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BJP के ये विधायक सामूहिक विवाह में करेंगे शादी, पीएम मोदी को बताया वजह

विधायक दीपेश साहू का यह फैसला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. विधायक का समर्थन करने वाले लोग उनके इस कदम को एक मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं. इस सामूहिक विवाह का आयोजन बड़े पैमाने पर होने की उम्मीद है.

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बीजेपी विधायक दीपेश साहू सामूहिक विवाह में शादी करेंगे. (फोटो-@DipeshSahuBJP)

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक दीपेश साहू सामूहिक विवाह में शादी करने वाले हैं. 31 मई को सरकार की ओर से आयोजित ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ में दीपेश भी अन्य जोड़ों के साथ शादी के बंधन में बंध जाएंगे. उन्होंने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्रेडिट दिया है.

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दीपेश साल 2023 में तत्कालीन कांग्रेस के विधायक को हराकर विधानसभा पहुंचे थे. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 35 साल के दीपेश भाजपा के टिकट से पहली बार विधायक बने हैं. उन्होंने कहा कि वो अपने इस कदम से सादगी का संदेश देना चाहते हैं. वो भी ऐसे वक्त पर, जब प्रधानमंत्री मोदी खुद सादगी और संयम अपनाने की बात कर रहे हैं.

दीपेश साहू का यह फैसला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. विधायक का समर्थन करने वाले लोग उनके इस कदम को एक मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं. इस सामूहिक विवाह का आयोजन बड़े पैमाने पर होने की उम्मीद है. रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद भी शामिल हो सकते हैं. उनके साथ दोनों उप-मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी शामिल होंगे.

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इनके अलावा विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के साथ कई अन्य वीआईपी लोग शामिल होंगे. अपनी सादगी भरी शादी के बारे में बात करते हुए दीपेश ने कहा कि वो इस वैश्विक संकट के दौर में सामूहिक शादी करके साहू समाज के साथ-साथ अन्य लोगों को भी एक संदेश देना चाहते हैं.

दीपेश साहू को अपने इलाके के जमीनी नेता के तौर पर जाना जाता है. सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तैयारी करने वाले अधिकारियों के मुताबिक, तैयारियां तेजी से चल रही हैं. 31 मई को होने वाला प्रोग्राम हालिया सालों में हुए ऐसे कार्यक्रमों से बड़ा और भव्य बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है.

आज के समय लोग दिखावे के लिए लाखों-करोड़ों रुपये शादियों में खर्च कर देते हैं. ऐसे में कुछ लोगों को ये स्टेटस मेंटेन करने की चक्कर में कर्ज भी लेना पड़ता है. इसलिए सरकार ऐसे सामूहिक विवाह कार्यक्रमों का आयोजन कराती है, जिनमें वो लोग शादी करते हैं, जो शादी के दौरान होने वाले खर्च का भार नहीं उठा सकते हैं.

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