़ने की वजह बता दी
उद्धव ठाकरे की शिवसेना के बागी सांसद Nagesh Patil Ashtikar ने एकनाथ शिंदे के शिवसेना में 'दलबदल' करने की पुष्टि कर दी है. आष्टीकर ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनके इस कदम को ठाकरे के साथ 'मतभेद' के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘दलबदल’ करने के पीछे नागेश ने अपने चुनावी इलाके का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि उनका ये फैसला अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए फंड पाने और इलाके में होने वाले विकास कार्यों को पूरा करने के लिए लिया गया है. आष्टीकर ने आगे कहा कि उनके क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिल पा रहा था. इसकी वजह से काम रुका हुआ था. ऐसे में उन्हें अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और जनता के हितों को देखते हुए यह फैसला लेना पड़ा. आष्टीकर ने कहा,
फंड नहीं मिल रहा था. विकास कार्य आगे नहीं बढ़ रहे थे. लोगों के काम के लिए सत्ता पक्ष के साथ जाना जरूरी हो गया था.
उद्धव गुट के खेमे की आलोचना के बीच आष्टीकर ने अपने इस फैसले का बचाव किया. साथ ही जोर देकर कहा कि उनके फैसले का विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है. वो शिवसेना की मूल विचारधारा नहीं छोड़ रहे. आष्टीकर ने कहा,
मैंने विचारधारा नहीं छोड़ी है. मैं सेना से सेना में ही जा रहा हूं, कहीं और नहीं.
नागेश आष्टीकर शिवसेना (यूबीटी) के 6 बागी सांसदों में पहले ऐसे हैं, जिन्होंने अपने ‘दलबल’ पर चलने वाली अटकलों पर मुहर लगाई और सफाई दी. साथ ही अपने शिंदे गुट में शामिल होने की खुलकर पुष्टि की. अपनी बात को रखते हुए भी आष्टीकर ने ठाकरे के लगने वाले राजनीतिक ‘झटके’ को कम करने की कोशिश की. सांसद ने कहा कि उनके पार्टी बदलने वाले फैसले को पार्टी (उद्धव गुट) के साथ मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा,
मैं उद्धव साहब से नाराज नहीं हूं, लेकिन सत्ता के बिना लोगों के काम नहीं हो रहे थे.
आष्टीकर ने आगे यह भी कहा कि उनके लिए संजय राउत पिता के समान है और वे उनके फैसले से नाराज नहीं है. यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 2022 में पार्टी के टूटने के बाद से ये समय उद्धव गुट के लिए सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक है. क्योंकि, बाकी बागी सांसदों ने अभी तक अपने ‘दलबदल’ की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है.
वीडियो: बांग्लादेश में ‘राम’ को लेकर क्यों बवाल हो गया?














