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'सरकारी ठेके घरवालों को दे दिए', अरुणाचल के CM के खिलाफ CBI जांच का आदेश

Arunachal Pradesh सरकार पर आरोप है कि उसने बड़ी संख्या में बीजेपी नेता और राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेका दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए हैं.

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अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
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अनीषा माथुर

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर लगे आरोपों की CBI जांच का आदेश दिया है. राज्य सरकार पर आरोप है कि उसने बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री पेमा खांडू (CM Pema Khandu) और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को ही सरकारी ठेका दिया. कोर्ट ने CBI को प्रारंभिक जांच शुरू दर्ज करने का निर्देश दिया है. जांच रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर अदालत में जमा करनी होगी.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार, 6 अप्रैल को जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिए. ‘सेव मोन रीजन फेडरेशन’ नाम के एक एनजीओ ने यह याचिका 2024 में दायर की थी. आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू की पत्नी और भतीजे की कंपनियों को बिना कोई प्रोसेस फॉलो किए टेंडर आवंटित किए गए. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि CBI नवंबर 2015 से 2025 तक के बीच हुए टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट्स के आवंटन और प्रोसेस की जांच करेगी. इसके तहत खासतौर पर उन ठेकों को भी खंगाला जाएगा, जिनका जिक्र याचिका में है. 

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जांच एजेंसी को फ्लो ऑफ पेमेंट्स, टेंडर प्रोसेस, और डीलिंग से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करने के लिए कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग करे. कोर्ट ने सख्त लहजे में यह भी कहा कि जांच से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड, चाहे वह फिजिकल हो या डिजिटल को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए.

इस मामले में 2 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. तब कोर्ट ने CBI जांच के आदेश नहीं दिए थे. जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा था कि अभी वह मामले की CBI जांच का आदेश नहीं देना चाहते. वह चाहते हैं कि पहले राज्य और जानकारी दे. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया,

"पिछले 10 सालों में अकेले तवांग में 188 करोड़ रुपये के 31 ठेके पेमा खांडू के परिवार से जुड़े लोगों की कंपनियों को दिए गए. इसके अलावा वर्क ऑर्डर के ज़रिए 2.61 रुपये करोड़ के काम भी दिए गए. राज्य की पॉलिसी के मुताबिक 50 लाख रुपये से कम के कामों के लिए बिना टेंडर के कॉन्ट्रैक्ट दिया जा सकता है. सरकार कहती है कि हम उन कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट देना चाहते हैं, जिन पर स्थानीय लोग भरोसा करते हैं. और जिन कंपनियों पर लोग भरोसा करते हैं, वह CM और उनकी पत्नी वगैरह की कंपनियां हैं, क्योंकि वह उस इलाके से आते हैं."

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प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि लगभग सभी मामलों में 2 कंपनियों ने टेंडर भरा. मुख्यमंत्री के करीबियों की कंपनी जो टेंडर देती है, वह दूसरी कंपनी से 0.01% कम होता है. इसलिए उन्हें टेंडर दे दिया जाता है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से पेमा खांडू और उनके रिश्तेदारों की कंपनी को दिए गए ठेकों की पूरी जानकारी मांगी. इसके लिए सरकार को जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए कहा गया था.

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