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राज्यसभा का टिकट नहीं मिला तो छगन भुजबल ने NCP को सुना दिया

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और NCP (अजित गुट) के सीनियर नेता छगन भुजबल ने राज्यसभा के लिए नॉमिनेट नहीं किए जाने को लेकर पार्टी पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पार्टी के बाकी नेताओं को तो न्याय मिलता है लेकिन उनके साथ उसी तरह का व्यवहार नहीं किया जाता. भुजबल ने इस फैसले के पीछे बीजेपी का हाथ होने की खबरों को खारिज किया है.

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छगन भुजबल ने NCP के फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं. (इंडिया टुडे)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP)- अजित गुट के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाए जाने को लेकर पार्टी पर सवाल उठाए हैं. साथ ही उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है कि बीजेपी ने उनके भतीजे समीर भुजबल को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल होने से रोक दिया.

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छगन भुजबल 18 जून को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए संभावित दावेदार माना जा रहा था, लेकिन NCP ने राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया है. यह उपचुनाव उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के चलते खाली हुई सीट के लिए हो रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 

राज्यसभा सांसद बनने के इच्छुक भुजबल ने संसद के उच्च सदन में अपने नॉमिनेशन और भतीजे समीर भुजबल को उनकी जगह राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन यह प्रस्ताव NCP नेतृत्व को रास नहीं आया.

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बीजेपी पर लगे आरोपों को खारिज किया

NCP से जुड़े अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, 6 जून को NCP के सीनियर नेताओं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के बीच हुई बैठक में इस मामले पर विस्तार से चर्चा की गई. इस मीटिंग के बाद से खबरें चलीं कि बीजेपी ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया. छगन भुजबल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा, 

जब मैंने बीजेपी के सामने समीर को राज्य में मंत्री बनाने और खुद को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट करने का प्रस्ताव रखा, तो फैसले के लिए सिर्फ एक दिन बचा था. बीजेपी की ओर से जवाब आया कि जब भी राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार होगा, इस पर विचार किया जाएगा. इसलिए ये कहना गलत है कि बीजेपी ने मेरा प्रस्ताव खारिज कर दिया.

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छगन भुजबल ने NCP के दूसरे नेताओं पर उठाए सवाल

पार्टी और सत्ताधारी गठबंधन के दूसरे नेताओं से तुलना करते हुए छगन भुजबल ने कहा कि उन्होंने केवल बराबरी के व्यवहार की मांग की थी. उन्होंने बताया, 

दूसरे कई लोगों को न्याय मिला. कई नेता राज्यसभा और लोकसभा में हैं, जबकि उनके बच्चे यहां मंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं. मैंने भी NCP के गठन में अहम भूमिका निभाई है. इसलिए मैं भी उसी तरह के व्यवहार का हकदार था.

छगन भुजबल ने सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया. लेकिन इससे पहले पार्टी की बैठक में उन्होंने बताया था कि NCP के स्टेट चीफ सुनील तटकरे की बेटी अदिति तटकरे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि अनिकेत तटकरे को 18 जून को होने वाले विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है. उन्होंने पार्टी और गठबंधन के भीतर दूसरे और उदाहरण भी गिनाए. पार्टी के फैसले पर सवाल उठाने के बावजूद छगन भुजबल ने कहा कि वे इस पूरे घटनाक्रम से नाराज नहीं हैं. उन्होंने कहा, 

मैं नाराज नहीं हूं, मैं क्यों नाराज होऊंगा?

जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या उनको लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है तो भुजबल ने अपने अलग अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, 

कैसा अन्याय? आजकल चीजें इसी तरह चलती हैं. अगर आज नहीं तो कल, अगर कल नहीं तो परसों. यही हमारी नीति है. मैं कबड्डी खिलाड़ी हूं, शतरंज खिलाड़ी नहीं.

छगन भुजबल कौन हैं?

छगन भुजबल महाराष्ट्र के सबसे वरिष्ठ ओबीसी नेताओं से में एक हैं. भुजबल ने राजनीति की शुरुआत शिवसेना से की थी. फिर शरद पवार के साथ जुड़े. उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री, पीडब्ल्यूडी और खाद्य और नागरिक आपूर्ति जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली है. भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल की सजा काट चुके 78 साल के भुजबल ने सियासी वापसी के लिए अजित पवार का साथ चुना. उनकी सबसे बड़ी ताकत उत्तरी महाराष्ट्र में उनका ओबीसी जनाधार है, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी उनके साथ खड़ा रहा है.

वीडियो: क्या छगन भुजबल NCP छोड़ने वाले हैं?

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