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राजस्थान: पुलिसिया पिटाई से युवक की मौत का आरोप, चोरी रोकने के नाम पर उठा ले गई थी

पुलिस ने मारपीट के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

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पुलिस ने मारपीट के आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
राजस्थान के अलवर में कथित रूप से पुलिस की हिरासत में एक युवक की मौत हो गई. अमर सिंह नाम के इस युवक को झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले 43 अन्य लोगों के साथ पूछताछ के लिए थाने लाया गया था. परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने अमर सिंह के साथ काफी मारपीट की जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. उन्होंने कहा कि पुलिस कि पिटाई से उनके बेटे के कान और नाक से खून बहा था, जिसके चलते बाद में उसने दम तोड़ दिया. जवान बेटे की मौत से गुस्साए परिवार वालों ने थाने का घेराव कर न्याय की गुहार लगाई है.

क्या है मामला?

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक स्थानीय थाना पुलिस ने बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए मुहिम चलाई थी. इसके तहत बीती 27 नवंबर की रात को झुग्गी झोपड़ियों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. इस दौरान 40 से ज़्यादा लोगों को पकड़ा गया. इन लोगों में पीड़ित अमर सिंह भी शामिल था. उसका परिवार मध्य प्रदेश से अलवर आकर रह रहा है. आरोप है कि पुलिस परिवार की झुग्गी में घुसी, अमर सिंह को पकड़ा और थाने ले गई. वहां डंडों से उसकी पिटाई शुरू कर दी. परिवार का आरोप है कि पिटाई से अमर के कान से खून आने पर पुलिस उसको छोड़कर आ गई. अगले दिन युवक की तबीयत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन उपचार के दौरान ही उसकी मौत हो गई.

क्या बोला परिवार?

इसके बाद परिजनों ने एनईबी थाने का घेराव किया. उन्होंने अमर की मौत के लिए पुलिसिया मारपीट को जिम्मेदार बताया. परिजनों का कहना है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमर सिंह की बहन दीपा ने बताया कि पुलिस जबरन उसके भाई सहित कई लोगों को पकड़कर थाने ले गई. दीपा का कहना है,
हम लोग मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले हैं. यहां हम कबाड़ बीनने का काम करते हैं. और पिछले 10 साल से यहीं रह रहे हैं. मेरे भाई ने किसी तरह की कोई चोरी नहीं की थी.
पुलिस का क्या कहना है? पुलिस ने युवक से मारपीट के आरोपों को सिरे से नकार दिया है. एनईबी थानाधिकारी सुरेश कुमार ने बताया,
हमने शहर में बढ़ती चोरियों की घटनाओं के बाद दूसरे राज्यों से आए लोगों का सत्यापन करने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया. इसमें 43 लोगों को हिरासत में लिया गया और सत्यापन करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था. पुलिस ने किसी के साथ मारपीट नहीं की है.
थानाधिकारी का कहना है कि मृतक की मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ जाए, फिर आगे जांच की जाएगी. उन्होंने पुलिस पर लगे मारपीट के सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया.

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