पथराव, आगजनी, फायरिंग, हत्या. जिधर देखेंगे उधर जली हुई गाड़ियां, टूटे हुए कांच, बिखरे हुए पत्थर दिखेंगे. और दिखेगी नफरत. एक दूसरे को मारने-काटने की नफरत. ये राजधानी दिल्ली से सिर्फ 80 किलोमीटर दूर पड़ने वाले हरियाणा के नूह का मंजर है. यहां से शुरु हुआ पागलपन बढ़ते-बढ़ते दिल्ली के ठीक बगल में पड़ने वाले गुरुग्राम तक पहुंच गया. इतनी भीषण हिंसा हुई कि एक दिन तो प्रेस भी मामले को ढंग से रिपोर्ट नहीं कर पाई. पुलिस वालों पर गोलियां चल गईं. कोई जान बचाने मंदिर में छिपा तो किसी को मस्जिद में घुस के मार डाला गया.
दी लल्लनटॉप शो: नूह हिंसा पर क्या खट्टर सरकार और पुलिस इन सवालों के जवाब दे पाएंगे?
क्या हरियाणा सरकार मोनू मानेसर को बचाने की कोशिश कर रही है?
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