आकाश आनंद की बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर वापसी हो चुकी है. पार्टी सुप्रीमो मायावती ने भतीजे आकाश को फिर पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया है. 2024 में बसपा से निकाले जाने के बाद ये तीसरा मौका है, जब आकाश आनंद को पार्टी में फिर से शामिल किया गया. अब नजरें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर हैं, जहां उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है. सवाल ये है कि सख्त तेवरों वाली मायावती का दिल आखिर कैसे पिघला? भतीजे की सिर्फ वापसी ही नहीं हुई, बल्कि उन्हें फिर नेशनल कोऑर्डिनेटर की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.
आकाश आनंद की बसपा में वापसी कैसे हुई? मायावती का दिल पिघलने की इनसाइड स्टोरी
BSP में पिछले दिनों मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद के बिछ जो कुछ भी हुआ, उसके बाद सवाल ये है कि सख्त तेवरों वाली मायावती का दिल आखिर कैसे पिघला? भतीजे की सिर्फ वापसी ही नहीं हुई, बल्कि उन्हें फिर नेशनल कोऑर्डिनेटर की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंप दी गई. ये सब सम्भव कैसे हुआ?

हाल के दिनों में यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की उनके आवास पर आकाश आनंद के साथ मुलाकातों का दौर चला. इसके बाद पार्टी में आकाश की वापसी का रास्ता साफ हुआ. लेकिन, इन मुलाकातों में ऐसा क्या हुआ, जो मायावती और आकाश आनंद के बीच खटास कम हुई, और बसपा में सबकुछ फिर ठीक हो गया. चलिए, आकाश आनंद के बसपा में कमबैक की इनसाइड स्टोरी जानते हैं.
मायावती कैसे राजी हुईं?इंडिया टुडे से जुड़े कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा में चल रही उठापठक से जुड़े जानकारों ने बताया कि मुलाकात के दौरान उन तमाम मुद्दों पर बात हुई, जिन्हें लेकर मायावती के मन में सवाल थे. मायावती को सबसे बड़ी खुन्नस आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर है. मायावती की मांग पर अशोक राजनीति से सन्यांस ले चुके हैं. मायावती को इससे तसल्ली नहीं हुई थी. आकाश ने बुआ के सामने खुलकर अपनी बात रखी, और उनकी चिंताओं को दूर किया.
आकाश आनंद ने मायावती के सभी सवालों के जवाब दिए. मायावती को यकीन दिलाया कि बसपा, पार्टी संगठन और बहुजन मूवमेंट ही उनके लिए सर्वोपरि हैं. आकाश ने माफीनामे वाले एक्स पोस्ट में भी मायावती को अपने 'राजनीतिक गुरु' की संज्ञा दी और 'बुआ मां' कहकर संबोधित किया. रिश्तों को अलग रखते हुए पार्टी में फिर से मौका देने की मांग की.
पिता के साथ मायावती से मिले आकाशरविवार, 4 अक्टूबर को आकाश आनंद पिता आनंद कुमार के साथ मायावती के लखनऊ आवास पहुंचे. फिर लंबी बातचीत हुई. अगले दिन मायावती ने आकाश को फिर से नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद पर बहाल कर दिया. आकाश को वापस लाने में मायावती पर पार्टी कैडर के दबाव का भी दावा किया गया. उन्हें भी इस बात का अंदाजा है कि पार्टी में लोग आकाश को अपने बीच देखना चाहते हैं.
मायावती के मैसेजिंग पर भी नजर डालकर देखें तो उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से निकालने के पीछे के कारणों को सबके सामने रखा. समझाने की कोशिश की कि उन्हें कड़े कदम क्यों उठाने पड़े. जब आकाश की तरफ से भी माफी आ गई, वापसी की गुहार लगाई गई, और मुलाकातों में गिले-शिकवे दूर हुए, तो सब पहले जैसा कर दिया गया.
यही वजह रही कि मायावती ने सभी पहलुओं का ध्यान रखते हुए आकाश आनंद को पार्टी में फिर से मौका दिया. पार्टी में फिर से मौका दिए जाने पर आकाश ने भी कहा कि पिछले समय में जो कुछ हुआ, उसने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. उन्होंने कहा कि वे अपने काम के जरिए मायावती का भरोसा बनाए रखेंगे.
यूपी चुनाव पर नजरसूबे में अगले साल चुनाव भी है, और बसपा अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने को बेताब है. 9 अक्टूबर को डॉ. बीआर आंबेडकर जयंती के मौके पर लखनऊ में बसपा की बड़ी जनसभा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जनसभा में आकाश आनंद मंच पर नजर नहीं आएंगे. लेकिन, इसकी तैयारियों में उनकी बड़ी भूमिका रहने का दावा किया जा रहा है.
1 नवंबर को अयोध्या की एक विधानसभा सीट पर आकाश आनंद की एक सभा होने की चर्चा है. यहां जितेंद्र सिंह बबलू के टिकट का ऐलान किया जा सकता है. उनकी वापसी बसपा की नेक्स्ट जेनरेशन लीडरशिप के लिए भी अहम है. जब उन्हें पार्टी से निकाला गया, तो मायावती ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया था. आकाश की वापसी के बाद ये जिम्मेदारी फिर उनके कंधों पर आ गई है. ईशान पार्टी में रहकर काम करते रहेंगे.
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वापसी के बाद लखनऊ में हुई बैठक में बसपा के सीनियर नेताओं ने आकाश आनंद का स्वागत किया. इनमें पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरे सतीश चंद्र मिश्रा और उत्तर प्रदेश यूनिट के प्रमुख विश्वनाथ पाल भी शामिल थे. उन्होंने पार्टी की नीली टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया.
वीडियो: आकाश आनंद ने मायावती पर क्या कह दिया?











