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लेंसकार्ट में तिलक-बिंदी पर रोक लेकिन हिजाब की छूट, बवाल मचा तो पीयूष बंसल ने दी सफाई

Lenskart Policy Guidelines Controversy: लेंसकार्ट कंपनी की गाइडलाइन्स को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल हो रहा है. लोगों ने बताया कि कंपनी में हिजाब अलाउड है लेकिन बिंदी और तिलक पर रोक है. इसपर कंपनी के को-फाउंडर पीयूष बंसल ने सफाई दी है.

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लेंसकार्ट के मालिक पीयूष बंसल ने गाइडबुक पर सफाई पेश की. (फोटो-इंडिया टुडे)

लेंसकार्ट आईवियर कंपनी की गाइडलाइन्स को लेकर कॉन्ट्रोवर्सी (Lenskart Controversy) छिड़ गई है. लोगों ने जब कंपनी की गाइडलाइन्स खंगाली तो उन्हें कुछ ऐसी चीजें मिलीं, जिस पर बवाल मच गया. जैसे कि कंपनी में हिजाब अलाउड है लेकिन बिंदी और तिलक पर रोक है. ऐसे ही 27 पन्नों की गाइड बुक में तमाम ऐसे नियम हैं, जिनपर आपत्ति जताई गई. इसपर कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने सफाई भी दी है. 

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लोगों ने X पर गाइडबुक से छांट-छांट कर आपत्तिजनक नियमों का स्क्रीनशॉट लिया और पोस्ट किया. इन तस्वीरों को लेंसकार्ट स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड का हिस्सा बताया जा रहा है. 15 अप्रैल को शेफाली वैद्या नाम की यूजर ने पोस्ट कर लिखा, 

‘मैं इन नियमों को कंफर्म कर रही हूं. पीयूष बंसल अपने वर्कर्स को यही बताते हैं कि हिजाब ओके है. लेकिन बिंदी, तिलक या कलावा ओके नहीं है. ये ऐसी कंपनी है जो हिंदू बहुल देश भारत में है. जिसके अधिकतर वर्कर्स और कस्टमर हिंदू हैं. आप इस पर क्या कहेंगे? ये नियम लेंसकार्ट स्टाइल गाइड के पेज नंबर 11 में लिखा है.’

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SCREENSHOT
लेंसकार्ट के गाइडबुक में दिए गए नियम.

इसी फोटो को शेयर करते हुए एक और यूज़र ने लिखा, 

‘क्या सच में ये हिंदू बहुसंख्यक या सेक्युलर देश है? हिंदुओं के साथ भेदभाव किया जाता है. और, अल्पसंख्यक मुसलमानों को वर्क प्लेस में अपनी धार्मिक पहचान का पालन करने की इजाजत दी जाती है. लेंसकार्ट, ये रवैया हिंदू संस्कृति और परंपराओं को टारगेट कर रहा है.’

जब ये पोस्ट वायरल हुए तो कंपनी के को-फॉउंडर पीयूष बंसल ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि ये गाइडबुक पुरानी है और कंपनी की HR पॉलिसी को सही तरीके से पेश नहीं करती है. उनका कहना है कि ये डॉक्यूमेंट इंटरनल ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 

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'मैंने देखा है कि लेंसकार्ट का गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है. मैं बताना चाहता हूं कि ये डॉक्यूमेंट हमारे वर्तमान दिशा-निर्देशों को नहीं दिखाता. हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है. इसमें बिंदी और तिलक भी शामिल हैं. हम नियमित रूप से अपने दिशा-निर्देशों को रिव्यू करते रहते हैं. 

हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी समय के साथ विकसित हुई है. इसके पुराने नियम आज हमारी पहचान को सही ढंग से नहीं दिखाते हैं. आपको जो कंफ्यूजन हुआ, उसके लिए हम माफी चाहते हैं.'

लेकिन इस सफाई के बावजूद भी बहस नहीं रुकी. लोगों ने दावा किया कि ये गाइड बुक फरवरी 2026 में आई है. यानी केवल दो महीने ही पुरानी है. लोगों ने कहा कि नए हो या पुराने गाइडलाइन्स में ऐसे नियम समाज के लिए ठीक नहीं हैं. हालांकि, पीयूष बंसल के जवाब से कई यूजर्स संतुष्ट नहीं है. कुछ लोगों ने उनसे पलटकर सवाल भी किया और नए नियमों की मांग की है.

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