अमेरिकी राजनीति (US Politics) में ‘तालिबान’ (Taliban) घुस गया है. 'तालिबान 20', एक ऐसा ग्रुप जिसने अमेरिकी राजनीति को फंसा लिया है. बंधक बना लिया है. ये ग्रुप (Taliban 20) रिपब्लिकन पार्टी के बागी सदस्यों का है, जो पार्टी के केविन मेक्कार्थी (Kevin McCarthy) को US हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स का स्पीकर बनने से रोक रहा है. अब संसद में कोई स्पीकर नहीं है, तो सदन कोई भी ज़रूरी काम नहीं कर पा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की नीतियों से जुड़े मसले और क़ानून पारित करने की दिशा में कोई काम नहीं हो पा रहा है. रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सांसदों ने ही इन बागियों को 'तालिबान-20' नाम दिया है.
क्या है ये 'तालिबान-20', जिसने अमेरिका की राजनीति पर 'कब्जा' कर लिया है?
अमेरिका की संसद में काम नहीं हो पा रहा है.


समूह में 19 से 21 सदस्य हैं. सभी कांग्रेस के निचले सदन यानी हाउस फ्रीडम कॉकस के सदस्य हैं. ज़्यादातर दक्षिणी अमेरिका से चुनकर आए हैं. ख़ासकर टेक्सस, फ़्लोरिडा और एरिजोना से. इस ग्रुप को राइट-विंग कंज़र्वेटिव रिपब्लिकन पार्टी का भी सबसे कट्टरपंथी धड़ा माना जाता है.
सारे ही डोनाल्ड ट्रम्प के ख़ास हैं. उन ज़िलों से हैं, जहां 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में एकमुश्त मतदान हुआ था. बीते नवंबर के मिड-टर्म चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इनको समर्थन भी दिया था. ट्रंप ने इन चुनावों में कुल 144 उम्मीदवारों को समर्थन किया था, लेकिन पार्टी ने केवल कुछ को ही टिकट दिया था. और ट्रंप की तरह ही इस ग्रुप के आधे लोग भी पिछले राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे नहीं मानते. कहते हैं कि चुनाव में धांधली हुई थी.
मगर इसमें भी एक पेच है. ऐसा नहीं है कि सब ट्रंप के इशारे पर हो रहा है. ट्रंप ने तो गतिरोध के दूसरे दिन ही संसद में मेक्कार्थी का समर्थन भी कर दिया था. लेकिन उसके बावजूद केविन मेक्कार्थी जीत नहीं पाए. मतलब वजह कुछ और है.
मेक्कार्थी क्यों नहीं?कुछ रिपब्लिकन्स का मानना है कि मेक्कार्थी एक कमज़ोर नेता हैं. वो उनके दक्षिणपंथी एजेंडे का मनचाहा-मज़बूती से प्रचार-प्रसार नहीं कर पाएंगे. कुछ मेक्कार्थी का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मेक्कार्थी राष्ट्रपति जो बाइडन के सामने टक्कर का चेहरा नहीं हैं. कुछ निजी तौर पर मेक्कार्थी को पसंद नहीं करते हैं.
इन बागियों के अलावा भी कई रिपब्लिकंस को व्यक्तिगत रूप से शिकायत है कि मेक्कार्थी एक अवसरवादी और अविश्वसनीय हैं.
‘तालिबान-20’ तब तक कोई भी वादा या गठबंधन करने को तैयार नहीं है, जब तक कि स्थितियां बेहद जरूरी न हो जाएं. फ्लोरिडा के मैट गेट्ज, एरिजोना के एंडी बिग्स और कोलोराडो के लॉरेन बोएबर्ट साफ़ लफ्जे में कह चुके हैं कि केविन मेक्कार्थी के विरोध का उनका मन किसी भी समझौते से बदलने वाला नहीं है.
दुनियादारी: इस्लामाबाद में आतंकवादी हमले पर रेड अलर्ट, अमेरिका ने क्या चेतावनी दे दी?

















