बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी अभिषेक बंटी ने अपना नाम वापस ले लिया. उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है. अभिषेक ने नॉमिनेशन के एक दिन बाद पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नाम वापस ले लिया. हालांकि उनके इस्तीफे के तार कथित तौर पर चारा घोटाले में उनके परिवार के कनेक्शन से जुड़ा है.
चारा घोटाले से जुड़ा कनेक्शन, बांकीपुर से अभिषेक बंटी का बीजेपी ने टिकट इसलिए काटा?
बीजेपी ने बांकीपुर उपचुनाव में अभिषेक बंटी को टिकट दिया था. अभिषेक ने 9 जुलाई को अपना नॉमिनेशन किया. नॉमिनेशन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे. लेकन नॉमिनेशन के 24 घंटे के भीतर अभिषेक ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया. इस टिकट वापसी का कनेक्शन उनके माता पिता से जुड़ रहा है.


सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी पार्टियों के पास इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स पहुंच गए थे. बीजेपी नेतृत्व ने इसको भांपते हुए अभिषेक बंटी से अपना नाम वापस लेने को कहा और उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा को चुनावी अखाड़े में उतारा. अभिषेक बंटी ने 9 जुलाई को नॉमिनेशन किया था. अगले दिन यानी 10 जुलाई को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उम्मीदवारी से हटने की जानकारी दी. अभिषेक ने बताया कि उन्होंने बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को भी पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दे दी है.
क्या रही असली वजह?
अभिषेक बंटी के नाम वापस लेने की वजह चारा घोटाले से उनके परिवार का कनेक्शन बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, उनके पिता रवीन्द्र प्रसाद और माता चंचला सिन्हा दोनों चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं. बीजेपी को डर था कि प्रशांत किशोर समेत विपक्षी पार्टियां इसको मुद्दा बना सकती हैं, जिससे नैरेटिव की लड़ाई में पार्टी पिछड़ सकती है.
किन किन मामलों में मिली सजा
सीबीआई कोर्ट ने साल 2022 में डोरंडा कोषागार, रांची से 1990-91 से 1995-96 के बीच 182.82 करोड़ रुपये के गबन करने के मामले में लालू यादव समेत 75 लोगों को दोषी माना था. उसमें रवीन्द्र प्रसाद का नाम भी था. उनका नाम सीबीआई की प्रेस रिलीज में मगध केमिकल कॉर्पोरेशन, पटना के तौर पर दर्ज है. उनको इस मामले में 3 साल की सजा सुनाई गई थी.

साहेबगंज कोषागार मामले में माता-पिता दोनों को सजा
सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने साल 2012 में साहेबगंज कोषागार से साल 1991 से 1996 के बीच फर्जी तरीके से 67 लाख, 49 हजार 989 रुपये की निकासी के मामले में 26 लोगों को दोषी ठहराया. इस मामलें में आरोपियों को पांच साल से लेकर एक साल तक के कठोर कारावास और छह लाख रुपये तक का जुर्माना की सजा मिली.
इस मामले में मगध केमिकल कॉर्पोरेशन के मैनेजर रवीन्द्र प्रसाद को दो साल के कठोर कारावास की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया. इसी मामले में मगध केमिकल कॉर्पोरेशन की प्रोपराइटर चंचला सिन्हा को एक साल के कठोर कारावास की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

चाइबासा डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिस मामले में भी सजा
सीबीआई ने 28 अगस्त 1996 को पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक केस दर्ज किया. मामला चाईबासा डिस्ट्रिक्ट ट्रेजरी ऑफिस और एनिमल हसबैंड्री ऑफिस से फर्जी तरीके से लगभग 37 करोड़ 62 लाख रुपये की निकासी का था. ये निकासी साल 1992-93 के बीच फर्जी अलॉटमेंट लेटर, सप्लाई ऑर्डर और फर्जी बिल के आधार पर किए गए. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने साल 2018 में इस मामले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत 50 लोगों को दोषी पाया और उनको सजा सुनाई. इस मामले में चंचला सिन्हा को तीन साल की सजा सुनाई गई और 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया.

इसलिए पार्टी ने लिया फैसला?
बीजेपी के सीनियर नेताओं तक अभिषेक बंटी से जुड़े इन मामलों की जानकारी पहुंच गई थी. जन सुराज से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पार्टी इस मसले पर नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की तैयारी में थी. इसलिए बीजेपी की ओर से अभिषेक बंटी को पीछे हटने को कहा गया और फिर आखिर में नीरज कुमार सिन्हा की लॉटरी लग गई.
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