यूं तो चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश में तीन सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की. लेकिन सबकी नजरें बिहार की बांकीपुर सीट पर है. क्योंकि ये सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा सांसद बनने से खाली हुई है. और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर यहां से चुनावी रण में उतरने की तैयारी में हैं.
बांकीपुर चुनाव में दांव पर बीजेपी की साख, टिकट के दावेदारों में ये नेता सबसे आगे़
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर सबकी निगाहें टिकी है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की खाली की गई इस सीट से जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा है. प्रशांत किशोर जहां इस चुनाव के जरिए अपनी पार्टी में जान फूंकना चाहेंगे. वहीं बीजेपी किसी भी हाल में अपना मजबूत गढ़ गंवाना नहीं चाहेगी.


बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर?
जन सुराज से जुड़े सूत्रों की मानें तो पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना लगभग तय है. हालांकि इस फैसले पर आखिरी मुहर 5 जुलाई को होने वाली पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लगेगी. इसी दिन उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी.
प्रशांत किशोर अगर बांकीपुर से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा का उपचुनाव भर नहीं रह जाएगा. इसे जन सुराज की राजनीतिक ताकत और बीजेपी के शहरी जनाधार की आजमाइश के तौर पर भी देखा जाएगा. साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. इस उपचुनाव के जरिए प्रशांत किशोर अपनी पार्टी में फिर से जान फूंकना चाहेंगे.
30 साल से नितिन नबीन के परिवार का दबदबा
बांकीपुर सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया. पहले इसका नाम 'पटना वेस्ट' विधानसभा सीट था. इस सीट पर 1990 के दशक से ही बीजेपी का दबदबा रहा है. 1995 से लगातार चार बार इस सीट से बीजेपी के नबीन किशोर सिन्हा ने जीत दर्ज की है. सिन्हा बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पिता थे. उनके निधन के बाद, साल 2006 के उपचुनाव में नितिन नबीन ने इस सीट से जीत हासिल कर पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया. नितिन नबीन यहीं नहीं रुके. परिसीमन के बाद बनी बांकीपुर सीट से 2010, 2015, 2020 और 2025 के चुनावों में जीत दर्ज की और इस सीट को बीजेपी का अभेद्य दुर्ग सा बना दिया.
क्या है बांकीपुर का समीकरण?
इंडिया टुडे से जुड़े रोहित सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, बांकीपुर पूरी तरह से शहरी विधानसभा क्षेत्र है. यहां शिक्षित, मिडिल क्लास और बिजनेस क्लास के वोटर्स की अच्छी संख्या है. इस सीट पर कायस्थ समुदाय का प्रभाव सबसे ज्यादा है. इसके अलावा वैश्य, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, यादव, कुर्मी, अति पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम वोटर्स भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते आए हैं.
बीजेपी की तरफ से कौन?
प्रशांत किशोर के मुकाबले बीजेपी किस चेहरे पर दांव लगाएगी इसको लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी साफ नहीं है. लेकिन पार्टी की ओर से सबसे ज्यादा चर्चा नील रतन घोष के नाम की है. घोष लंबे समय से बीजेपी से जुड़े हुए हैं और संगठन में एक्टिव रहे हैं. उनको नितिन नबीन का बेहद करीबी माना जाता है. दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध भी बताए जाते हैं. नील रतन घोष कायस्थ समुदाय से हैं. ऐसे में उनको टिकट का एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
अजय आलोक भी रेस में
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक का नाम भी उम्मीदवारों की लिस्ट में है. अजय आलोक पेशे से डॉक्टर हैं. सियासत का लंबा अनुभव है. साल 2005 में कैमूर के चैनपुर विधानसभा क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. साल 2010 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े. हालांकि सफलता नहीं मिली. साल 2012 में जनता दल यूनाइटेड(जदयू) में शामिल हुए. फिर साल 2023 में बीजेपी में शामिल हुए. अजय आलोक भी कायस्थ समुदाय से आते हैं. टीवी डिबेट में मजबूती से पार्टी का पक्ष रखने वाले अजय आलोक भी बांकीपुर से दावेदारों की लिस्ट में हैं.
कई और दावेदारों की भी चर्चा
संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट में आशीष सिन्हा का नाम भी शामिल है. वो बीजेपी के सीनियर नेता और कुम्हरार विधानसभा सीट से पांच बार के विधायक रहे अरुण सिन्हा के बेटे हैं. साल 2025 में कुम्हरार सीट से उनका टिकट कट गया था. चर्चा है कि बीजेपी इस बार उनके परिवार को फिर से मौका देकर पुराने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साधने की कोशिश कर सकती है.
रितु जायसवाल का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. हाल ही में राजद छोड़कर बीजेपी में आईं रितु जायसवाल वैश्य समुदाय से आती हैं. अगर बीजेपी महिला उम्मीदवार या नए सामाजिक समीकरण को आजमाने पर विचार करती है तो उनका नाम आगे आ सकता है.
किसके बीच होगा मुकाबला?
बांकीपुर सीट से बीजेपी एकतरफा अंदाज में जीत दर्ज करती रही है. विपक्षी पार्टियों की स्थिति इस सीट पर बहुत मजबूत नहीं रही है. साल 2025 के चुनाव में राजद की प्रत्याशी रेखा कुमारी को नितिन नबीन ने 51 हजार से ज्यादा के मार्जिन से हराया था. ऐसे में अगर प्रशांत किशोर चुनावी मुकाबले में उतरते हैं तो असली मुकाबला बीजेपी और जन सुराज के बीच ही होने की संभावना है.
तेज प्रताप यादव ने दिया कैंडिडेट
बांकीपुर से अभी तक किसी भी मेनस्ट्रीम पार्टी ने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है. लेकिन लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल ने अपना उम्मीदवार उतार दिया है. उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है.
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5 जुलाई पर सबकी टकटकी
अब सबकी निगाहें 5 जुलाई पर टिकी हैं. उस दिन जन सुराज प्रशांत किशोर के नाम पर अंतिम फैसला लेगी. वहीं बीजेपी भी उसके बाद ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है. उम्मीदवारों के ऐलान के बाद ही चुनावी मुकाबले की असली तस्वीर साफ होगी. उपचुनाव के लिए नॉमिनेशन की अंतिम तारीख 13 जुलाई है. वहीं 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को नतीजे आएंगे.
वीडियो: राजधानी: प्रशांत किशोर ने बांकीपुर को ही चुनाव लड़ने के लिए क्यों चुना?
















