राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत 6 महीने तक जेल में रहे सोनम वांगचुक भी केंद्र सरकार से बातचीत करने वाली लेह अपेक्स बॉडी की टीम का हिस्सा होंगे. एबीएल ने केंद्र सरकार को बता दिया है कि 22 मई को लद्दाख के प्रतिनिधियों की सरकार के अधिकारियों के साथ जो बातचीत होगी, उसमें उनके डेलीगेशन की ओर से सोनम वांगचुक भी पेश होंगे. ये पहली बार होगा जब सोनम वांगचुक इस बातचीत में सीधे तौर पर शामिल होंगे.
लद्दाख के मुद्दे पर बहस के लिए अब केंद्र के सामने होंगे सोनम वांगचुक
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और 6ठीं अनुसूची में शामिल करने की मांग करने वाली लेह की एपेक्स बॉडी (ABL) ने सरकार को साफ कह दिया है कि 22 मई को गृह मंत्रालय के साथ उनकी जो मीटिंग होगी, उसमें सोनम वांगचुक भी हिस्सा लेंगे.


इससे पहले 24 सितंबर 2025 को लद्दाख को राज्य का दर्जा (Statehood) देने और Sixth Schedule में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन के हिंसक हो जाने के बाद वांगचुक को गिरफ्तार किया गया था. आरोप था कि उनके उकसावे पर ही आंदोलन हिंसक हो गया. 6 महीने तक जेल में रहने के बाद 14 मार्च 2026 को गृह मंत्रालय ने वांगचुक के NSA detention को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया, जिसके बाद वो जेल से बाहर आ पाए.
मीटिंग में कौन-कौन जाएगा?इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक, 21 मई को ABL ने लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के जरिए केंद्र को बताया कि लद्दाख के मुद्दे पर केंद्र सरकार से बातचीत के लिए लेह की ओर से 3 लोग बातचीत के लिए दिल्ली जाएंगे. इनमें लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (LBA) के अध्यक्ष और ABL के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजाय लाकरूक, लद्दाख गोनपा एसोसिएशन के अध्यक्ष दोरजाय स्टैंजिन और ABL सदस्य सोनम वांगचुक शामिल होंगे. ABL ने यह भी कहा है कि बातचीत के दौरान कानूनी सलाह के लिए विक्रम हेगड़े भी साथ रहेंगे.
लेह अपेक्स बॉडी का डेलीगेशन गुरुवार, 21 मई को दिल्ली पहुंचने वाला है. वहीं कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के रिप्रेजेंटेटिव्स बातचीत के लिए पहले ही नई दिल्ली पहुंच चुके हैं. KDA की ओर से उसके अध्यक्ष असगर करबलाई के साथ संगठन के सह अध्यक्ष सज्जाद हुसैन और सदस्य गुलाम रसूल बातचीत में हिस्सा लेंगे. सज्जाद हुसैन ने इस बातचीत को लेकर बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें बातचीत का कोई एजेंडा नहीं दिया गया है. हालांकि, उनका एजेंडा साफ है. वह मीटिंग में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इसे छठी अनुसूची में शामिल करने की अपनी मांग पर बने रहेंगे.
क्या है मामला?बता दें कि साल 2019 में लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. इसके बाद साल 2021 से लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) संयुक्त रूप से आंदोलन कर रहे हैं. उनकी मांगें हैं कि लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए. उसे सिक्स्थ शेड्यूल में शामिल किया जाए, जिससे जनजातीय क्षेत्रों की सांस्कृतिक सुरक्षा तय हो सके.
सज्जाद हुसैन का कहना है कि पिछले 7 साल से केंद्र सरकार उन्हें लगातार नजरअंदाज कर रही है और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रही है. जबकि, वो चाहते हैं कि बातचीत अच्छे माहौल में हो और लद्दाख के लोगों की चिंताओं को सही तरीके से सरकार के सामने रखा जा सके.
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