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लादेन को मारने वाली 'नेवी सील' ने कैसे दिया ईरान को चकमा? US अफसर को बचाने की पूरी कहानी

US Pilot Rescued From Iran: घायल अमेरिकी वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) ईरान में जाग्रोस पहाड़ियों में 7,000 फीट ऊपर एक दरार में छिप गया था. अमेरिकी मिलिट्री और CIA को खतरा था कि कहीं ईरान ने उसके अधिकारी को पकड़ ना लिया हो. फिर शुरू हुआ Navy SEAL का खेल.

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अमेरिका की नेवी सील टीम ने ओसामा बिन लादेन (सर्कल में) को मार गिराया था. (Press TV/ITG/US Army)

2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका ने अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. तकरीबन 40 मिनट तक चले इस ऑपरेशन को अमेरिका की नेवी सील (Navy SEAL) ने अंजाम दिया था. 2026 में टीम यही थी, लेकिन जगह थी ईरान. 2011 में लादेन को मारना था, लेकिन 2026 में अमेरिकी 'F-15E स्ट्राइक ईगल' फाइटर जेट के वेपन्स सिस्टम अफसर (WSO) को बचाना था. SEAL Team 6 ने हिस्ट्री दोहराई और ईरान की नाक के नीचे से घायल अमेरिकी अधिकारी को बचाकर ले आई.

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अमेरिका ने अपने वेपन्स सिस्टम ऑफिसर (WSO) को बचा तो लिया, लेकिन कुछ प्लेन और हेलीकॉप्टर का नुकसान भी झेला. रेस्क्यू ऑपरेशन किसी हॉलीवुड मूवी से कम नहीं था. मिलिट्री स्ट्रेटेजी के साथ-साथ फेक न्यूज और धोखेबाजी का तड़का था, जिसका अमेरिका को फायदा भी मिला.

28 फरवरी से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तो चल ही रही है. एक-दूसरे को ठिकानों पर जमकर हमले किए जा रहे हैं. शुक्रवार, 3 अप्रैल को एक अमेरिकी 'F-15E स्ट्राइक ईगल' फाइटर जेट ईरान में जाता है, जो भयंकर गोलीबारी से क्रैश हो जाता है. उस जेट में दो क्रू मेंबर्स थे- पायलट और वेपन्स सिस्टम अफसर (WSO). दोनों प्लेन से इजेक्ट (इमरजेंसी में सीट समेत कूदकर बाहर निकलना) हो जाते हैं.

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उसी दिन अमेरिकी रेस्क्यू टीम पायलट को तो बचा लेती है, लेकिन वेपन्स सिस्टम अफसर का पता नहीं चलता. यहीं से अमेरिका का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाता है. शनिवार, 4 अप्रैल को अमेरिकी एयरमैन को ढूंढने के लिए रेस्क्यू टीम् गई, लेकिन ईरान के सामने एक ना चली. ईरान ने दावा किया कि उसने एयरमैन को बचाने आए दो अमेरिकी दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को उड़ा दिया. रेस्क्यू मिशन में लगे एक अमेरिकी A-10 Warthog प्लेन पर भी ईरान ने हमला किया, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक क्रैश हो गया.

अमेरिका के हाथ में नाकामी थी. एयरमैन भी नहीं बचा और तीन एयरक्राफ्ट भी तबाह हो गए. अमेरिकी मिलिट्री 'कोई भी आदमी पीछे नहीं छूटना चाहिए' के उसूल पर चलती है. नुकसान कितना भी हो, लेकिन अपने बंदे को बचाना है. अमेरिका ने नए सिरे से तैयारी शुरू की. इस बार मौका हाथ से नहीं जाने देना था. अमेरिका की स्पेशल फोर्स, अमेरिकी खुफिया एजेंसी 'सेंट्रल इँटेलिजेंस एजेंसी' (CIA) और इजरायल मिलकर वेपन्स सिस्टम ऑफिसर को बचाने में जुट गए.

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शनिवार, 4 अप्रैल की सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान को धमकी दे रहे थे. ट्रंप ने 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट ना खोलने पर ईरान के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद करने की चेतावनी दी. दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारी ईरान में फंसे एयरमैन को बचाने के लिए आखिरी तैयारी कर रहे थे.

