उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है. इसे लागू हुए अभी कुछ ही महीने बीते हैं कि इस एक्ट से जुड़ी खबरें आने लगीं. एक खबर आई है उत्तराखंड हाई कोर्ट से. एक इन्टरफेथ कपल यानी अलग-अलग धर्मों से आने वाले एक प्रेमी जोड़े ने कोर्ट से मदद मांगी है. ये कपल लिव-इन रिलेशनशिप में है, माने वो शादी के बिना एक साथ रह रहे हैं. लड़की के परिवार वालों ने इससे ऐतराज़ जताया. जोड़े का आरोप है कि लड़की के घरवाले उन्हें डरा-धमका रहे हैं. यहां तक आप कह सकते हैं कि ये तो कोई नई बात नहीं है. हमारे यहां इन्टरफेथ कपल के साथ अमूमन यही तो होता है, घरवालों का रोष झेलना पड़ता है, और फिर वो लोग तो ‘कथित सामाजिक सीमाओं’ को लांघकर ‘लिव-इन’ में भी रह रहे हैं. फिर इसमें यूनिफॉर्म सिवल कोड की बात कहां से आई? सबकुछ बतलाते हैं.
सुरक्षा मांगने गए अंतर-धार्मिक जोड़े को यूनिफार्म सिविल कोड का हवाला देकर उत्तराखंड कोर्ट ने क्या आदेश दे दिया?
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक अंतर-धार्मिक जोड़े को इस शर्त पर पुलिस सुरक्षा प्रदान की है कि वे 48 घंटे के भीतर उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता के तहत अपने रिश्ते को पंजीकृत कराएं.
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