कांवड़ यात्रा से संबंधित उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश विवादों में घिरे हुए हैं. जो फ़ैसला मुजफ़्फ़रनगर पुलिस के निर्देश से शुरू हुआ था, उसे सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे राज्य में लागू करने का फ़ैसला किया है. अब कांवड़ यात्रा के रास्तों पर जितनी भी खाने-पीने की दुकानें, ढाबे और ठेले होंगे, उन पर उनके मालिकों का नाम लिखा होना चाहिए. सपा और कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल तो इस फ़ैसले की आलोचना कर ही रहे हैं, कुछ दुकानदार भी इस फ़ैसले से व्यथित हैं.
कांवड़ यात्रा वाले आदेश पर शाकाहारी ढाबे के हिंदू स्टाफ ने क्या खतरा बताया? मालिक मुसलमान है
ढाबे के मालिक का नाम बाबू है. आधार कार्ड पर भी केवल बाबू ही है. लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट और बोर्ड पर ‘ख़़ान’ लिखने के लिए 'मजबूर' किया.


जैसे मुज़फ़्फ़रनगर से आगे खतौली क़स्बे में पड़ने वाले ‘बाबू जी ढाबा’ का केस है. इस ढाबे के मालिक एक मुसलमान हैं और पूरा स्टाफ़ हिंदू.
इंडिया टुडे के इनपुट्स के मुताबिक़, ढाबे के मालिक का नाम बाबू है. आधार कार्ड पर भी केवल ‘बाबू’ ही है. लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट और बोर्ड पर ‘ख़ान’ लिखने के लिए 'मजबूर' किया.
ये भी पढ़ें- "समाज तोड़ने..."- कांवड़ यात्रा वाले आदेश पर मुश्किल में BJP? अपनों ने ही सवाल उठा दिए हैं
आकाश शर्मा नाम के एक स्टाफ़ मेंबर ने मीडिया को बताया कि पहले पुलिस ने उन्हें ढाबे के नाम से ‘जी’ हटाने के लिए कहा. जब बोर्ड पर 'बाबू ढाबा' बचा, तो दरवाज़े के पास ‘ख़ान’ लिखने के लिए कहा. स्टाफ़ का कहना है कि जब कांवड़ यात्रा और कांवड़िये आने लगेंगे, तो वो उनके यहां जाने से हिचकेंगे. उन्होंने अपनी सुरक्षा का भी जोख़िम बताया. कहा,
“अगर वो आ गए और उन्हें खाने के बाद 'ख़ान' दिख गया, तो वो हमें पीट भी सकते हैं. हम हिंदू हैं, लेकिन बवाल हुआ तो हम भी सुरक्षित नहीं रहेंगे.”
जानकारी: ढाबा ‘शुद्ध शाकाहारी’ है.
विपक्ष तो विपक्ष, ख़ुद NDA के कई नेताओं और पार्टियों ने इस फ़ैसले की आलोचना की है. JDU के नेता केसी त्यागी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई ऐसी जगहें हैं, जहां 30 से 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. वो कांवड़ बनाने और कांवड़ियों के लिए खाने की व्यवस्था करते हैं. ऐसा कोई मेसेज नहीं जाना चाहिए, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो. वहीं, RLD के प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था चौकन्ना होनी चाहिए, मगर ऐसा करने की ज़रूरत नहीं. BJP के नेता और नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री रहे मुख़्तार अब्बास नकवी ने भी इस आदेश की कड़ी निंदा की थी, हालांकि बाद में पलट गए.
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक फूड सिक्योरिटी एंड सेफ्टी एक्ट 2006 के तहत सभी खाने-पीने वाली दुकानों, ढाबों या प्रतिष्ठान पर प्रोपराइटर का नाम लिखा होना चाहिए. उसके मालिक, फर्म का नाम और लाइसेंस नंबर लिखने के भी नियम हैं. रिपोर्ट के मुताबिक ये नियम यूपीए के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के समय में बनाया गया था. आज सीएम योगी की मुख्य सचिव के साथ हुई मीटिंग में इसी अधिनियम का हवाला दिया गया. इसे आधार बनाकर योगी सरकार ने नाम वाला निर्देश पूरे प्रदेश में लागू कर दिया.
वीडियो: UP में BJP की हार, इंटरनल रिपोर्ट से अब ये खुलासा हुआ




















