तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय संसदीय सीटों के परिसीमन के खिलाफ पूरी तरह मुखर हैं. बुधवार, 12 अगस्त को उन्होंने तमिलनाडु विधानसभा में लोकसभा सीटों के परिसीमन के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया. उन्होंने संसद में सीटों की मौजूदा संख्या को फ्रीज करने की मांग की. उन्होंने कहा कि अगर परिसीमन हुआ, तो इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान पहुंच सकता है. TVK चीफ विजय ने आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की वकालत जरूर की.
परिसीमन पर CM विजय ने मोदी सरकार के सामने रखी 3 शर्तें, महिला आरक्षण का किया समर्थन
Vijay Delitation Resolution: सीएम विजय ने कहा कि साउथ के राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल करने में बेहतर प्रदर्शन किया. शिक्षा में भी उनकी परफॉर्मेंस नॉर्थ के राज्यों से बेहतर है. अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है तो दक्षिण भारत को नुकसान हो सकता है.

मोदी सरकार ने अभी तक परिसीमन यानी डिलिमिटेशन पर नया बिल पेश नहीं किया है. उड़ती-उड़ती खबरें जरूर आती रहती हैं कि मौजूदा मानसून सत्र के आखिरी दिनों में इसे पेश किया जा सकता है. ऐसे में सीएम विजय ढील बरतने के मूड में नहीं हैं. उन्होंने प्रस्ताव पेश कर मोदी सरकार के सामने 3 बड़ी मांगें रख दी हैं. मानें, तमिलनाडु ने डिलिमिटेशन के मुद्दे पर केंद्र के सामने 3 लकीरें खींच दी हैं.
विजय की 3 बड़ी मांगेंमुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियों से इस प्रस्ताव पर समर्थन मांगा. इंडिया टुडे से जुड़े अपूर्वा जयचंद्रन, प्रमोद माधव और अनघा की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव में विजय ने 3 मांगें की हैं-
- लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को परमानेंट फिक्स कर दिया जाए. माने, सीटों की संख्या ना बढ़ें, ना घटें, 543 ही रहें.
- मौजूदा समय में हर राज्य को सीटों की संख्या में जितना प्रतिनिधित्व मिलता है, उसे ही बरकरार रखा जाए. इसमें कोई बदलाव ना किया जाए.
- लोकसभा और राज्यसभा की सीटों का मौजूदा अनुपात 2.2:1 ही रहना चाहिए. मानें, लोकसभा में 543 सीटें और राज्यसभा में 245 सीटें.
इन डिमांड पर सीएम विजय ने कहा,
महिलाओं को 33% आरक्षण देने का किया समर्थन"अगर (डिलिमिटेशन) बिल पास हो जाता है, तो पॉपुलेशन कंट्रोल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान हो सकता है. उनके रिप्रेजेंटेशन में कमी आएगी. नंबर को फ्रीज करने की जरूरत है."
उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की भी मांग की.
विजय परिसीमन रोकने और महिला आरक्षण देने की वकालत क्यों कर रहे हैं? क्योंकि उन्होंने जोर दिया कि साउथ के राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल करने में बेहतर प्रदर्शन किया. शिक्षा में भी उनकी परफॉर्मेंस नॉर्थ के राज्यों से बेहतर है. अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है, तो उन्होंने तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों के नुकसान में रहने की आशंका जाहिर की.
महिला आरक्षण की वकालत इसलिए क्योंकि 16 अप्रैल को मोदी सरकार ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 पेश किया था. सरकार का तर्क था कि लोकसभा की सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाई जा सकेंगी. इसके अलावा, 2023 में पास हुए महिला आरक्षण बिल को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा.
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यह बिल पास नहीं हो सका था. संसद में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के संवैधानिक रूप से जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा सत्ता पक्ष नहीं जुटा पाई थी. 33% आरक्षण बिल 2023 में ही पास हो चुका है. विजय ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला आरक्षण को लागू नहीं कर रही. यह दिखाता है कि BJP महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहती.
प्रस्ताव के खिलाफ कौन?विपक्षी 'द्रविड़ मुनेत्र कड़गम' (DMK) ने विजय के प्रस्ताव को सपोर्ट किया है. लेफ्ट पार्टियों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन BJP ने इसका विरोध किया है. 'ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम' (AIADMK) ने भी प्रस्ताव का विरोध किया. AIADMK ने उसने महिला आरक्षण से जुड़े हिस्से का समर्थन जरूर किया है.
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