पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 विधायक पाला बदलकर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. कुंवर विजय प्रताप सिंह, चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने मान सरकार पर कई आरोप लगाए. तीनों अब बीजेपी में हैं. इस पर APP का कहना है कि इन तीनों विधायकों को पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में पहले ही निकाला जा चुका था. पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी. इन तीनों में सबसे विवादित नाम सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा का है.
BJP में गए 3 विधायकों पर AAP ने कहा 'रेप के आरोपी, पहले से ही निष्कासित हैं तीनों'
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के तीन बागी नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं. इस पर AAP ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन तीनों को पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से निष्कासित कर दिया गया था.

सनौर विधायक पर रेप, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के गंभीर आरोपों में मामला दर्ज है। इतना ही नहीं, सितंबर 2025 में हरियाणा के करनाल में गिरफ्तारी के दौरान पंजाब पुलिस पर फायरिंग और पथराव के बीच फरार होने का भी आरोप है. इस पर निशाना साधते हुए AAP ने कहा कि, इन गंभीर आरोपों के बावजूद दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके साथ मंच साझा किया और उन्हें औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल कराया.
AAP ने बीजेपी से महिला सुरक्षा पर पूछे सवालआम आदमी पार्टी की ओर से कहा गया कि इस घटनाक्रम ने भाजपा के महिला सुरक्षा और राजनीतिक नैतिकता से जुड़े दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे विधायक के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा करने का फैसला किस आधार पर किया? क्या पार्टी ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की समीक्षा की थी? और अगर की थी, तो सार्वजनिक रूप से उसका आधार बताने में क्या आपत्ति है? चुनाव से पहले भाजपा की इस राजनीतिक भर्ती को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं.
आम आदमी पार्टी की ओर से जारी सूचना में कहा गया, 'इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आम आदमी पार्टी ने पहले ही तीनों दागी नेताओं को पहले ही बाहर कर चुकी थी. पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को AAP ने 29 जून 2025 को ही पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था. जून 2025 में ही चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा को भी पार्टी ने अनुशासनात्मक और जनहित कामों में लापरवाही के चलते कार्रवाई करते हुए साइड लाइन कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था.
AAP की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सबसे गंभीर सवाल पठानमाजरा को लेकर उठ रहा है. सितंबर 2025 में पटियाला में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के आरोपों में एफआईआर दर्ज हुई थी. शिकायत में उनकी वैवाहिक स्थिति और शादी के आश्वासन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। मई 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी थी. अदालत ने पासपोर्ट जमा कराने, पुलिस के सामने उपस्थित होने और शिकायतकर्ता या गवाहों से संपर्क नहीं करने जैसी शर्तें भी लगाई थीं. यह मामला आपराधिक आरोपों से जुड़ा है और जमानत मिलने को दोषमुक्त होने के बराबर नहीं माना जा सकता.
ऐसे में सवाल सिर्फ पठानमाजरा के भाजपा में शामिल होने का नहीं, बल्कि उन्हें सार्वजनिक राजनीतिक मंच पर स्वीकार करने के फैसले का भी है. भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में उन्हें सदस्यता दिलाई गई. महिला सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयान देने वाली भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रेप जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे किसी नेता को पार्टी में शामिल करते समय वह किन मानकों का पालन करती है. क्या भाजपा के लिए रेप जैसा गंभीर अपराध कोई मायने नहीं रखता है। आखिर पार्टी रेप आरोपी के साथ कैसे खड़ी हो सकती है.
उधर, पूर्व मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा के भाजपा में जाने से उनके पुराने राजनीतिक फैसले भी चर्चा में आ गए हैं. जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में मंत्री रहे हैं. लेकिन, उन्हें कैबिनेट से निकाल दिया गया था. अब AAP का कहना है कि उनके सामने यह सवाल है कि सरकार में रहते हुए जिन नीतियों और फैसलों का वह हिस्सा थे, उनसे असहमति का स्वर मंत्री पद से हटने के बाद क्यों तेज हुआ?