अमेरिकी सेना का सेंट्रल कमांड एयरमैन के रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ा बयान जारी करने वाला था. लेकिन उसे रोक दिया गया. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के युद्ध मंत्री (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को फोन किया और उनसे कहा कि जब तक वेपन्स ऑफिसर को ढूंढने का मौका है, उन्हें पायलट के रेस्क्यू की जानकारी सीक्रेट रखनी होगी.

करीब 100 स्पेशल ऑपरेशन फोर्स जवानों के अलावा SEAL Team 6 के सदस्यों को ईरान भेजा गया. डेल्टा फोर्स के कमांडो और आर्मी रेंजर्स को स्टैंडबाई पर रखा गया कि अगर कुछ गड़बड़ी हुई, तो उन्हें तुरंत रवाना किया जा सके. शनिवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर दर्जनों फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, सर्विलांस प्लेन, एरियल टैंकर को रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ईरान भेजा गया.

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि CIA की मदद से उन्हें वेपन्स ऑफिसर की सटीक लोकेशन मिल गई. अमेरिकी एयरफोर्स के लोग बीकन का इस्तेमाल करते हैं, ताकि अमेरिका को उनकी लोकेशन का पता चलता रहे. हालांकि, ईरान में फंसे अधिकारी ने इसे हर वक्त चालू नहीं रखा, क्योंकि ईरान इसे ट्रेस कर सकता था.

लोकेशन लेते वक्त अमेरिका को इस बात की चिंता थी कि ईरान ने उसके अधिकारी को पकड़ ना लिया हो, और कहीं ईरान ही अधिकारी की लोकेशन को नहीं भेज रहा. अमेरिका की खास टेक्नोलॉजी की मदद से लोकेशन को ट्रैक हो गई, लेकिन एक अजीब रेडियो मैसेज आया, जिसे शुरू में "पावर बी टू गॉड" यानी "ईश्वर को शक्ति मिले" के तौर पर सुना गया.

राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी न्यूज पोर्टल एक्सियोस को बताया,

"उन्होंने (अमेरिकी वेपन्स सिस्टम ऑफिसर) रेडियो पर जो कहा, वह ऐसा लग रहा था जैसे कोई मुसलमान कहता हो."

ट्रंप ने आगे कहा कि लोग उस ऑफिसर को जानते थे, उन्होंने बाद में बताया कि वे एक धार्मिक व्यक्ति हैं, और उनका ऐसा कहना सही था. बाद में डिफेंस अधिकारियों ने मैसेज को "गॉड इज गुड" यानी "ईश्वर अच्छा है" के तौर पर माना. तब अमेरिका को इत्मीनान हुआ कि उसे अपने अधिकारी की सही लोकेशन मिल गई है.

घायल अमेरिकी ऑफिसर ईरान में जाग्रोस पहाड़ियों में 7,000 फीट ऊपर एक दरार में छिप गया था. एयर फोर्स के लोगों को ऐसे हालात में छिपने और जिंदा बचने की ट्रेनिंग दी जाती है. ईरान भी अमेरिकी ऑफिसर की तलाश कर रहा था. ईरान ने अमेरिकी वेपन्स ऑफिसर को ढूंढने पर 60,000 डॉलर (करीब 55.83 लाख रुपये) का इनाम घोषित किया था.

C-130 Hercules
अमेरिका का C-130 एयरक्राफ्ट. (US Army)

रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ ही CIA ने ईरान को भटाकने के लिए धोखेबाजी चालू कर दी. CIA ने ईरान में यह बात फैला दी कि अमेरिका को उसका वेपन्स ऑफिसर मिल गया है और उसे एक जमीनी कॉन्वॉय में ईरान से बाहर ले जाया जा रहा है. यह सब ईरान का ध्यान भटकाने के लिए किया गया, ताकि घायल अधिकारी की तरफ बढ़ती ईरानी फोर्स का फोकस रोड पर हो जाए.

हालांकि, ईरान का अपना कैंपेन चलता रहा. जैसे ही अमेरिकी कमांडो ईरान में टारगेट पर उतरे, अमेरिकी और इजरायली फाइटर जेट ने बमबारी शुरू कर दी. इससे चमकीली रोशनी उठी. एक सीनियर मिलिट्री अधिकारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि उजाला देखकर ऊंचाई पर बैठे एयरमैन ने रेस्क्यू टीम को उन इलाकों के बारे में बताया जिनपर स्ट्राइक करनी चाहिए थी. क्योंकि एयरमैन ईरानियों को आगे बढ़ता देख सकता था. कमांडो ने इलाके में किसी भी ईरानी को अपनी ओर बढ़ने से रोकने के लिए जबरदस्त फायरिंग की.

