उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शिक्षा विभाग के एक चपरासी ने ऐसा घोटाला किया कि अधिकारियों के होश उड़ गए. पहले तो उसने बड़े अधिकारियों से पहचान बनाई. जब पहचान बन गई तो उसने अपनी पत्नी को फर्जी टीचर बनाकर, उसके नाम पर सैलरी भी भेजने लगा, वो भी करोड़ों में. इसके बाद 53 खातों में इतने पैसे भेज दिए कि बैंक को ही शक हो गया. अंत में महोदय धर लिए गए.
यूपी का करोड़पति चपरासी, बीवी को बनाया फर्जी टीचर, फिर भेजी करोड़ों रुपये सैलरी, खरीदीं प्रॉपर्टी
पीलीभीत के DIOS ऑफिस में एक चपरासी है इल्हाम उर्र रहमान शम्सी. इल्हाम पर आरोप है कि उसने ट्रेजरी में पड़े सरकारी पैसों का गबन किया. आरोप है कि उसने 53 संदिग्ध बैंक अकाउंट्स में 5 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर कर दिए.


पीलीभीत के डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स (DIOS) ऑफिस के इस चपरासी का नाम है इल्हाम उर्र रहमान शम्सी. अपने एरिया में ‘बाबू’ नाम से मशहूर है. इल्हाम पर आरोप है कि उसने ट्रेजरी में पड़े सरकारी पैसों का गबन किया. आरोप है कि उसने 53 संदिग्ध बैंक अकाउंट्स में 5 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर कर दिए. इल्हाम शम्सी ने फर्जी तरीके से सैलरी फंड में गलत बेनिफिशियरी यानी लाभार्थियों के नाम जोड़े.
उसने अपनी तीन बीवियों में से एक को बेनिफिशियरी बना दिया. यानी उसने रिकॉर्ड में ये दिखाया कि उसकी बीवी टीचर है. जबकि उसने किसी और की जगह अपनी का अकाउंट नंबर डाल दिया. लिहाजा, रकम उसकी बीवी के खाते में आई. कुल मिला कर उसकी पत्नी के खाते में 1 करोड़, 1 लाख, 95 हजार 135 रुपये आए. इसके अलावा उसने कई बिल्डर्स को भी पैसे भेजे जिसकी जांच चल रही है.
ये पूरा मामला तब सामने आया, जब इल्हाम के पत्नी के अकाउंट में हो रहे मोटे ट्रांजैक्शंस पर बैंक वालों की नजर पड़ी. बताया जाता है कि इल्हाम जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर बीसलपुर में जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर तैनात था. साल 2014 में उसने DIOS के ऑफिस में पोस्टिंग करवा ली. धीरे-धीरे सारे अधिकारी उसे जानने लगे. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक वो कई अधिकारियों का करीबी था. इसीलिए वो सारी मीटिंग्स में भी जाया करता था. और इसी दौरान उसने अपना खेल शुरू कर दिया.
उसने DIOS ऑफिस से पैसों का गबन शुरू कर दिया. इसी बीच बैंक वालों की नजर उसके ट्रांजैक्शंस पर पड़ी, फिर पता लगा कि DIOS ऑफिस से सबसे बड़ा पेमेंट इल्हाम की पत्नी अर्शी खातून को गया. अर्शी के अलावा इल्हाम की दो और पत्नियां हैं. इतने बड़े ट्रांजैक्शंस की वजह से उस पर शक हुआ तो बैंक ने डीएम ज्ञानेंद्र सिंह को इसकी जानकारी दी. मामला डीएम की नजर में आते ही वो पकड़ा गया.
फिलहाल मौजूदा DIOS राजीव कुमार ने इस मामले में जिला अधिकारी के आदेश के बाद FIR कराई है. उन्होंने कहा कि इल्हाम शम्सी नाम का कर्मचारी साल 2014 से यहां काम कर रहा था, उसने घोटाला किया है, जिसकी एफआईआर दर्ज करा दी है. इस मामले में जांच चल रही है. घोटाला कैसे हुआ, कितने का हुआ, ये सब जांच में आ जाएगा.
अब इस मामले में डिपार्टमेंट्स का नाम आया. एक तो DIOS और दूसरा ट्रेजरी डिपार्टमेंट. DIOS ने एफआईआर करवा दी. लेकिन सवाल ट्रेजरी डिपार्टमेंट पर भी उठने लगे कि उनके यहां से इतनी रकम कैसे निकाली गई. इसका जवाब देते हुए वरिष्ठ कोषाधिकारी संजय यादव ने बताया,
‘इसका ट्रेजरी डिपार्टमेंट से कोई लेना-देना नहीं है. हमारे यहां सिर्फ बिल को प्रोसेस किया जाता है. ट्रेजरी के पास ऐसा कोई टूल नहीं है जिससे ये पता लगे कि जिसका नाम भेजा गया है, उसके साथ बैंक अकाउंट भी उसी का है. मेरे पास कुछ समय के लिए ट्रेजरी के साथ DIOS का अतिरिक्त चार्ज भी था. मेरे पास पूरे जिले का काम था. हो सकता है उस समय कोई चूक हुई हो.’

मामले की जांच कर रही पीलीभीत पुलिस ने कई खुलासे किए हैं. एसपी पीलीभीत सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपी इल्हाम ने अपनी पत्नी के खाते में एक करोड़ भेज दिए. उन्होंने जानकारी दी कि फरवरी में मामला सामने आने के बाद इल्हाम को कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी. लेकिन अब समय पूरा होने पर उसने सरेंडर कर दिया है. एसपी ने कहा, 'DIOS ने एक केस दर्ज कराया था. इसमें उनके ही एक कर्मचारी इल्हाम शम्सी पर 1 करोड़ से अधिक का गबन करने का आरोप है. जांच के दौरान अभी तक करीब 50 से ज्यादा खाते सामने आए हैं. इन खातों में 5 करोड़ 28 लाख रुपए के आसपास का अमाउंट गलत तरीके से बेनिफिशियरी ऐड करके गबन किया गया. उस अमाउंट को फ्रीज करा दिया गया है. इसके अलावा और भी खाते हैं, जिनमें पैसा गया. वहां से दूसरों के खाते में गया है. जिन प्रापर्टी को खरीदने में पैसे का इस्तेमाल हुआ, वहां भी कार्रवाई हो रही है.’
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