कुंवर विजय प्रताप सिंह पर AAP की प्रतिक्रियाकुंवर विजय प्रताप सिंह के मामले में भी कई सवाल हैं. आम आदमी पार्टी ने उन्हें जून 2025 में ही निलंबित कर दिया था. अब भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने AAP में बिताए पांच साल को 'इंटर्नशिप' बताया है. इस बयान पर राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है. पंजाब AAP के नेताओं ने कहा, 'जिस पार्टी के टिकट पर वह अमृतसर नॉर्थ से विधानसभा पहुंचे, उसके साथ बिताए पांच वर्षों को इंटर्नशिप बताने का क्या अर्थ है? क्या उनके हल्के की जनता को भी इस राजनीतिक नजरिए से देखते हैं? कुंवर विजय प्रताप सिंह को अपनी पूर्व पार्टी की आलोचना करने का अधिकार है. लेकिन जहां से उन्होंने राजनीतिक की ए, बी, सी और डी सीखा हो, उसे इंटर्नशिप बता रहे हैं. जिस जनता ने आम आदमी पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर उन पर भरोसा जताया हो. लेकिन सवाल फिर वही खड़ा हो रहा है पांच साल बाद जनता के फैसले की ही आलोचना करना कहा तक सही है?'
आम आदमी पार्टी ने इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है. AAP के पंजाब नेतृत्व का कहना है कि पार्टी ने अपने नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भी आरोप सामने आने पर कार्रवाई की है, जबकि भाजपा गंभीर आरोपों का सामना कर रहे नेताओं को शामिल कर रही है. AAP अपने संगठनात्मक अनुशासन को इस मामले में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रख रही है. पार्टी का कहना है कि उसका संगठन किसी एक नेता के बजाय कार्यकर्ताओं, सामूहिक नेतृत्व और जनता से जुड़े मुद्दों के आधार पर काम करता है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली से जुड़ी योजनाओं को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश करती रही है. सरकारी स्कूलों में सुधार, आम आदमी क्लीनिक और बिजली राहत जैसी योजनाएं उसके शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं. सरकार इन योजनाओं को जनहित से जोड़ती है, जबकि विपक्ष उनके क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर सवाल उठाता रहा है. ऐसे में 2027 का चुनाव केवल नेताओं के पार्टी बदलने का नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज और आगे बढ़ते पंजाब का जनादेश होगा.
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'BJP महिला विरोधी पार्टी है'आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, 'भाजपा ने तीनों दागी नेताओं को शामिल करके पंजाब में अपने खुद को महिला विरोधी, किसान विरोधी और विकास विरोधी की लाइन में खड़ा कर दिया है. लेकिन पठानमाजरा के खिलाफ दर्ज गंभीर मामले और तीनों नेताओं के पिछले राजनीतिक रिकॉर्ड से जुड़े सवाल इस दल-बदल के साथ बने रहेंगे. सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि जिस विधायक पर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं, उसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच पर स्थान देने का फैसला किस आधार पर हुआ? भाजपा को इसका जवाब देना चाहिए. साथ ही तीनों नेताओं को भी स्पष्ट करना होगा कि जिस पार्टी के टिकट पर वे जनता के प्रतिनिधि बने थे, उसे छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के पीछे उनके नीतिगत और राजनीतिक कारण क्या हैं.'
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने दल-बदल की राजनीति, महिला सुरक्षा, पार्टी अनुशासन और नेताओं की सार्वजनिक जवाबदेही को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. आम आदमी पार्टी अपने पहले के अनुशासनात्मक फैसलों और सरकार के कामकाज को सामने रख रही है. हालांकि, किसी भी पार्टी का झंडा बदलने के बाद भी नेताओं का पिछला रिकॉर्ड और उनके खिलाफ उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते.
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