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मुंडका अग्निकांड: पहले 6 बच्चियों को बचाया, फिर तीसरी मंज़िल से कूद गईं ममता

27 मृतकों में से 21 महिलाएं ही थीं.

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13 मई की शाम क़रीब साढे़ चार बजे आग बिल्डिंग की पहली मंजिल से लगनी शुरू हुई. बताया जा रहा है कि फ्लोर पर रखे जनरेटर में आग लगी, जिसके बाद आग फैलने लगी (फोटो - आजतक)

दिल्ली के मुंडका में 13 मई को लगी आग में 27 जिंदगियां खत्म हो गईं. 12 अब भी लापता हैं. आग कैसे लगी, लगी तो क्या हुआ, लोग कैसे बचे, इसकी कहानियां अब बाहर आ रही हैं. ज़्यादातर कहानियां आग लगने और लोगों के जलने की है, लेकिन इसमें कुछ कहानियां ऐसी भी हैं, जिसमें आपदा के वक़्त भी लोगों ने निस्वार्थ साहस दिखाया, और कितने ही लोगों की जान बचा ली. इसी में कहानी सामने आई है 52 साल की एक फ़ैक्ट्री कर्मी की, जिन्होंने 6 बच्चियों को बचाया, फिर तीसरी मंज़िल से कूद गईं.

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6 बच्चियों को बचाया, फिर तीसरी मंज़िल से कूद गईं

ममता देवी. 8 दिन पहले ही फैक्ट्री में नौकरी लगी थी. घर में दो बच्चे हैं. पति विकलांग हैं. चल-फिर नहीं सकते. ममता परिवार में कमाने वाली इकलौती सदस्य हैं. ममता भी आग में फंस गई थी. ममता ने बताया कि,

जब आग लगी तब चारों ओर अफ़रा-तफ़री थी. जान बचाने के लिए लोग दौड़-भाग रहे थे. कमरे में अचानक गर्मी बढ़ी और कुछ लोग बेहोश हो गए. जैसे ही शीशा टूटा, क्रेन मशीन उस खिड़की के पास आ गई.

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ममता ने बताया कि उन्होंने अपनी जान बचाने से पहले बिल्डिंग की फंसी छोटी बच्चियों की जान बचाई. उन्होंने बताया कि

पहले लड़कियों को नीचे उतारा, फिर कमरे में भागकर देखा कि कहीं कोई और बच्ची तो नहीं रह गई है. जब कोई नहीं मिला, तब जाकर ख़ुद निकलने की कोशिश की. लेकिन खुद के लिए रास्ता नहीं दिख रहा था. इसलिए बिल्डिंग से छलांग लगा दी.

बिल्डिगं से कूदने की वजह से ममता के हाथ और पैर में चोट आई है.

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कैसे लगी थी मुंडका में आग?

13 मई की शाम क़रीब साढे़ चार बजे आग बिल्डिंग की पहली मंजिल से लगनी शुरू हुई. बताया जा रहा है कि फ्लोर पर रखे जनरेटर में आग लगी, जिसके बाद आग फैलने लगी. उस समय वहां एक कार्यक्रम चल रहा था. फैक्ट्री के स्टाफ मैनेजर ने बताया कि जिस वक़्त आग लगी, फैक्ट्री मलिक वहीं मौजूद थे. आग भड़कने के काफी देर बाद फायर ब्रिगेड वहां पहुंची, जिस वजह से आग तेजी से फैल गई. ये पूरी बिल्डिंग चार मंजिला थी. इसमें कई ऑफिस और फैक्ट्रियां हैं. आगजनी के वक़्त इमारत में करीब 200 लोग मौजूद थे, जिनमें से ज़्यादातर महिलाएं थीं. 27 मृतकों में से 21 महिलाएं ही थीं. अभी तक पांच की पहचान हो पाई है.


इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक़, ये बिल्डिंग करीब 15 साल पुरानी है. जिस ज़मीन पर ये फैक्ट्री बनी हुई है, वो असल में लाल डोरा की जमीन है. इस ज़मीन पर सिर्फ़ घर बनाने की इजाज़त है, लेकिन यहां लंबे समय से कमर्शियल काम हो रहा है. दिल्ली पुलिस ने दोनों फैक्ट्री मालिकों हरीश गोयल और वरुण गोयल को ग़ैर-इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.

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