The Lallantop

जब मिराज 2000 ने कारगिल की लड़ाई में पाकिस्तान की खटिया खड़ी कर दी थी

इज़रायल का दिमाग, भारत का जुगाड़, पाकिस्तान का बिगाड़.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
कारगिल युद्ध पाकिस्तान की वादाखिलाफी का नतीजा था. उसने वादा तोड़ कर ठंड के दिनों में अपनी फौज पहाड़ों पर चढ़ा दी थी. फिर हमारी फौज ने उन्हें वापस ठेला था, बिना LOC पार किए. इतना सब जानते हैं. लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि इस लड़ाई में एक बहुत बड़ी जीत हमें बड़ी देर से मिलती अगर इज़रायल ने तब हमारी मदद न की होती. वही इज़रायल जिसे जादू की झप्पी देने प्रधानमंत्री मोदी इज़रायल गए हुए हैं.
पाकिस्तान का प्लान
कारगिल युद्ध में पाकिस्तान का प्लान था कि श्रीनगर-लेह हाइवे को गोलाबारी कर के बंद कर दिया जाए. ये हाइवे कारगिल से गुज़रता है और यहां के टाइगर हिल से इसके एक बड़े हिस्से पर नज़र रखी जा सकती है, ज़रूरत पड़ने पर आर्टिलरी गन से फायर भी किया जा सकता है. तो पाकिस्तान ठंड के दिनों में चुपके से कारगिल हिल पर चढ़ कर बैठ गया और वहां अपनी नॉर्दन लाइट इंफेंट्री का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बना लिया. इस कमांड सेंटर के चलते भारतीय फौज की सप्लाई कोर के ट्रक जब भी कारगिल से गुज़रने को होते, पाकिस्तान उनपर लगभग अचूक निशाना लगा देता. पाकिस्तान का प्लान था कि लेह को श्रीनगर से काट दिया जाए.
 
श्रीनगर लेह हाइवे
श्रीनगर लेह हाइवे

 
हमारे पास बम थे, लेकिन चलाना संभव नहीं था
टाइगर हिल की उंचाई बहुत थी, तो उस पर नीचे से हमला बेअसर रहने वाला था. तो एयरफोर्स से मदद मांगी गई. एयरफोर्स को कारगिल पर बने बंकर उड़ाने के लिए जो लेज़र गाइडेड बम चाहिए थे (मात्रा एलजीबी), वो उनके पास मौजूद थे. लेकिन एक पेच था. ये सभी बम (कुल साठ) पाकिस्तान में एक खास टार्गेट के लिए चुन कर रखे गए थे (मसलन कोई पुल या रेल लाइन). तो एयरफोर्स इन्हें कारगिल में नहीं चलाना चाहती थी. इससे लड़ाई बढ़ने पर भारत की तैयारी पर असर पड़ता.
 
टाइगर हिल
टाइगर हिल

 
तब इज़रायल मदद को आगे आया
मुश्किल के इस दौर में इज़रायल को याद किया गया. भारत ने इज़रायल से लाइटनिंग इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टार्गेटिंग पॉड्स खरीदने के लिए 1997 में डील की थी. इन पॉड्स की खासियत ये थी कि इनमें लेज़र डेज़िग्नेटर के अलावा एक तगड़ा कैमरा भी लगा था जो टार्गेट की तस्वीर दिखाता था. इनसे काम बन सकता था. लेकिन कारगिल युद्ध छिड़ने तक इनकी डिलिवरी का समय नहीं आया था. बावजूद इसके इज़रायल ने अपने इंजीनियर भेजे जिन्होंने इंडियन एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट सिस्टम टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट के साथ मिल कर ये पॉड्स एयरफोर्स के मिराज फाइटर जेट में लगाए.
लेकिन चलाने के लिए बम फिर भी नहीं था
टार्गेटिंग पॉड्स का इंतज़ाम होने के बाद सवाल उठा कि बम कौनसा चलाया जाए? इज़रायल के पॉड्स के साथ Paveway-II LGB बम इस्तेमाल होने थे. इनके आधे स्पेयर पार्ट अमरीका से आने थे, और आधे ब्रिटेन से. लेकिन 1998 में भारत ने न्यूक्लियर बम टेस्ट किए थे और इस वजह से हथियारों के इंपोर्ट पर बैन लगा हुआ था. तो एयरफोर्स ने तय किया कि उनकी जगह देसी बम चलाया जाए. देसी माने एयरफोर्स का पारंपरिक 1000 पाउंड का बम. तो एयरफोर्स ने फ्रांस में बने फाइटर जेट पर इज़रायल में बना टार्गेटिंग पॉड लगा कर उसमें एक देसी बम चलाने का प्लान बनाया.
 
