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पाकिस्तान में हिंदू को 'कुत्ता' कहो तो लोग हंसते हैं

यह तो किसी फसादी लीडर की जुबान लगती है. लेकिन यह बात पाकिस्तान के एक कॉमेडी शो में कही गई.

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फोटो - thelallantop
क्या कॉमेडी के नाम पर किसी की धार्मिक पहचान का जिक्र करते हुए उसे 'कुत्ता' कहा जा सकता है? मसलन, हिंदू कुत्ता? मुस्लिम कुत्ता? ईसाई, सिख, जैन या बौद्ध कुत्ता? यह तो किसी फसादी लीडर की जुबान लगती है. जो नस्लों को मानता होगा और दूसरे मजहब को नफरत से देखता होगा. लेकिन यह बात पाकिस्तान के एक कॉमेडी शो में कही गई है. वहां एक टीवी चैनल पर 'हिंदू कुत्ता' शब्द का इस्तेमाल किया गया.

कॉमेडी शो की एक महिला कैरेक्टर पूछती है, 'तुमने नवाज शरीफ साहब की जमीन खरीदी?'

जवाब मिलता है, 'मैं खरीदने लगा था ताया जी. पर वो एक हिंदू कुत्ते ने खरीद लिया.'

इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह थी कि इस कमेंट पर ऑडियंस में बैठी महिलाएं हंसने और जोर-जोर से तालियां पीटने लगीं.

इस शो का नाम है 'सवा तीन'. जिस एपिसोड में यह बात कही गई वह 8 अप्रैल को टेलीकास्ट हुआ था. जिस कॉमेडियन ने यह बात कही, उनका नाम है सजन अब्बास. याद रखा जाए कि पाकिस्तान में भी लाखों हिंदू रहते हैं. उनके अपने मंदिर हैं, मान्यताएं है. उनकी घटती जनसंख्या और खराब हालात जगजाहिर हैं. इस घटना से आप पाकिस्तानी लोकतंत्र के बारे में भी कोई राय कायम कर सकते हैं, जहां कोई भी अल्पसंख्यकों के बारे में कुछ भी बोल सकता है. https://www.youtube.com/watch?v=Tn0QQ2IIh2c ऐसा नहीं है कि इस शर्मनाक घटना के खिलाफ पाकिस्तान में कोई कुछ नहीं बोल रहा. पाकिस्तानी हिंदू तो आहत हैं ही, प्रोग्रेसिव मुसलमान भी इसकी मुखालफत कर रहे हैं. पत्रकार हसन रजा ने 'द नेशन' के लिए जो लिखा है, वह इस टीवी शो की स्क्रिप्ट लिखने वालों के लिए आईने जैसा है. वह लिखते हैं,
'पाकिस्तान में लाखों हिंदू रहते हैं. इसके बावजूद इसे ऑन एयर कैसे होने दिया गया, मैं हैरान हूं. मीडिया एथिक्स? PEMRA (पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी) के नियम? हेलो? कोई है?' 'किसी धर्मिक समूह को 'कुत्ता' कहने पर हमें हंसी आती है, पर तब बड़ा बवाल खड़ा हो जाता है जब डोनल्ड ट्रंप ऐसी ही बात मुसलमानों के लिए कहते हैं. मीलों दूर अमेरिका में बैठे एक रेसिस्ट की शिकायत करने से पहले अपने अंदर झांककर देखें. कि हम अपने लोगों के साथ क्या कर रहे हैं? उन लोगों के साथ, जो इस जमीन पर हजारों साल से रह रहे हैं, मुसलमानों के यहां पहुंचने से भी पहले.' 'एक चीज साफ समझ लें. हर हिंदू इंडियन नहीं है. हर इंडियन हिंदू नहीं है और हर पाकिस्तानी मुसलमान नहीं है. इंडिया के खिलाफ अपने अंधराष्ट्रवाद में हम पाकिस्तानी हिंदुओं का सम्मान भूल जाते हैं. वो इसी जमीन के वफादार बेटे हैं. वतनपरस्ती नैचुरल चीज है और इसके लिए किसी खास कौम का होने की जरूरत नहीं होती.'
वैसे पाकिस्तान के बहुत सारे हिंदू अपनी काबिलियत से अपने वतन का नाम रौशन कर चुके हैं. फिल्म प्रोड्यूसर जे.सी. आनंद, सतीश आनंद, म्यूजिशियन दीबो भट्टाचार्य, क्रिकेटर दानिश कनेरिया, ड्रेस डिजाइनर दीपक परवानी, स्नूकर प्लेयर नवीन परवानी, ये सिर्फ चंद नाम हैं. खैर, उस शो की स्क्रिप्ट लिखने वालों, तुम कुछ भी कहो. एक हिंदू बहुल देश से हमारा पैगाम यही है, यही रहेगा-  कि दोनों देशों की अवाम ज़िंदाबाद. फिरकापरस्ती मुर्दाबाद.

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