कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने UPI पर चार्ज लगाने के फैसले को वापस लेने की मांग की है. 16 सितंबर को राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार के इस कदम से 'अमेरिका को फायदा' होगा. उन्होंने कहा कि इससे हर भारतीय पर टैक्स लग गया है, लिहाजा इसे वापस लिया जाए.
'मोदी जी उठिए और हिम्मत दिखाइए', UPI टैक्स के खिलाफ राहुल गांधी ने क्या मांग कर दी?
Rahul Gandhi UPI MDR tax: सरकार के UPI पर टैक्स लगाने के फैसले की कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आलोचना की. उन्होंने ये भी कहा कि इससे अमेरिका का फायदा हो रहा है.

भारत में UPI बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. बड़े-बड़े शोरूम से लेकर सब्जी बेचने वाले तक भी अपने पास QR कोड रखते हैं. कई बार ग्राहक 5 रुपये तक के लिए UPI यूज करते हैं. ऐसे में जब 2000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सरकार ने टैक्स लगाया तो विवाद हो गया.
राहुल गांधी ने वीडियो पोस्ट में कहा कि इंदिरा गांधी से एक बार पूछा गया था कि वे लेफ्ट की तरफ लीन करती हैं या राइट की तरफ. इस पर इंदिरा गांधी ने कहा कि ‘मैं तनकर खड़ी रहती हूं’.
आगे राहुल ने UPI पर टैक्स लगाने से अमेरिका का फायदा होने का दावा किया. कांग्रेस सांसद ने कहा,
मोदी जी बिल्कुल अलग सोचते हैं. वे ना तो लेफ्ट के हैं और न ही राइट के. बल्कि उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप के सामने झुकने का फैसला किया है. कुछ हिम्मत दिखाइए, खड़े हो जाइए और UPI टैक्स को वापस लीजिए. उन्होंने UPI पर टैक्स लगाकर हर भारतीय पर टैक्स लगा दिया है और अमेरिका को भारी पैसा दे दिया है."
इससे पहले राहुल गांधी ने 15 सितंबर को भी UPI टैक्स के फैसले की आलोचना की थी. उन्होंने एक्स पर सवाल किया था सरकार ग्राहकों से फीस नहीं लेगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस कहां से आएगी? उन्होंने कहा,
"मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है. सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी. लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से."
उन्होंने पीएम के अमेरिका के सामने सरेंडर की बात करते हुए लिखा,
सरकार ने किया अमेरिका दबाव से इनकार“अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. US ट्रेड डील की तरह ही, PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं.”
विपक्षी हमलों के बीच बुधवार को केंद्र सरकार ने इस फैसले के पीछे विदेशी दबाव होने के आरोप से इनकार किया. वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत की UPI पॉलिसी से जुड़े फैसले ‘स्वतंत्र रूप से’ लिए गए हैं. और यह ग्राहकों के लिए फ्री बनी रहेगी. बयान में कहा गया,
15 अक्टूबर से लागू नए नियम"कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी दबाव के कारण हुआ है. यह गलत है. भारत की UPI पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं. इनका मकसद ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है, जो खुद पर निर्भर हो, सबको साथ लेकर चलने वाला हो और किफायती हो."
सरकार ने मंगलवार, 15 सितंबर को आदेश दिया कि 15 अक्टूबर, 2026 से 2 हजार रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा. इसकी मैक्सिमम लिमिट 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन होगी. ये शुल्क मर्चेंट से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं. पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं होगा. सरकार का कहना है कि करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन भी इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे.
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कांग्रेस ही नहीं, आम आदमी पार्टी (AAP), RJD ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है. AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि UPI पर सरकार के फैसले का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. और छोटे व्यापारियों का डिजिटल कारोबार प्रभावित होगा. RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि पहले सरकार ने लोगों को डिजिटल लेन-देन की ओर धकेला. अब देखिए इससे कितनी चीजों पर और किस तरह असर पड़ेगा.
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