'बीमार मां का साथ छोड़ने जैसा, माफी के लायक नहीं', TMC छोड़ने वालों को ममता ने खूब सुनाया
ममता बनर्जी ने TMC छोड़कर जाने वाले नेताओं को जमकर खरी-खोटी सुनाई है. उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में पार्टी को छोड़कर जाना बीमार मां को छोड़ कर जाने जैसा है. उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने पार्टी से विश्वासघात किया है, इनकी गलती माफी लायक नहीं है. जनता आने वाले समय में उनसे हिसाब मांगेगी.

ममता बनर्जी सियासी मुश्किलों में घिरी हैं. पार्टी दो फाड़ हो चुकी है. अधिकतर विधायक, सांसद और पार्षद साथ छोड़ चुके हैं. इस बीच कोलकता की एक मीटिंग में उन्होंने बागियों को जमकर सुनाया है. पार्टी छोड़कर जाने वाले विधायकों, सांसदों और पार्षदों को गद्दार करार दिया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने उत्तरी कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की एक मीटिंग में वर्चुअली संबोधित किया. इस बैठक में उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे.
ममता बनर्जी ने आगे कहा,
जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा. जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वसाघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी.
इस मीटिंग में ममता बनर्जी ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को ‘डर’ और ‘आर्थिक संकट’ का माहौल बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. ममता ने कहा कि हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के चलते आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं. फेरीवालों के स्टॉल तोड़े जा रहे हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं.
ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. TMC चीफ ने पाला बदलने वाले नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उन पर कानूनी मामलों से बचने और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग सिर्फ खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए पाला बदल लेते हैं. उनमें धैर्य की कमी है. वे हमें छोड़कर उन्हीं लोगों से मिल जाते हैं जिनके खिलाफ हमने लड़ाई लड़ी थी. अगर वे सीधे बीजेपी में शामिल हो जाते तो बेहतर होता. हमें इससे कोई आपत्ति नहीं होती. लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात माफी लायक नहीं है.’
ममता बनर्जी ने कहा कि सभी दलबदलू राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ जाएंगे. जिन लोगों में अभी भी समझदारी बची है. उनको वापस आ जाना चाहिए. TMC चीफ ने कहा,
मैं उनसे कहती हूं कि वापस लौट आओ. अगर कोई ये सोच रहा है कि वह पार्टी छोड़कर बच जाएगा तो मैं साफ कर दूं. तुम आखिर में कहीं के नहीं रहोगे. न यहां के. न वहां के.
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शहीद दिवस मनाने की घोषणा कीममता बनर्जी ने 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाने की घोषणा के साथ अपनी स्पीच खत्म की. उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को वो हर हाल में शहीद दिवस कार्यक्रम करेंगी, भले ही उसमें केवल पांच लोग आएं. साल 1993 में कांग्रेस पार्टी में रहने के दौरान ममता बनर्जी ने वोटर पहचान पत्र को अनिवार्य करने की मांग को लेकर राइटर्स बिल्डिंग का घेराव किया था. उस दौरान पुलिस फायरिंग में 13 युवा कांग्रेसी कार्यकर्ता मारे गए थे.
कांग्रेस ने इस दिन को शहीद दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की. साल 1998 में कांग्रेस से अलग होने का बाद ममता बनर्जी की पार्टी ने इस आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली. TMC हर साल धर्मतला में इस दिन विशाल रैली आयोजित करती है.
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