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ताइवान पहुंचने वाली हैं नैंसी पेलोसी, चीन-अमेरिका की जुबानी भिड़ंत तय

चीन कह चुका है कि अगर नैंसी पेलोसी ताइवान जाती हैं तो अमेरिका इसकी कीमत चुकाएगा.

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ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच क्या विवाद है? (फोटो-AP)

ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है. अमेरिकी संसद की एक बड़ी पदाधिकारी नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा की बात सुनकर चीन बौखलाया हुआ है. नैंसी अमेरिकी संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव’ की स्पीकर हैं. चीन ने कहा है कि अगर नैंसी पेलोसी ताइवान जाती हैं तो अमेरिका इसकी कीमत चुकाएगा. खबर ये भी है कि नैंसी पेलोसी किसी भी वक्त ताइवान पहुंच सकती हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 

‘अगर नैंसी ताइवान जाती हैं तो उसकी ज़िम्मेदारी अमेरिकी पक्ष की होगी और अमेरिका चीन की संप्रभुता और सुरक्षा हितों को कम आंकने की कीमत चुकाएगा.'

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वॉल स्ट्रीट जनरल ने सोमवार 1 अगस्त की अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि नैंसी पेलोसी ने अपने दक्षिण एशिया दौरे की शुरुआत करते हुए सिंगापुर पहुंचकर वहां के नेताओं से मुलाकात की. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि आगे के दौरे के तहत पेलोसी की ताइवान के सरकारी अधिकारियों के साथ बैठकें होनी हैं.  

वहीं व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है, 

'नैंसी को पूरा हक है कि वो ताइवान की यात्रा करें, क्योंकि वो एक आज़ाद मुल्क है. अगर चीन इस मामले में हमको धमकी देता है तो ऐसे में चीन का कोई भी गलत कदम उसको मुश्किल में डाल सकता है.'

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ताइवान ने क्या कहा?

ताइवान के प्रधानमंत्री सु त्सेंग चांग ने पेलोसी की यात्रा से पहले कहा कि उनका देश विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है. चांग ने ये भी कहा कि ताइवान ऐसे मेहमानों के लिए सबसे बेहतर उपाय करेगा और उनकी योजना का सम्मान करेगा.  

ताइवान को लेकर दोनों देश के बीच क्या विवाद है?

पहले बात करते हैं चीन की. वो मानता है कि ताइवान उसका ही एक प्रांत है. चीन उसे वापस अपना हिस्सा बनाने की मंशा रखता है. दूसरी ओर ताइवान ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क मानता है. उसका अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है. ताइवान चीन के दक्षिण पूर्वी तट की तरफ बसा एक द्वीप है. उसके साथ वहां कई और देश हैं जिनके लिए कहा जाता है कि उन्हें अमेरिका का समर्थन हासिल है. ऐसे में अमेरिका की विदेश नीति के लिहाज़ से ये काफ़ी अहम हो जाता है. जानकारों के मुताबिक अगर चीन ताइवान पर क़ब्ज़ा कर लेता है तो अमेरिका इन देशों पर अपना दबदबा नहीं रख पाएगा.

इससे पहले पिछले हफ्ते गुरुवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जो बाइडेन के बीच कुल दो घंटे 17 मिनट बातचीत हुई थी. इस दौरान ताइवान विवाद की तरफ इशारा करते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि जो आग से खेलेगा, वो जल जाएगा.

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