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सिद्दारमैया अब कैसे इस्तीफा देंगे? राज्यपाल तो कर्नाटक में मौजूद ही नहीं, जानें नियम

Karnataka CM resignation: मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपते हैं. लेकिन इस वक़्त कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं. ऐसे में सवाल है कि अगर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया इस्तीफा देना चाहें तो ये कैसे संभव होगा?

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री, राज्यपाल की गैर मौजूदगी में भी इस्तीफा दे सकते हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
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संजय शर्मा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (CM Siddaramaiah) आज यानी 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. दिल्ली में हुई कांग्रेस हाईकमान की मीटिंग के बाद इसकी अटकलें तेज हो गई थीं. नियमों के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपते हैं. लेकिन इस वक़्त कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरु में मौजूद नहीं हैं. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सिद्दारमैया अभी भी इस्तीफा दे सकते हैं. 

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राज्यपाल थावरचंद गहलोत 27 मई की रात फैमिली मेडिकल इमरजेंसी की वजह से मुंबई के लिए रवाना हो गए. वे बेंगलुरु से रात 11:30 बजे निकले, लेकिन उनकी वापसी की फ्लाइट अभी तक बुक नहीं हुई है. ऐसे में अगर मुख्यमंत्री को राज्यपाल की गैर मौजूदगी में इस्तीफा देना हो तो वे कैसे दे सकते हैं? संवैधानिक प्रक्रिया क्या होती है? इसे समझते हैं. 

आजतक से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान के जानकार आर के सिंह ने बताया, 

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  • राज्यपाल राज्य से बाहर यानी किसी दूसरे राज्य या विदेश में हों तब भी वे मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर सकते हैं.
  • आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार इस्तीफा स्वीकार करने के लिए राज्यपाल का स्वयं 'राजभवन' (Raj Bhavan) में उपस्थित होना आवश्यक नहीं है. मुख्यमंत्री अपना इस्तीफा सीधे राजभवन के अधिकारियों को सौंप सकते हैं या फैक्स/ईमेल के माध्यम से राज्यपाल को भेज सकते हैं.
  • संवैधानिक पद पर बैठने वाले राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं. उनका पद किसी एक स्थान या भवन तक सीमित नहीं होता. वे राज्य से बाहर रहकर भी प्रशासनिक कार्यों और आधिकारिक पत्रों को मंजूरी दे सकते हैं. राज्यपाल अगर अस्पताल के बिस्तर से भी चाहें तो इस्तीफा मंजूर कर सकते हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है.  
  • कार्यवाहक व्यवस्था के तहत इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही, राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री को नई सरकार के गठन या वैकल्पिक व्यवस्था होने तक "कार्यवाहक मुख्यमंत्री" के रूप में काम करने का अनुरोध कर सकते हैं.
  • इस्तीफा देते वक़्त ये स्पष्ट होना चाहिए कि वो अंतिम फैसला है, ताकि उसे मंजूर करते समय कोई दुविधा ना हो. 
‘उत्तराखंड - एक उदाहरण’

भारतीय राजनीति में ऐसा पहले भी हो चुका है. जब मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा सौंपा और राज्यपाल ने उसे राज्य से बाहर यानी किसी अन्य राज्य या शहर के दौरे पर रहते हुए भी मंजूर कर लिया. उत्तराखंड इसका प्रमुख उदाहरण है. जुलाई 2021 में, जब उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अपने पद से इस्तीफा दिया था, उस समय राज्य के राज्यपाल बेबी रानी मौर्य देहरादून (राजभवन) में नहीं थीं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में अपने निजी आवास पर मौजूद थीं. तीरथ सिंह रावत ने अपना इस्तीफा पत्र राजभवन भेजा था और राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राज्य से बाहर (आगरा) रहते हुए ही उस इस्तीफे को मंज़ूरी दी थी.

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क्यों इस्तीफा दे रहे सिद्दारमैया?

कांग्रेस की दिल्ली में हुई मीटिंग का मकसद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच ‘कलह’ को सुलझाना था. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्दारमैया को अपने पद से इस्तीफा देने को कहा और उन्हें राज्यसभा के रास्ते दिल्ली आने का प्रस्ताव दिया. ये भी कहा गया कि अगर वे शर्त मान जाते हैं तो उनकी बाकी समस्याओं का भी ध्यान रखा जाएगा. सूत्रों ने बताया कि पार्टी चाहती है कि सिद्दारमैया के बाद डीके शिवकुमार के हाथों में कर्नाटक की कमान सौंप दी जाए. 

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वीडियो: राजधानी: क्या शिवकुमार कर्नाटक संभाल पाएंगे?

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