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कहानी पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री की, जो मोदी का पैर छूकर ट्रेंड करने लगे

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद मरापे को वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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जेम्स मरापे (फोटो- रॉयटर्स/वीडियो स्क्रीनशॉट)

21 मई की शाम एक तस्वीर वायरल हुई. तस्वीर आई प्रशांत महासागर के आइलैंड पर बसे एक छोटे से देश पापुआ न्यू गिनी (PNG) से. तस्वीर में पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे (James Marape) अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के पैर छू रहे हैं. पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री इस देश के दौरे पर गया है. राजधानी पोर्ट मोरेस्बी एयरपोर्ट पर PNG के प्रधानमंत्री मरापे ने पीएम मोदी को पहले गले लगाया, फिर मोदी के पैर छू लिये. इस पर मोदी ने उनकी पीठ को थपथपाकर फिर से गले लगा लिया.

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पीएम नरेंद्र मोदी 22 मई को फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आईलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के तीसरे समिट में हिस्सा लेंगे. इस समिट में पैसिफिक आइलैंड के 14 देश हिस्सा लेने वाले हैं. मोदी, पापुआ न्यू गिनी के पीएम जेम्स मरापे के साथ इस सम्मेलन की संयुक्त रूप से मेजबानी करेंगे. इसके अलावा वे मरापे के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करने वाले हैं.

कौन हैं जेम्स मरापे?

जेम्स मरापे साल 2019 से देश के प्रधानमंत्री हैं. पिछले साल चुनाव जीतने के बाद दोबारा पीएम चुने गए थे. मरापे देश की पांगु पार्टी के नेता हैं. साल 2007 से ही लगातार सांसद रहे हैं. प्रधानमंत्री बनने से पहले सात साल तक देश के वित्त मंत्री रहे. मरापे देश के सबसे बड़े आदिवासी समुदाय 'हुली' से आते हैं. राजनीति में आने से पहले सरकारी अधिकारी थे.

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52 साल के मरापे ने पहली बार 2002 में संसदीय चुनाव लड़ा था, लेकिन भारी हिंसा के कारण उनके इलाके में चुनाव ही रद्द हो गया था. जब उपचुनाव हुआ तो मरापे हार गए. 2007 में पहली बार नेशनल अलायंस पार्टी से सांसद बने थे. 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री सर माइकल सोमारे की सरकार में शिक्षा मंत्री बने थे. तब मरापे सिर्फ 37 साल के थे. तीन साल बाद उन्हें पद से हटा दिया गया. मरापे ने पार्टी बदल ली. पीपल्स नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गए. 2012 के चुनाव के बाद पीटर ओ नील की सरकार में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया था.

वित्त मंत्री रहते हुए ही मरापे के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. देश की एंटी करप्शन बॉडी ने प्रधानमंत्री और मरापे के खिलाफ  गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया था. इसके बाद अप्रैल 2019 में मरापे को वित्त मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. बाद में प्रधानमंत्री ने भी इस्तीफा दिया. मरापे ने पीपल्स नेशनल कांग्रेस पार्टी भी छोड़ दी और पांगु पार्टी में शामिल हो गए. इस्तीफे के दौरान मरापे ने कहा था, 

"हमारे पास एक ऐसी सरकार है जो बड़े कॉरपोरेट के हितों को बचाना चाहती है." 

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एक महीने बाद ही, सांसदों का समर्थन हासिल कर मरापे प्रधानमंत्री बन गए. विपक्ष के पास अविश्वास प्रस्ताव के लिए संख्याबल नहीं था. प्रधानमंत्री के बाद मरापे ने कहा था कि वे 10 साल में पापुआ न्यू गिनी को ‘दुनिया का सबसे अमीर काले ईसाइयों का देश’ बनाएंगे.

पिछले साल संसदीय चुनाव में मरापे की पार्टी ने 36 सीटें जीती थी. छोटी पार्टियों और निर्दलीय सांसदों के समर्थन से गठबंधन सरकार बनी. संसद में मरापे निर्विरोध प्रधानमंत्री चुन लिए गए.

ऑस्ट्रेलिया के उत्तर में बसा पापुआ न्यू गिनी भाषाई आधार पर काफी विविधता वाला देश है. यहां 800 से ज्यादा स्थानीय भाषाएं बोली जाती हैं.  संस्कृति और भाषा की विविधता एक तरफ है, देश का पिछड़ापन एक तरफ. पापुआ न्यू गिनी की गिनती दुनिया के पिछड़े देशों में होती है. चीन का इस देश में काफी प्रभाव है. पिछले कुछ समय से चीन ने यहां काफी निवेश किया है. इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा अहम माना जा रहा है.

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