दिल्ली और आसपास के इलाकों में आप बाहर निकलेंगे तो आसमान पीले रंग का दिखाई देगा. और धुंध सी दिखाई देगी. कुछेक सौ मीटर से आगे की चीज इस धुंध में नहीं दिखाई देगी. हो सकता है कि आपकी आंखें जलने लगें. हो सकता है कि आपको खांसी आने लगे. गला भारी होने लगे. आपको सांस लेने में दिक्कत होने लगे. आपको लगातार एक गंधैली-सी महक आती रहेगी. जैसे कुछ जल-सा रहा हो. ये दिल्ली की हवा की महक है. ये सरकारों की नाकामियों की भी महक है और साथ ही ये महक है हमारी टूट चुकी जिम्मेदारियों की, जिसके तहत हम अपनी हवा नहीं बचा सके. दिल्ली की हवा हलक घोंटने पर आमादा क्यों है, और इसका जिम्मेदार कौन है? आज शो में इस पर बात करेंगे.
दी लल्लनटॉप शो: दिल्ली की हवा हुई जहरीली, सुप्रीम कोर्ट ने किसे कहा "आओ अदालत में"?
इतनी कोशिशों के बाद भी पारली जलाने के मामलों में कमी क्यों नहीं आ रही है?
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