नीट पेपर लीक प्रोटेस्ट के दौरान एक नाम की खूब खोजबीन हुई. राघव चड्ढा. संसद में मोबाइल रिचार्ज, डेटा पॉलिसी, बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले मिनिमम बैलेंस पेनल्टी से लेकर एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे समोसा तक का मसला उठाने वाले राघव पेपर लीक पर मौन साधे थे. लेकिन अब उन्होंने चुप्पी तोड़ी है, और ये भी बताया है कि अब तक वे मौन क्यों थे.
'मेरा रोल बदल गया है', राघव चड्ढा पेपर लीक पर पहली बार बोले, अब तक चुप रहने की वजह बताई
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने नीट पेपर लीक मामले पर अब तक की चुप्पी का राज खोला है. उन्होंने बताया कि अब उनकी भूमिका बदल गई है. वे विपक्ष से सत्ता पक्ष के पाले में आ गए हैं. इसलिए उन्होंने तय किया था कि वे अब इस मुद्दे् पर तभी अपनी चुप्पी तोड़ेंगे, जब उनकी सरकार कोई समाधान लेकर आएगी.

पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 30 जुलाई को एंटी पेपर लीक पर बोलते हुए कहा,
मुझसे कई लोग पूछ रहे थे कि नीट पेपर लीक पर चुप क्यों हो? नीट पेपर लीक पर कब बोलोगे? पहले जब मैं विपक्ष में था, तब सवाल उठाना मेरा काम था और मैंने वह काम ईमानदारी से किया. अब मैं ट्रेजरी बेंच (सत्ता पक्ष) पर हूं. ऐसे में मेरा रोल बदल गया है. अब मेरी जिम्मेदारी सवाल पूछना नहीं समाधान देना है.
बीजेपी सांसद ने बताया कि इसलिए उन्होंने तय किया था कि जब उनकी पार्टी इस समस्या का समाधान लेकर आएगी, तभी वे बोलेंगे और वो दिन आज (30 जुलाई) का है. उन्होंने कहा,
मैं कैमरे के सामने आकर भी बोल सकता था, लेकिन नहीं. हम इस समस्या का पक्का इलाज लेकर आए हैं.
नीट छात्रों से कहा, ‘आपका गुस्सा जायज’
राघव चड्ढा ने नीट के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका गुस्सा जायज है, उनकी भावना जायज है और उनका दर्द भी जायज है. उन्होंने कहा,
आपने जब अपना दर्द बताया, सबकी बात प्रधानमंत्री ने सुनी और गार्जियन की तरह सिस्टम बदला. हमारी सरकार पेपर लीक के खिलाफ पहली बार एक फ्रेमवर्क लेकर आई है. जब बात छात्रों की आई, सरकार ने सुना और काम किया.
राघव चड्ढा ने दावा किया कि अपराधी के मन में खौफ पैदा करने के लिए सरकार ऐसा कानून लेकर आई है, जिसके पास होने के बाद अपराधी सपने में भी पेपर लीक की बात सोचेगा तो उसकी रूह कांप जाएगी.
‘पेपर लीक एक क्रॉनिक डिजीज’
अपनी स्पीच में राघव चड्ढा ने अकाउंटेबिलिटी और नैतिकता का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में ये नहीं देखा जाना चाहिए कि घटना किस राज्य में हुई, किस मंत्री के कार्यकाल में हुई या वहां किस राजनीतिक दल की सरकार थी. उनके मुताबिक,
पेपर लीक पूरे देश की समस्या है. इसे एक 'पैन इंडिया ऑर्गेनाइज्ड क्राइम' और 'क्रॉनिक डिजीज' की तरह देखा जाना चाहिए.
राघव चड्ढा ने इसके लिए पंजाब का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया,
19 जुलाई 2026 को पंजाब में फॉर्मेसी भर्ती परीक्षा हुई. इस दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आईं. परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से लाइव नकल कराई जा रही थी. और कथित चीटिंग सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों से नकल कराने के लिए 13-13 लाख रुपये तक वसूले.
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बीजेपी सांसद ने कहा कि पेपर लीक किसी एक राज्य या पार्टी की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर इस सख्त कानून का समर्थन करने की अपील की, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का यकीन फिर से परीक्षा व्यवस्था में बहाल हो सके.
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