Ranbir Kapoor स्टारर Ramayana के टीज़र पर लोगों का मिक्स्ड रिएक्शन देखने को मिल रहा है. जनता इसके VFX को तो क्रिटिसाइज़ कर ही रही है, साथ ही मेकर्स पर AI के इस्तेमाल का आरोप भी लगा रही है. मगर इन सबके बीच Hrithik Roshan ने 'रामायण' को डिफेंड किया है. इंस्टाग्राम पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए उन्होंने VFX के अलग-अलग स्टाइल्स और लोगों की एक्सपेक्टेशंस को लेकर खुलकर बात की है.
'रामायण' के VFX पर सवाल उठे, तो ऋतिक रोशन मेकर्स के सपोर्ट में आ गए
ऋतिक ने कहा कि लोगों को VFX के अलग-अलग स्टाइल्स को लेकर थोड़ा ओपन माइंडेड होना चाहिए.


ऋतिक का ये पोस्ट इतना लंबा है कि उससे इंस्टाग्राम कैप्शन का वर्ड लिमिट खत्म हो गया. अपनी बात पूरी करने के लिए उन्हें कमेंट सेक्शन तक का सहारा लेना पड़ गया. खैर, ऋतिक लिखते हैं,
"हां, खराब VFX होता है. कभी-कभी ये इतना खराब होता है कि देखना मुश्किल हो जाता है. खासकर मेरे लिए. तब तो और भी ज्यादा, जब वो फिल्म मेरी अपनी हो."
ऋतिक ने लोगों को अपने बचपन के कुछ किस्से सुनाए. उन्होंने बताया कि जब वो केवल 11 साल के थे, तब उन्होंने लंदन की एक ट्रिप के दौरान 'बैक टू द फ्यूचर' देखी थी. उस फिल्म ने उनकी ज़िंदगी बदल दी. वो कहते हैं,
"मैं उस फिल्म का दीवाना हो गया था. मैं अपने पापा के VHS प्लेयर के साथ बैठकर उसके फ्रेम्स को बार-बार पॉज़-प्ले, पॉज़-प्ले करके देखता रहा. तब तक, जब तक कि प्लेयर खराब नहीं हो गया. मैंने अपनी पॉकेट मनी से रीडर्स डाइजेस्ट से Industrial Light and Magic: The Art of Special Effects नाम की किताब ऑर्डर की थी. उसके जुहू पोस्ट ऑफिस पहुंचने का मैंने महीनों इंतज़ार किया था. वो मेरी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत दिनों में से एक था. मुझे आज भी वो खुशबू याद है, जब मैंने उस किताब को पहली बार खोला था. उसके बाद मैंने ऐसी कई और किताबें मंगवाईं."
इस पोस्ट में ऋतिक ने 'रामायण' समेत इंडस्ट्री की कुछ अन्य फिल्मों का जिक्र किया. ऐसी फिल्में, जिन्होंने VFX के मामले में कुछ अलग करने की कोशिश की है. वो लिखते हैं,
"आज हमारे बीच कुछ खास लोग हैं. जैसे कल्कि, बाहुबली और रामायण जैसी फिल्में बनाने वाले. और हां, मेरे पापा भी- कोई मिल गया और कृष के लिए. ये लोग मेरे हीरो हैं. इनमें वो हिम्मत और विज़न है, जो कुछ नया और अनोखा करने की ताकत देती है. वो ये सब कुछ सिनेमा के लिए अपने प्यार के कारण करते हैं. ऐसा इसलिए ताकि हम दर्शकों को कुछ ऐसा देखने को मिले, जो हमने पहले कभी नहीं देखा है. मेरी नज़र में, इन्होंने इतना पैसा और सालों की मेहनत दांव पर लगा दी है. सिर्फ इसलिए ताकि कोई 11 साल का बच्चा भी वैसा ही महसूस कर सके, जैसा मैंने किया था."
ऋतिक का मानना है कि VFX तब खराब लगता है, जब मूवी फोटोरियलिस्टिक यानी बिल्कुल असली जैसा दिखने का दावा करती है, मगर उसे पूरा नहीं कर पाती. कहीं भी फिजिक्स या ग्रैविटी में गलती हो जाए, तो ये पूरा भ्रम टूट जाता है. वहीं अगर फिल्म स्टोरीबुक या इमेजिनरी स्टाइल में है, तो उसे खूबसूरत, आर्टिस्टिक और डिवाइन होना चाहिए. अगर वो ऐसा नहीं बनती, तो दर्शक उससे जुड़ नहीं पाते हैं. वो कहते हैं कि किसी स्टोरीबुक स्टाइल की फिल्म को सिर्फ इसलिए गलत कहना क्योंकि वो फोटोरियलिस्टिक नहीं दिख रही, सही नहीं है. उसका मकसद रियलिस्टिक होना होता ही नहीं है.
मगर इसके बाद ऋतिक ने गेंद दर्शकों के कोर्ट में डाल दी. उनके मुताबिक, दर्शकों को VFX के अलग-अलग स्टाइल्स को लेकर थोड़ा ओपन माइंडेड होना चाहिए. सिर्फ इसलिए किसी फिल्ममेकर को क्रिटिसाइज़ करना सही नहीं कि उसने एक ऐसा स्टाइल चुना, जो आपको पसंद नहीं आया. ऋतिक की मानें तो कई बार लोग जिसे बुरा VFX कहते हैं, वो असल में सिर्फ एक अलग स्टाइल होता है. ऐसा स्टाइल, जिसकी जनता ने उम्मीद नहीं की थी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगली बार ये सोचने से पहले कि VFX कितना असली लग रहा है, लोगों को ये समझना चाहिए कि वो कहानी के हिसाब से सही है या नहीं. उन्होंने कहा कि लोगों को फिल्म के इस टेक्निकल साइड को लेकर बहस करनी चाहिए. मगर ऐसा करने से पहले उन्हें पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए.
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