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HC ने दिल्ली दंगों से जुड़ी सारी याचिकाएं खारिज कीं, वजह बाद में बताएंगे

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दीं. याचिकाओं में कथित भड़काऊ भाषणों को लेकर नेताओं पर FIR, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और SIT जांच की मांग की गई थी.

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दिल्ली दंगों से जुड़ी याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कीं. (फोटो- India today)

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  • दिल्ली हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2023 को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी कुल 15 याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं और पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग शामिल थी।
  • दिल्ली दंगे 24 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हुए, जिससे कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 घायल हुए थे।
  • कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करने का आदेश विस्तार से बाद में जारी करने की बात कही है, जिससे दंगों से संबंधित जांच और राजनीतिक मामले अभी भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेंगे।

दिल्ली में साल 2020 में जब दंगे हुए थे, तब कई बीजेपी नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे. इन आरोपों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं. कोर्ट ने अब उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. इसका कारण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन कोर्ट ने कहा है कि वह अपना फैसला विस्तार से बाद में जारी करेगा.

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बता दें कि दिल्ली दंगों से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं हाई कोर्ट के पास आई थीं. इनमें भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर केस दर्ज करने, लापरवाही करने वाले दिल्ली पुलिस के अफसरों पर कार्रवाई करने और दंगों की जांच दिल्ली पुलिस से हटाकर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को सौंपने की मांग की गई थी. 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'फैसले में बताए गए कारणों के आधार पर याचिकाएं खारिज की जाती हैं.'

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हालांकि, कोर्ट का फैसला विस्तार से नहीं बताया गया और इसे बाद में जारी करने को कहा गया है. 

ये मामला 24 फरवरी, 2020 का है, जब देश भर में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA और NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे थे. दिल्ली में भी शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों का प्रोटेस्ट चल रहा था. इसी बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 लोग घायल हुए थे. 

कौन-कौन सी याचिकाएं खारिज हुईं?

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली दंगों को लेकर हाई कोर्ट में कुल 15 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. कोर्ट ने इन सभी को खारिज कर दिया है. इनमें कुछ प्रमुख याचिकाओं के बारे में जान लेते हैं.

बीजेपी नेताओं पर दंगे भड़काने का आरोप

एक याचिका शेख मोजतबा की ओर से बीजेपी के नेताओं के खिलाफ दायर की गई थी. इसमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन नेताओं के भड़काऊ भाषणों ने दंगों के दौरान हिंसा को और ज्यादा भड़काया. 

याचिका में अनुराग ठाकुर पर आरोप लगाया गया कि दंगों से पहले उनकी एक रैली में विरोध करने वाले लोगों को ‘गोली मारने’ जैसे नारे लगाए गए. इसका वीडियो भी सामने आया था, जिसमें अनुराग ठाकुर के साथ चल रही भीड़ ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो (गाली) को’ नारे लगाते दिखी थी. वहीं, प्रवेश वर्मा पर आरोप था कि उन्होंने दिल्ली में कश्मीरी पंडितों के पलायन की घटना को दोहराने की धमकी दी थी.  

सोनिया-राहुल-प्रियंका पर भी आरोप

एक याचिका ‘लॉयर्स वॉइस’ की ओर से दाखिल की गई थी. इसमें कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम लिया गया था. AAP नेता मनीष सिसौदिया और अमानतुल्ला खान, एआईएमआईएम प्रमुख अकबरुद्दीन ओवैसी और पूर्व विधायक वारिस पठान भी इस याचिका में आरोपी थे. उनके कुछ भाषणों को आपत्तिजनक बताकर कार्रवाई की मांग की गई थी.

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पुलिस अफसरों पर आरोप

सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात ने भी एक याचिका दाखिल की थी. इसमें दंगों के दौरान पुलिसकर्मियों, रैपिड ऐक्शन फोर्स और अन्य सरकारी अफसरों पर दुर्व्यवहार करने और कई अपराधों में शामिल होने के आरोप लगे थे. इन आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग इस याचिका में की गई थी.

फंडिंग की जांच की याचिका

एक याचिका ऐसी थी, जिसमें विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि आंदोलन को फंडिंग कहां से मिल रही है, इसकी जांच एनआई से कराई जाए. ये याचिका अजय गौतम ने दाखिल की थी. 

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