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वायनाड में तबाही के बाद खुले स्कूल तो पहले दिन क्या हुआ, हादसे में 53 छात्रों की मौत हुई थी

Wayanad School Reopen: वायनाड में तबाही के बाद पहली बार मेप्पाडी गांव में स्कूल खोले गए. स्कूल में पहले दिन करीब 600 छात्र उपस्थित हुए.

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वायनाड में तबाही के बाद पहली बार मेप्पाडी गांव में स्कूल खोले गए. (सांकेतिक तस्वीर-आजतक)

केरल के वायनाड में बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद वहां के लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. लोग शिविरों से निकलकर अब अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट हो रहे हैं. ऐसे में सोमवार, 2 सितंबर को तबाही में सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके मेप्पाडी गांव में पहली बार स्कूल खोले गए. स्कूल में पहले दिन करीब 600 छात्र उपस्थित रहे. इन छात्रों में ज्यादातर ने अपने घर के किसी न किसी को इस बाढ़ में खो दिया है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 30 जुलाई की सुबह लैंडस्लाइड हुआ था. इस तबाही में सबसे ज्यादा मुंदक्कई और चूरलमाला गांव प्रभावित हुए थे. दोनों गांवों में सब कुछ तबाह हो गया था. यहां स्थित गवर्नमेंट वोकेशनल हायर सेकेंडरी स्कूल और गवर्नमेंट लोअर प्राइमरी स्कूल मुंदक्कई पूरी तरह से टूट गया था. अब इन दोनों स्कूलों के छात्रों को एक साथ जोड़ते हुए मेप्पाड़ी के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में स्थानांतरित किया गया है. जहां उनकी पहली बार क्लास चली. दोनों स्कूलों को मिलाकर 614 छात्र पढ़ते है. जिनमें से 600 की संख्या में छात्र पढ़ने के स्कूल पहुंचे. 

इन छात्रों के स्कूल वापसी पर सरकार ने स्वागत समारोह भी आयोजित किया गया था. पूरे स्कूल को सजाया गया था. छोटे बच्चों के बैठने के लिए कुर्सी और टेबल लगाया गया. स्कूल द्वारा छात्रों को नया ड्रेस दिया गया. उन्हें पढ़ने के लिए कॉपी-किताब जैसी चीजें दी गईं. 

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वहीं स्कूल के प्रिंसिपल उन्नीकृष्णन ने बताया कि क्लास फिर से शुरू होने के बाद छात्रों में काफी बदलाव आएंगे. इस आपदा ने बच्चों को दिमाग पर गहरा असर हुआ है. उससे उबरने में उन्हें मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि क्लास में छात्रों से भूस्खलन के संबंध में कोई जिक्र नहीं किया जाएगा. कोई भी उस मंजर को याद नहीं करना चाहता है. क्योंकि स्कूल में दो ऐसे छात्र हैं जो अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है. और कई छात्र ऐसे हैं जो माता-पिता में किसी एक को खोया है.

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उन्होंने बताया कि अभी शुरुआती दिनों में नियमित कक्षाएं नहीं चलेंगी. ऐसे में सभी शिक्षकों हादसे का शिकार हुए लोगों की मदद करने को कहा गया था.

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हादसे के बाद गांव ही खाली हो गए

रिपोर्ट के मुताबिक हादसे की चपेट में आने वाले गांवों में मुंदक्कई और अट्टा माला गांव पूरी तरह से खाली हो गया है. वहां अब एक भी परिवार नहीं रहता है. जबकि चूरलमाला गांव में कुछ परिवार तबाही के बाद अब जाकर रहने लगा है. इन गांवों के कुछ लोग अभी भी राहत शिविरों में ही रह रहे है. वहीं कुछ लोगों को मेप्पाड और अन्य जगहों पर किराए के मकान में शिफ्ट किया गया है. लैंडस्लाइड में करीब 231 लोगों की मौत और 78 लोग लापता हो गए थे. मरने वालों में 53 छात्र भी थे.

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