अमेरिका सीधे ईरानी फोर्स से नहीं लड़ा. उसका फोकस अपने अधिकारी को बचाना था. अमेरिकी कमांडो घायल ऑफिसर को बचाकर निकलने लगे. उन्हें एक हेलीकॉप्टर से वहां से निकाला गया और लैंडिंग प्लेस तक लाया गया. यहीं गड़बड़ी हो गई. अमेरिका के दो C-130 एयरक्राफ्ट यहां फंस गए. वे उड़ान नहीं भर पा रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कम से कम एक एयरक्राफ्ट या फिर दोनों का ही नोज गियर रेत में फंस गया था.

जब बात हाथ से निकल रही थी, तो अमेरिकी फोर्स ने इन दोनों C-130 एयरक्राफ्ट को बम से उड़ा दिया. इसके अलावा चार MH-6 स्पेशल ऑपरेशन हेलीकॉप्टर को भी बम से उड़ाना पड़ा. अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपने एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर इसलिए बम से उड़ा दिए, ताकि ये ईरान के हाथ ना लग सकें. फिर अमेरिका ने अलग से तीन प्लेन मंगवाए और एयरमैन समेत अमेरिकी रेस्क्यू टीम को ईरान से सुरक्षित बाहर निकाला.

लेकिन ईरान का दावा उलट है. ईरान के सरकारी न्यूज चैनल प्रेस टीवी ने लिखा कि इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC), पुलिस कमांडो यूनिट्स, बासिज रेजिस्टेंस फाइटर्स और रेगुलर आर्मी ने रविवार, 5 अप्रैल की सुबह दक्षिणी इस्फहान प्रांत में दो अमेरिकी C-130 ट्रांसपोर्ट प्लेन और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को तबाह कर दिया. बर्बाद प्लेन वगैरह के फोटो-वीडियो भी पेश किए गए.

ईरानी सेना के खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने कंफर्म किया कि अमेरिकियों ने दक्षिणी इस्फहान प्रांत में एक खाली पड़े एयरपोर्ट को एक खुफिया जगह के तौर पर इस्तेमाल करने का प्लान बनाया था. हालांकि, ईरानी इंटेलिजेंस ने पहले ही ऑपरेशन का मैप बना लिया था. अमेरिकी प्लेन और हेलिकॉप्टर को फोड़ने के दावे के साथ ईरान ने अमेरिका के रेस्क्यू ऑपरेशन को एक 'फेल मिशन' करार दिया.

कुछ अमेरिकी एनालिस्ट ने ईरान में F-15E के नुकसान और उसके बाद कई रेस्क्यू एयरक्राफ्ट के बर्बाद होने को अमेरिका की एयर पावर की कमियों को दिखाने वाला बताया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पूर्व कमांडर जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने BBC के अमेरिकी पार्टनर CBS को बताया कि "असल में हमने उस मिशन में कुछ एयरक्राफ्ट खो दिए थे" लेकिन उनका कहना है कि ऐसे हालात में आप उस नुकसान को "किसी भी दिन" झेल सकते हैं.

उन्होंने CBS के फेस द नेशन प्रोग्राम में कहा,

"एक एयरक्राफ्ट बनाने में एक साल लगता है - एक मिलिट्री ट्रेडिशन (सैन्य परंपरा) बनाने में 200 साल लगते हैं जहां आप किसी को पीछे नहीं छोड़ते."

घायल अमेरिकी ऑफिसर को कुवैत ले जाया गया. पेंटागन और वाइट हाउस को इसकी जानकारी दे दी गई. रेस्क्यू ऑपेरशन में अमेरिका का कोई जवान घायल नहीं हुआ, ना किसी की मौत हुई. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके रेस्क्यू ऑपरेशन की कामयाबी का ऐलान कर दिया.

वीडियो: ईरान ने अमेरिकी पायलट की “मां” के पोस्ट पर क्या कहा?

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