मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है और इस बार कई अहम बिल पेश करने की तैयारी है. केंद्र सरकार पीएम-सीएम और मंत्रियों को जेल में 30 से ज्यादा दिन बिताने पर पद से हटाने वाले कानून के लिए बिल फिर से पेश कर सकती है. बता दें कि पहले भी यह बिल पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के बाद यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका था. हांलांकि, अब यह लगभग तय हो गया है कि इस बार मानसून सेशन में इसे दोबारा पेश किया जाएगा. बिल पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल के इंतजाम में भी सरकार जुट गई है.
PM-CM को जेल में रहने पर छोड़नी होगी कुर्सी, मानसून सेशन में आएगा बिल
मानसून सेशन में कई अहम बिल प्रस्तावित हैं. इस बार गंभीर अपराधों में जेल जाने पर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री समेत दूसरे मंत्रियों के जेल जाने पर पद छोड़ने वाला बिल भी पेश किया जाएगा. सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि हो गई है.

बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले साल 21 अगस्त को यह बिल संसद में पेश किया था. इसके बाद इसे अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजा गया था. विपक्षी गठबंधन (INDIA Alliance) के कई दलों ने जेपीसी का विरोध किया था. सारंगी ने इस बिल के बारे में कहा कि इस मानसून सत्र में इसे पेश किया जाएगा.
20 जुलाई से शुरू हो सकता है मानसून सेशनज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक के हर पहलू पर विचार किया है. सूत्रों के मुताबिक, 17 जुलाई को जेपीसी बिल से संबंधित अपनी रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इस बिल के सबसे विवादित हिस्से को बरकरार रखा जाएगा. बता दें कि बिल में प्रावधान किया गया है कि गंभीर अपराधों में 30 दिन से ज्यादा समय तक जेल में बिताने पर पीएम-सीएम और मंत्रियों को स्वत: ही पद से हटाया जा सकेगा. सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई से मानसून सेशन शुरू हो सकता है. विपक्षी दलों ने बिल के इसी हिस्से का सबसे ज्यादा विरोध किया था. विपक्ष का तर्क है कि इस कानून के बाद दोषी सिद्ध होने से पहले ही पद से हटाया जाना न्यायसंगत नहीं है.
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केजरीवाल के जेल में रहकर सरकार चलाने पर हुआ था विवादबता दें कि दिल्ली सरकार की शराब नीति मामले में जब अरविंद केजरीवाल जेल गए थे तो उन्होंने पद से इस्तीफा नहीं दिया था. काफी समय तक उन्होंने जेल में रहते हुए ही सरकार चलाई थी और कार्यकारी सीएम आतिशी को बनाया गया था. इसे लेकर बीजेपी ने कड़ा विरोध दर्ज किया था. इसके बाद पिछले साल जब यह बिल लाया गया तो विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था. इसके बाद इसे जेपीसी के पास भेजा गया था. हालांकि, ऐसा लग रहा है कि ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ने विपक्षी दलों की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया है. मानसून सत्र में कई और अहम बिल भी पेश होने की उम्मीद की जा रही है. इसके अलावा, टीएमसी में टूट और शिवसेना (UBT) सांसदों के पाला बदलने के बाद संख्या बल में भी परिवर्तन देखने को मिलेगा.
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