भारतीय वायुसेना का मिराज - 2000
भारतीय वायुसेना का मिराज - 2000

 
इस कॉन्फिगरेशन के साथ इन फाइटर जेट्स को कभी टेस्ट नहीं किया गया था. 30 हज़ार फीट की उंचाई पर जाकर इज़रायली पॉड का सॉफ्टवेयर बंद पड़ जाता था, क्योंकि उसमें एक बग था. लेकिन एयरफोर्स ने रिस्क लिया और 24 जून की सुबह दो मिराज-2000 फाइटर जेट टाइगर हिल की ओर बढ़े. टाइगर हिल से 7 किलोमीटर दूर से पहले जेट ने जुगाड़ वाला बम चला दिया, वो जुगाड़, जो उस दिन से पहले कभी आज़माया नहीं गया था. लेकिन बम टाइगर हिल पर बने दुश्मन के बंकर पर लगा, तो वहां सिर्फ एक पाकिस्तानी फौजी ज़िंदा बचा. बम का वार अचूक था.
इस हमले को देखने पीछे वाले जेट में तब के एयर चीफ मार्शल ए वाय टिपनिस खुद बैठे थे. जो उन्होंने देखा, उसकी फुटेज आज भी यूट्यूब पर मौजूद है. 25 जून को ये फुटेज दिल्ली में रिलीज़ की गई. इसी दिन टाइगर हिल पर पाकिस्तानी ठिकानों पर दोबारा हमला किया गया.
टाइगर हिल पर हमले की फुटेजः

 
इस हमले में पाकिस्तान आर्मी का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर तबाह हो गया और कारगिल पर दोबारा अपना कबज़ा करने में आर्मी को काफी सहूलियत हो गई. कार्गिल युद्ध में टाइगर हिल पर कब्ज़ा टर्निंग पॉइंट कहा जा सकता है. इसके बाद पाकिस्तान की फौज पीछे ही पीछे हटती गई.
तो इस तरह इज़रायल के दिमाग और इंडियन एयरफोर्स के जुगाड़ ने इज़रायल-हिंदुस्तान की दोस्ती का वो चैप्टर लिखा जो हमेशा याद रखा जाएगा. कारगिल से पहले भी इज़रायल भारत की मदद करता रहा है. लेकिन ये बात ज़ाहिर नहीं की जाती थी. एक छोटी सी लिस्ट हम यहां दे रहे हैंः
#1. 1962 में जब चीन ने भारत पर चढ़ाई कर दी थी तब भारत के पास गोला-बारूद की बड़ी कमी थी. तब इज़रायल ने 81mm और 120mm मोर्टार और गन देकर हमारी मदद की थी.
#2. हम चीन से लड़ाई जीत नहीं पाए लेकिन इज़रायल की मदद को याद रखा गया. 1967 में इज़रायल और उसके सभी अरब पड़ोसियों के बीच लड़ाई छिड़ गई. एक तरफ छुटकू इज़रायल और दूसरी तरफ 5 देशों की फौज जिन्हें 7 और देशों से मदद मिल रही थी. तब भारत इज़रायल की मदद के लिए आगे आया और हथियारों के स्पेयर पार्ट इज़रायल भेजे.
#3. इसके 4 साल बाद जब भारत पाकिस्तान में फिर लड़ाई छिड़ गई तब इज़रायल ने भारत की मदद के लिए नया जुगाड़ निकाला. तब पाकिस्तान ने वहां अपने फाइटर प्लेन (F-86 सेबर) मेंटेनेंस के लिए भेजे थे. इज़रायल ने इनकी डिलिवरी में देर कर दी.


ये भी पढ़ेंः
PM मोदी इज़रायल क्यों गए, जानिए वो बात जो गूगल भी नहीं बताएगा

राख से निकल आया था इज़रायल, खून से लिखी अपनी कहानी

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

वो 6 चीजें जो प्रधानमंत्री मोदी को इज़रायल से भारत लानी चाहिए

विश्व की सबसे फौलादी टीचर जिसने म्यूनिख़ के क़ातिलों को चुन-चुन कर मारा

Advertisement
Advertisement