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पेंगुइन जो बुद्ध होने निकल पड़ा... इसकी कहानी इंटरनेट पर इतनी वायरल क्यों हो रही?

Penguin जाने से पहले एक बार पीछे पलट कर देखता है, जैसे कह रहा हो कि बस अब यहां और नहीं रहना. पेंगुइन अक्सर अपनी कॉलोनी माने झुंड के साथ ही रहते हैं. शायद ही किसी ने कभी कोई ऐसा पेंगुइन देखा हो जो अकेला हो. लेकिन इस एक पेंगुइन ने न समंदर में जाकर खाना ढूंढना चुना, न अपने झुंड के साथ रुका.

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वायरल हो रहा पेंगुइन अपने झुंड को छोड़कर पहाड़ी की तरफ चला गया (PHOTO- Screengrab from Encounters at the End of the World Documentary by Werner Herzog)

एक कहानी है जो हम सबने सुनी है. कहानी भगवान बुद्ध की. वही बुद्ध जिनका नाम पहले सिद्धार्थ था. वही बुद्ध जो पहले राजकुमार थे, लेकिन इक रोज संसार की पीड़ा देखी और निकल पड़े महाप्रस्थान पर. लेकिन वो बुद्ध थे. अब जरूरी तो नहीं कि बुद्ध होने के लिए मनुष्य योनि में ही जन्म लेना हो. लिहाजा 2007 में एक पेंगुइन ‘बुद्ध होने’ निकल गया. पेंगुइन अक्सर अपनी कॉलोनी माने झुंड के साथ ही रहते हैं. शायद ही किसी ने कभी कोई ऐसा पेंगुइन देखा हो जो अकेला हो. लेकिन एक पेंगुइन ने न समंदर में जाकर खाना ढूंढना चुना, न अपने झुंड के साथ रुका, जहां सुरक्षा है. शायद मौत भी निश्चित है. लेकिन वो चल पड़ा अपने एक सफर पर. और उसके सफर की ये तस्वीर इंटरनेट पर वायरल है. जिस तरह से वो पेंगुइन पहाड़ों की तरफ जा रहा है, उस पर इंटरनेट यूजर्स तरह-तरह के रिएक्शंस दे रहे हैं. कोई कह रहा है कि पेंगुइन ‘बुद्ध होने’ निकल पड़ा है, तो कोई उसके फौलादी हौसले की दाद दे रहा है. आइए सब जानते हैं. 

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2007 की डॉक्यूमेंट्री, 2026 में वायरल क्लिप

वायरल पेंगुइन की क्लिप एक डॉक्यूमेंट्री की है. मशहूर जर्मन फिल्ममेकर वर्नर हर्जेग ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई. नाम था Encounters at the End of the World. यानी ‘दुनिया के छोर पर हुई मुलाकातें’. इस वीडियो क्लिप में डॉक्यूमेंट्री का एक मार्मिक पल दिखाया गया है. ये क्लिप एक अकेले पेंगुइन की रहस्यमय यात्रा की कहानी बयां करती है. 

वर्नर हर्जेग साउथ पोल पर फिल्माए गए कुछ फुटेज के बाद, एक पेंगुइन साइंटिस्ट डेविड आइन्ले का इंटरव्यू लेते हैं. वह आइन्ले से पेंगुइन की सेक्सुअलिटी और मानसिक स्थितियों के बारे में बात करते हैं. और इसके बाद डॉक्यूमेंट्री के आखिर में हर्जेग एक अकेले पेंगुइन को दिखाते हैं जो अपने झुंड का साथ छोड़ देता है. समुद्र में खाना खाने के लिए जाने या अपने ग्रुप में लौटने के बजाय, वह पेंगुइन मुड़ता है पहाड़ी अंदरूनी इलाके की ओर लड़खड़ाते हुए चल पड़ता है. 

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लेकिन जाने से पहले वो एक बार पीछे पलट कर देखता है, जैसे कह कहा हो कि ‘बस अब यहां और नहीं रहना’. और यही इस क्लिप का सबसे इमोशनल लम्हा है. वो ऐसे सफर पर जा रहा है जहां उसकी मौत पक्की है. यह सीन इंटरनेट पर एक पॉपुलर मीम बन गया है, जिसका इस्तेमाल अकेलेपन, निराशा या जिंदगी की बेतुकी बातों को दिखाने के लिए किया जा रहा है. तो पेंगुइन के बारे में जान लिया, उसकी कहानी समझ ली. अब लोगों के रिएक्शंस भी जान लेते हैं.

इंटरनेट पर रिएक्शंस की बाढ़

वायरल पेंगुइन को लेकर इंटरनेट पर कहीं फनी, कहीं जोशीले तो कहीं सैड वाले रिएक्शंस और क्लिप्स दिख रहे हैं. एक क्लिप वायरल है जिसमें बॉलीवुड फिल्म ‘धड़कन’ में सुनील शेट्टी का डायलॉग वायरल है. इस क्लिप में सुनील शेट्टी कह रहे हैं,

मैं रोज चलता था, चलते-चलते थक जाता था. गिरता था, उठता था, जख्म भरते थे, लहू निकलता था. फिर गिरता था, एक कदम और देव, एक कदम और.

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लोग कह रहे हैं कि एक अकेले पेंगुइन के अपने ग्रुप को छोड़कर पहाड़ों की ओर जाने और वापस आने से मना करने के सीन से वो उसके फैन हो गए हैं. जैसे वो लहरों के विपरीत चल कर हम इंसानों के लिए भी कोई एग्जाम्पल सेट कर रहा हो. कुछ लोगों ने इसे आजादी की इच्छा का इजहार माना है, कुछ ने इसे रूटीन और बोरियत के खिलाफ एक विद्रोह समझा है, और कुछ ने इसे मोटिवेशनल माना है.

इंटरनेट पर एक धड़ा ऐसा भी है जो इस पेंगुइन के बागी और विद्रोही नेचर को सराह रहा है. पेंगुइन अपनी कॉलोनी छोड़कर समुद्र के बजाय पहाड़ों की ओर जा रहा है. यह एक ऐसा कदम है जो जानलेवा हो सकता है. हर्जेग इस पल का इस्तेमाल अस्तित्व के संकट के प्रतीक के तौर पर कर रहे हैं. इसमें पेंगुइन ने अपनी सुरक्षा और सहज जिंदगी को पीछे छोड़ दिया है. कुछ लोग इसे शून्यवाद मान रहे हैं, तो कुछ इसे जीवन का अर्थ तलाशने की राह में एक विद्रोही कदम बता रहे हैं.

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